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यूपी: मेरठ में कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी का बंगला अधिगृहीत करेगी सेना

Wed, 21 Aug 2019 02:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 21 Aug 2019 02:18 AM IST
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Army to acquire bungalow of Cantt Board vice-president Vipin Sodhi
कैंट स्थित सैंट मैरीज स्कूल के सामने कैंटबोर्ड के उपाध्यक्ष विपिन सोढी का बंगला।
कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी का बंगला सेना अधिगृहीत करेगी। अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए आर्मी बेस वर्कशॉप के कमान अधिकारी की अध्यक्षता में बोर्ड गठित कर दिया गया है। ये बंगला जनरल लैंड रजिस्टर में कर्नल वरिआम सिंह व अर्जुन सिंह आदि के नाम पर दर्ज है। ये पांचवां बंगला होगा, जिसे अधिगृहीत किया जाएगा। इससे पहले एक साल में रक्षा संपदा विभाग चार बंगले अधिगृहीत कर चुका है।
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करियप्पा रोड पर सेंट मेरीज के सामने बंगला नंबर 105 है, जो कि कर्नल वरिआम सिंह और अर्जुन सिंह के नाम पर है। बंगले में कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी रहते हैं। ये बंगला बी-थ्री ओल्ड ग्रांट रक्षा संपदा अधिकारी के प्रबंध के अधीन आता है। बी-थ्री ओल्ड ग्रांट प्रॉपर्टी को सेना के मांगे जाने पर कभी भी अधिगृहीत किया जा सकता है।
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इस बंगले को भी सेना की तरफ से इस्तेमाल करने के लिए मांगा गया है। सब एरिया हेडक्वार्टर में डिमांड जाने के बाद सेना के अफसरों से रक्षा संपदा अधिकारी को पत्र लिखकर आगे की कार्रवाई के लिए कहा गया। अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए आर्मी बेस वर्कशॉप के कमान अधिकारी की अध्यक्षता में तीन अधिकारियों का बोर्ड गठित किया गया है।

सेना की तरफ से कहा गया है कि उनके इस्तेमाल के लिए 1500 एकड़ भूमि मिलिट्री फार्म की मौजूद है। उन्हें 272 एकड़ भूमि की और जरूरत है। इस कमी को पूरा करने के लिए ओल्ड ग्रांट के जो दोनों बंगले हैं, उन्हें हमें दिया जाए। साथ ही बंगलों की भूमि को ओल्ड ग्रांट से मिलिट्री सैन्य भूमि ए-वन में बदल दिया जाए।

 

एक साल में चार बंगले हो चुके अधिगृहीत
105 करियप्पा रोड स्थित बंगले के साथ ही पांच आरए लाइंस तोपखाना बंगले का भी सेना ने अधिग्रहण करने की मांग की है। इससे पहले एक साल के भीतर डीआईओ भावना सिंह के निर्देशन में चार बंगले अधिगृहीत किए जा चुके हैं।

इनमें बंगला नंबर 111, 137, 165 और 259 शामिल हैं। कैंट की सारी जमीन रक्षा संपदा कार्यालय के अंतर्गत आती है। इसका ओल्ड ग्रांट लीज वाले बंगलों का प्रबंधन भी डीईओ कार्यालय में आता है।

कैंट में 7 तरह की प्रॉपर्टी
ए वन - सेना की जमीन है।
ए टू - सेना की जमीन, जिसे भविष्य की योजनाओं के लिए छोड़ा गया है।
बी वन एवं बी टू - अंग्रेजों के समय से इस जमीन को प्रदेश सरकार को थाना, तहसील, बस अड्डा, सिटी स्टेशन, कैंट स्टेशन आदि के लिए दिया गया।
बी थ्री - कब्जेदारों के पास है, जिसमें सिविल आबादी रह रही है। लेकिन इनको सेना अपने इस्तेमाल के लिए ले सकती है। इसकी एवज में जो इमारत खड़ी रहती है, उसका नियमों के हिसाब से आकलन कर मुआवजा दिया जाता है।
बी फोर - सिविल एरिया में खाली पड़े मैदान
सी क्लास - छावनी परिषद के बाजार एरिया।

मुझे जानकारी नहीं : विपिन सोढ़ी
कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी से जब इस बारे में बात की गई, तो उनका कहना था कि इस तरह के किसी मामले की जानकारी नहीं है।
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