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लॉकडाउन में लगा तगड़ा झटका, खास रिपोर्ट में पढ़िए- बिजली उपभोक्ताओं को कैसे झेलनी पड़ी 25 करोड़ की मार

Thu, 11 Jun 2020 10:29 AM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 11 Jun 2020 10:29 AM IST
सार

  • टैरिफ के हिसाब से बढ़ गया बिल, बिलों में संशोधन करने से हाथ खडे़ कर रहे हैं कर्मचारी
  • पीवीवीएनएल : मेरठ शहर में उपभोक्ताओं को 02 करोड़ का झटका
  • 14 जिलों के उपभोक्ताओं को लगा 25 करोड़ का झटका

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Amar Ujala Special Report, 25 crores more have been take from electricity consumers of 14 districts in Uttar Pradesh
बिजली का बिल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पावर कारपोरेशन ने कोरोना संकट काल में पहले से ही आर्थिक रूप से बेहाल चल रहे शहरी उपभोक्ताओं की जेब पर करीब दो करोड़ का भार डाल दिया है। औसत फॉर्मूले के आधार पर भेजे गए बिलों की रीडिंग अब मीटर रीडिंग आधारित बिलों में भी जोड़कर भेजी जा रही है। इससे बढ़ी टैरिफ दरों ने करीब एक लाख घरेलू उपभोक्ताओं के बिलों में औसतन 200 रुपये का इजाफा कर दिया है। इससे शहर के उपभोक्ताओं की जेब से ही निगम ने करीब दो करोड़ रुपये निकालने का काम किया है।

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कंपनी अंतर्गत आने वाले 14 जिलों के उपभोक्ताओं को इसमें शामिल करें तो यह रकम करीब 25 करोड़ पहुंच रही है। बढ़े बिजली बिलों का झटका उन उपभोक्ताओं को भी लग रहा है जो हर महीने ऑनलाइन बिल जमा करते रहे हैं। बढ़े बिलों में संशोधन करने से निगम कर्मी यह कहकर हाथ खड़े कर रहे हैं कि सॉफ्टवेयर में इसकी प्रोग्रामिंग ही नहीं है।
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केस - 1
सुभाष नगर निवासी उपभोक्ता मामचंद प्रेमी का दो किलोवाट का घरेलू कनेक्शन है। इनका प्रतिमाह बिल औसतन 1500 रुपये तक आता है। इस बार इनके पास दो महीने का बिल 9000 रुपये का भेजा है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
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केस - 2
आदर्शनगर कंकरखेड़ा निवासी वरुण सांगवान ने बताया कि कोरोना के चलते औसत आधार पर 1400 रुपये का बिल भेजा जा रहा था। इसे जमा करा दिया। अब मीटर रीडिंग से बने बिल में पिछले जमा बिल भी जोड़कर भेज दिए हैं। संशोधन भी नहीं हो रहा है। 
 
केस - 3
गंगानगर निवासी अमित कुमार ने बताया कि उनका हर महीने करीब 2000 रुपये का बिल आता था। इस बार 4500 रुपये का बिल भेजा गया है।

उपभोक्ता और ज्यादा परेशान
लॉकडाउन के चलते लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऊपर से बढ़े बिजली बिलों ने हालत और खस्ता कर दी है। उपभोक्ता बिल दुरुस्त कराने जा रहे हैं तो उन्हें टरकाया जा रहा है या आजकल कहकर चक्कर कटवाए जा रहे हैं।

इस तरह लगा टैरिफ दरों का झटका
0 से 150 यूनिट तक बिजली दरें 5.50 रुपये प्रति यूनिट है। 151 से 300 यूनिट तक का रेट छह रुपये प्रति यूनिट है। 301 से 500 यूनिट तक 6.50 रुपये और 501 से ऊपर 7 रुपये प्रति यूनिट है। इसी टैरिफ रेट के शिकार वे उपभोक्ता हो गए जिनकी यूनिट 150 तक ही आती थी। औसत बिल में छूटी यूनिट मीटर रीडिंग आधारित बिल में जुड़कर आने से उनकी यूनिट 150 से ज्यादा हो गईं। इसके चलते बिल 5.50 रुपये प्रति यूनिट की बजाय 6.00 से 6.50 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बनाया। निगम की इस गलती का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। 

क्या बोले अधिकारी
लॉकडाउन के चलते मार्च और अप्रैल का बिल मीटर रीडिंग से नहीं बने। इसके लिए दिसंबर से जनवरी तक के तीन महीने के बिलों के आधार पर औसत फॉर्मूले से बिल बनाकर उपभोक्ताओं को मैसेज से भेजे गए। अब मई का बिल मीटर रीडिंग आधारित भेजा जा रहा है। गर्मी में खपत बढ़ने से बिल ज्यादा आना प्रतीत हो रहा है। बिल में कोई हेराफेरी नहीं की जा रही है। बिल संशोधन के लिए अलग से स्टाफ है। कहीं कोई गड़बड़ी या मना कर रहा है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ

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