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आषाढ़ संक्रांति 2020: 14 जून से सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश, ऐसा करने से मिलेगा लाभ

Thu, 11 Jun 2020 12:45 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 11 Jun 2020 12:45 PM IST
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Ashadh Sankranti 2020, Sun will enter Gemini from 14 June
सूर्य - फोटो : सोशल मीडिया

कोरोना महामारी के चलते इस बार देव शयनी से पूर्व भगवान विष्णु नगर भ्रमण को निकलेंगे। इसको लेकर धार्मिक संगठनों में चर्चा शुरू हो गई है। 23 जून को रथयात्रा आरंभ होगी। एक जुलाई को देव शयनी एकादशी है। रविवार 14 जून सूर्य राशि मिथुन में रात्रि 11:53 पर प्रवेश करेंगे। पुण्य काल अगले दिन सोमवार प्रात: 06:17 तक रहेगा। इन सबके बीच माह में तीन ग्रहण पड़ेंगे। 21 जून को अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण का दुष्प्रभाव रहने की आशंका है। हिंदू पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ पांच जुलाई 2020 को गुरु पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा। आषाढ़ के प्रमुख त्योहारों में जगन्नाथ रथयात्रा है। इस महीने में सूर्य और देवी की गुप्त नवरात्रि 22 जून को शुरू होंगे। 

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इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलोजीकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार इसमें देवी के नौ रूपों की आराधना कर सिद्धि प्राप्त की जाती है। इसी महीने देवशयनी एकादशी से श्री हरि विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं। इसी के साथ चतुर्मास आरंभ हो जाता है।
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दान एवं धर्म से शुभ फल
आषाढ़ संक्रांति में सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। यह पर्व 14 जून को मनाया जाएगा। संक्रांति पुण्य काल समय में दान एवं धर्म के कार्य किए जाते हैं। जिनसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों में इस दिन देव उपासना एवं साधना का विशेष महत्व बताया है। संक्रांति अध्यात्म ही नहीं बल्कि दैनिक व्यावहारिक नजरिए से भी लाभदायक है। संक्रांति की पुण्य योग से इस शुभ तत्वों की प्राप्ति संभव है।

यह भी पढ़ें: लॉकडाउन में लगा तगड़ा झटका, खास रिपोर्ट में पढ़िए- बिजली उपभोक्ताओं को कैसे झेलनी पड़ी 25 करोड़ की मार

आषाढ़ में तीन ग्रहण
आषाढ़ के महीने में तीन ग्रहण लगेंगे। जिसमें दो चंद्र उपच्छाया ग्रहण और एक सूर्य ग्रहण होगा। माह की शुरुआत भी चंद्र उपच्छाया ग्रहण से हुई। वहीं, इसका अंत भी चंद्र ग्रहण से होगा। अब 21 जून को सूर्य ग्रहण होगा। दूसरा चंद्र उपच्छाया ग्रहण पांच जुलाई को लगेगा। जबकि पहला चंद्र उपच्छाया ग्रहण पांच-छह जून की रात्रि को हो चुका है।

सूर्य ग्रहण के अशुभ प्रभाव 
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि 21 जून को अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। ज्योतिष में इन ग्रहणों का लगना अच्छा नहीं माना जा रहा है। देश और धरती पर इनका अशुभ प्रभाव पड़ेगा।

- पूरे देश में मनाया जाएगा पर्व 
आषाढ़ संक्रांति देश के सभी हिस्सों में किसी न किसी रूप में मनाई जाती है। शुभ दिन का आरंभ प्राय: स्नान और सूर्य उपासना से होता है। महामंडलेश्वर नीलिमानंद जी ने कहा कि ऐसी धारणा है कि ऐसा करने से स्वयं की शुद्धि होती है और पुण्य लाभ भी मिलता है। इस दिन गायत्री महामंत्र का श्रद्धा से उच्चारण किया जाना चाहिए और सूर्य मंत्र का जाप करना उत्तम होता है। इससे बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। संक्रांति का आरंभ सूर्य की परिक्रमा से किया जाता है। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन को संक्रांति कहते हैं। संक्रांति के दिन मिष्ठान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। यह भोग प्रसाद परिजनों में बांटा जाता है।
 
- धार्मिक मान्यता के अनुसार
पंडित चंडी प्रसाद ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ माह में गुरु की उपासना सबसे फलदायी होती है। इस महीने में श्री हरि विष्णु की उपासना से भी संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। इस महीने में जल देव की उपासना का भी महत्व है। ऊर्जा के स्तर को संयमित रखने के लिए आषाढ़ के महीने में सूर्य की उपासना की जाती है। कोरोना महामारी के बीच आषाढ़ स्वास्थ के नजरिए से ठीक नहीं होगा। दरअसल आषाढ़ संधि काल का महीना है। आषाढ़ से वर्षा ऋतु की शुरू होने से रोगों का संक्रमण सर्वाधिक होता है।

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