Ayodhya Ram Mnadir: कृष्ण की कर्मभूमि से 1983 में रखी गई थी आंदोलन की नींव
- - मुजफ्फरनगर में 1983 में हुए विराट हिंदू सम्मेलन में पास हुआ था पहला प्रस्ताव
- - शामली समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से शामिल हुए थे रामभक्त
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श्रीराम मंदिर आंदोलन भले ही 90 के दशक में चरम पर पहुंचा हो लेकिन इसकी नींव पहले ही रख दी गई थी। महाभारतकालीन और श्री कृष्ण की कर्मभूमि माने जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से 1983 में राम मंदिर आंदोलन का आगाज हुआ था। यहां जीआईसी मैदान में हुए विराट हिंदू सम्मेलन में अयोध्या सहित मथुरा और काशी के स्थलों को अपने अधिकार में लेने की मांग उठी थी। शामली समेत वेस्ट यूपी के कई जिलों से हिंदू समाज के लोग सम्मेलन में शामिल हुए थे।
मुरादाबाद की कांठ सीट से विधायक और प्रदेश कैबिनेट में मंत्री रहे कांग्रेस नेता दाऊ दयाल खन्ना ने राम जन्मभूमि मुक्ति की आवाज पहली बार इसी सम्मेलन में सार्वजनिक मंच से उठाई थी। मंच पर आरएसएस के सरसंघ चालक रज्जू भैया और विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल भी मौजूद थे।
शामली निवासी संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता रामरतन लाल सिंघल बताते हैं कि उस समय शामली क्षेत्र मुजफ्फरनगर जिले का ही हिस्सा था। मार्च 1983 में मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में हुए हिंदू सम्मेलन में बड़ी तादाद में हिंदू समाज के लोग उमड़े थे। मुख्य संयोजक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन जिला प्रचारक और वर्तमान में प्रख्यात श्रीराम कथा वाचक विजय कौशल महाराज थे।
राणा प्रताप के वंशज राणा भगवंत सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए थे। कांग्रेस नेता दाऊ दयाल खन्ना के साथ ही अन्य वक्ताओं ने भी राम जन्मभूमि मुक्ति की आवाज बुलंद की थी।
इस सम्मेलन से ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर अयोध्या, काशी एवं मथुरा को हिंदुओं को सौंपने की मांग की गई थी। इसके बाद देशभर में हिंदू सम्मेलन हुए और अप्रैल 1984 को दिल्ली की धर्म संसद में राम जन्मभूमि के द्वार का ताला खुलवाने को जनजागरण यात्राएं शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
सम्मेलन में जुटी थी जबर्दस्त भीड़
हिंदू सम्मेलन को लेकर लोगों में जबर्दस्त उत्साह था। साधनों की कमी के बावजूद सम्मेलन में भारी भीड़ जुटी थी। रामरतन लाल सिंघल बताते हैं कि शामली क्षेत्र से बड़ी संख्या में रामभक्तों ने इस सम्मेलन में हिस्सेदारी की थी। संयोजक मंडल में शामिल लोगों ने बहुत कम समय ही कार्यक्रम की तैयारी की थी।
लोग खुद ही एक-दूसरे से प्रचार कर रहे थे और सम्मेलन में पहुंचने का आह्वान कर रहे थे। लोगों के खाने के लिए घर-घर से भोजन के पैकेट दिए गए थे। लोगों में इतना उत्साह था कि कोई राम, लक्ष्मण, हनुमान का वेश धर कर गया था तो काई ट्रैक्टर-ट्राली पर रामलीला का मंचन करता जा रहा था। महिलाओं की भी जबर्दस्त भागेदारी थी।
विजय कौशल महाराज ने निकाली थी गंगा यात्रा
देश में राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत के साथ ही शामली क्षेत्र में इसका आगाज हो गया था। रामरतन लाल सिंघल बताते हैं कि उस समय मुजफ्फरनगर में आरएसएस के प्रचारक रहे विजय कौशल महाराज ने गंगा जल यात्रा निकाली थी। गांव-गांव में मंदिर आंदोलन को लेकर जबर्दस्त माहौल था।
शिलापूजन कार्यक्रम हुए, शुकतीर्थ से ज्योति यात्रा निकाली गई और पूरे क्षेत्र में राम मंदिर आंदोलन की गरमाहट बढ़ने लगी। उन्हीं दिनों हनुमान धाम पर विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल की सभा हुई थी। वह बताते हैं कि दिन भर दुकान पर रहने के बाद शाम को प्रचार के लिए निकल जाते थे। लोगों से संपर्क करते, पत्रक बांटते। सुबह दुकान खोलने से पहले भी इसी काम पर लगे रहते थे।
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