{"_id":"692edd8853e3f889d60faf2d","slug":"artificial-intelligence-the-beginning-of-a-new-revolution-meerut-news-c-72-1-mct1014-144909-2025-12-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृत्रिम बुद्धिमत्ता : नई क्रांति की शुरूआत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृत्रिम बुद्धिमत्ता : नई क्रांति की शुरूआत
विज्ञापन
सीसीएसयू में रक्षा अनुसंधान एवं डीआरडीओ के तत्वावधान में पांच दिवसीय कार्यशाला में जुटे देश दुनिया के दिग्गज
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में गणित विभाग ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) दिल्ली के साथ मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नए आयाम, साइबर सुरक्षा और अनुकरण विषय पर पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। विवेकानंद भारत फाउंडेशन के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब सिर्फ मशीन नहीं रही, यह नैतिक निर्णय, रचनात्मकता और आम समझ तक में दखल देने लगी हैं, लेकिन खतरा यह है कि हम इसका इतना इस्तेमाल कर रहे हैं कि अपनी सोचने-समझने की शक्ति ही खोते जा रहे हैं। आईयूएसी दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांतिकारी ताकत को सबके सामने रखा।
इस दौरान देश-विदेश के शीर्ष वैज्ञानिक, शोधकर्ता और सैकड़ों विद्यार्थी एक छत के नीचे जुटे और विषय पर अपने विचार रखे। विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि दो से छह दिसंबर तक कुल 24 तकनीकी सत्र होंगे।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि यह कार्यशाला मेरठ को विश्व स्तर पर तकनीकी नक्शे में ला रही है। हर विद्यार्थी और शोधकर्ता इसका पूरा लाभ उठाए। शोध निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह ने बहु-विषयी शोध की जरूरत बताई तो अकादमिक निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने नई शिक्षा में तकनीक की अनिवार्यता पर जोर दिया। प्रो. सुजीत कुमार सिंह ने नासिक शहर के कचरा प्रबंधन में नई गणितीय तकनीक से सबको हैरान किया। प्रो. अपू कुमार साहा ने बताया कि सौर पैनल का कचरा कैसे दोबारा इस्तेमाल किया जाए ताकि पर्यावरण भी बचे और धातु भी। डॉ. नेहा यादव ने भौतिकी के सबसे जटिल समीकरणों को तंत्रिका जाल की मदद से इतने सरल तरीके से हल करने का रास्ता दिखाया कि सभागार तालियों से गूंज उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में गणित विभाग ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) दिल्ली के साथ मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नए आयाम, साइबर सुरक्षा और अनुकरण विषय पर पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। विवेकानंद भारत फाउंडेशन के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब सिर्फ मशीन नहीं रही, यह नैतिक निर्णय, रचनात्मकता और आम समझ तक में दखल देने लगी हैं, लेकिन खतरा यह है कि हम इसका इतना इस्तेमाल कर रहे हैं कि अपनी सोचने-समझने की शक्ति ही खोते जा रहे हैं। आईयूएसी दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय ने रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांतिकारी ताकत को सबके सामने रखा।
इस दौरान देश-विदेश के शीर्ष वैज्ञानिक, शोधकर्ता और सैकड़ों विद्यार्थी एक छत के नीचे जुटे और विषय पर अपने विचार रखे। विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि दो से छह दिसंबर तक कुल 24 तकनीकी सत्र होंगे।
विज्ञापन
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि यह कार्यशाला मेरठ को विश्व स्तर पर तकनीकी नक्शे में ला रही है। हर विद्यार्थी और शोधकर्ता इसका पूरा लाभ उठाए। शोध निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह ने बहु-विषयी शोध की जरूरत बताई तो अकादमिक निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने नई शिक्षा में तकनीक की अनिवार्यता पर जोर दिया। प्रो. सुजीत कुमार सिंह ने नासिक शहर के कचरा प्रबंधन में नई गणितीय तकनीक से सबको हैरान किया। प्रो. अपू कुमार साहा ने बताया कि सौर पैनल का कचरा कैसे दोबारा इस्तेमाल किया जाए ताकि पर्यावरण भी बचे और धातु भी। डॉ. नेहा यादव ने भौतिकी के सबसे जटिल समीकरणों को तंत्रिका जाल की मदद से इतने सरल तरीके से हल करने का रास्ता दिखाया कि सभागार तालियों से गूंज उठा।
विज्ञापन