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HIV पीड़ित सावधान: मिस्ड कॉल नहीं दी तो डॉक्टर साहब आ जाएंगे घर
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:22 AM IST
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एचआईवी-टीबी
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एचआईवी-टीबी से पीड़ित मरीजों का हाल महज एक मिस्ड कॉल से पता चल रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। जानिए ये सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है।
मेरठ में एचआईवी-टीबी से पीड़ित मरीजों का हाल महज एक मिस्ड कॉल से पता चल रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिससे यह पता चल जाता है कि मरीज रेग्युलर दवाइयां ले रहा है या नहीं। इसके लिए मरीज को दवा खाने के बाद मिस्ड कॉल देने होती है। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो डॉक्टर उसके घर पहुंच जाते हैं। फिलहाल मेरठ में इन दिनों एचआईवी-टीबी से पीड़ित 31 मरीजों की इसी तरह मॉनिटरिंग की जा रही है।
जिला अस्पताल के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर एचआईवी के साथ टीबी से पीड़ित मरीजों के लिए 99 डॉट्स दवा दी जा रही है। यदि मरीज मिस्ड कॉल नहीं करता है तो डॉक्टर और स्टाफ उसके घर पहुंच जाते है और दवाई खिलाते हैं। टीबी विभाग के जिला सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर अजय सक्सेना ने बताया कि अगर कोई मरीज टीबी और एचआईवी दोनों से पीड़ित है तो स्वास्थ्य विभाग उसके मोबाइल नंबर को 99 डॉट्स सॉफ्टवेयर पर रजिस्टर करेगा। मिस्ड कॉल 99 डॉट्स पोर्टल पर दिखाई देगा।
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मेरठ में एचआईवी-टीबी से पीड़ित मरीजों का हाल महज एक मिस्ड कॉल से पता चल रहा है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिससे यह पता चल जाता है कि मरीज रेग्युलर दवाइयां ले रहा है या नहीं। इसके लिए मरीज को दवा खाने के बाद मिस्ड कॉल देने होती है। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो डॉक्टर उसके घर पहुंच जाते हैं। फिलहाल मेरठ में इन दिनों एचआईवी-टीबी से पीड़ित 31 मरीजों की इसी तरह मॉनिटरिंग की जा रही है।
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जिला अस्पताल के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर एचआईवी के साथ टीबी से पीड़ित मरीजों के लिए 99 डॉट्स दवा दी जा रही है। यदि मरीज मिस्ड कॉल नहीं करता है तो डॉक्टर और स्टाफ उसके घर पहुंच जाते है और दवाई खिलाते हैं। टीबी विभाग के जिला सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर अजय सक्सेना ने बताया कि अगर कोई मरीज टीबी और एचआईवी दोनों से पीड़ित है तो स्वास्थ्य विभाग उसके मोबाइल नंबर को 99 डॉट्स सॉफ्टवेयर पर रजिस्टर करेगा। मिस्ड कॉल 99 डॉट्स पोर्टल पर दिखाई देगा।
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