वन गुर्जरों के डेरे के पास गिरा सेना की तोप का गोला, गर्भवती की मौत, दो घायल
सहारनपुर के बेहट में आरक्षित वन क्षेत्र (शिवालिक वन प्रभाग) की बादशाहीबाग वन रेंज क्षेत्र की चपड़ी खोल में फायरिंग अभ्यास के दौरान तोप का एक गोला वन गुर्जरों के डेरे के पास जा गिरा। विस्फोट होने से गर्भवती की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि वन विभाग के वाचर समेत दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वाचर को वन विभाग के अधिकारियों ने सीएचसी में भर्ती कराया जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। विस्फोट होने से छह मवेशी भी घायल हुए हैं। सूचना मिलने पर सीओ बेहट शिवराज सिंह और थाना मिर्जापुर पुलिस मौके पर पहुंची। मृतक के परिजनों के पोस्टमार्टम कराने से इंकार करने पर पुलिस शव का पंचनामा भरने के बाद लौट आई।
हादसा दोपहर करीब दो बजे हुआ। शिवालिक वन प्रभाग की बादशाहीबाग वन रेंज क्षेत्र के जंगल में शेरपुर पेलो गांव के पास सेना फायरिंग का अभ्यास कर रही है। दोपहर के समय चपड़ी खोल में रहने वाले नूर अहमद, सुल्तान, तालिब और नूर मोहम्मद आदि वन गुर्जरों के डेरे के पास तोप का एक गोला गिर गया और उसमें विस्फोट हो गया। जिसमें वन गुर्जर सैमुलक की पत्नी फातिमा (32) की मौके पर ही मौत हो गई। फातिमा सात महीने की गर्भवती थी, जबकि डेरों पर पोलियो ड्राप्स पिलाने के लिए गई वन विभाग की टीम में शामिल वाचर अब्दुल गनी और वन गुर्जर इमाम हुसैन (30) पुत्र सुल्तान घायल हो गए। इमाम हुसैन ने निजी चिकित्सक के यहां उपचार कराया। उसकी हालत खतरे से बाहर है।
सूचना मिलने पर बादशाहीबाग वन क्षेत्राधिकारी शरद कुमार गुप्ता मौके पर पहुंचे और घायल वाचर अब्दुल गनी को गंभीर हालत में बेहट सीएचसी लेकर आए। यहां से प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। विस्फोट में नूर मोहम्मद की चार भैंसें और दो बकरी भी घायल हुई हैं। उधर, हादसे की सूचना पर सीओ बेहट शिवराज सिंह और मिर्जापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक महिला के शव का पंचानामा भरा। हालांकि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। इस पर पुलिस ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई नहीं की। सीओ बेहट शिवराज सिंह को कहना है कि फायरिंग अभ्यास स्थल के आसपास जंगल में रहने वाले वन गुर्जरों से बात कर उन्हें विस्थापित किए जाने के लिए राजी किया जाएगा, ताकि फायरिंग अभ्यास के दौरान इस तरह के हादसे की पुनरावृत्ति होने से रोकी जा सकें।
बड़ा हादसा टला
गनीमत रही कि गोला डेरे से थोड़ी दूर गिरा, यदि गोला डेरों के ऊपर गिरता, तो कई जानें जा सकती थीं। विस्फोट के बाद वन गुर्जर नूर अहमद की बेटी नेक बीवी और सुल्तान की बेटी नूरजहां सदमे में है और बेहोशी की हालत में है। विस्फोट के समय वन गुर्जरों के डेरों पर पोलियो ड्राप्स पिला रहे वन रक्षक ब्रजपाल सिंह और वाचर उदय सिंह ने बताया कि एक बारगी तो उन्हें समझ ही नहीं आया, कि हुआ क्या।
15 साल बाद दोबारा हुआ इस तरह का हादसा
आरक्षित वन क्षेत्र में अधिकतर हादसे सेना के फायरिंग अभ्यास के बाद मिस हुए गोलों से धातु निकालने के लालच में हुए हैं। कितने ही लोग जरा से लालच में मौत के मुंह में समा चुके हैं, लेकिन बृहस्पतिवार को हुआ हादसा 15 साल में दूसरी बार हुआ है। सेना की तोप से निकला गोला सीधे वन गुर्जरों के डेरों के बाहर गिरा। चपड़ी खोल में जिस जगह वन गुर्जरों के डेरों के बाहर तोप का गोला गिरा वह जगह फायरिंग स्थल से करीब छह-सात किमी दूर है। 15 साल पहले जब यह घटना हुई थी तब दर्जनों मवेशियों की मौत हो गई थी। इस घटना में घायल वन गुर्जर इमाम हुसैन, नूर मोहम्मद, नूर अहमद, सुल्तान और तालिब ने बताया कि सुबह से तीन चार गोले उनकी खोल में जंगल में गिर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह इस जंगल में पिछले 100 साल से रह रहे हैं। कई बार सेना फायरिंग अभ्यास के दौरान हादसे का खतरा बना रहता है, जिस संबंध में उन्होंने पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र भी दिए है, जिनके माध्यम से वह मांग कर चुके हैं, कि सेना फायरिंग अभ्यास के लिए एक दायरा निश्चित कर दिया जाए, ताकि वह उसकी जद से बाहर अपने ठिकाने बना सकें।
आरक्षित वन क्षेत्र में हुए हादसे
2 जनवरी 2001- थाना मिर्जापुर के गांव नौगांवा में बम फटने से तीन ग्रामीणों के चीथड़े उडे़।
20 फरवरी 2002-जंगल से मिला निष्क्रिय बम फटने से मिर्जापुर में वाजिद, मुख्तियार, नफीस, रेशणान की मौत तथा शफाकत, ईनाम, अंजुम व नफीसा भी चपेट में आकर घायल।
28 फरवरी 2002-मिर्जापुर थाने के ही गांव शेरपुर पेलो में हुए बम धमाके में स्वराज, सोनू, अमर सिंह व विक्की के परखच्चे उडे़।
15 दिसम्बर 2002- शेरपुर पेलो के ही अब्दुल कादिर व उसके बेटे अब्दुलहक की मौत, संजीदा व उसकी पुत्री शायरा घायल।
वर्ष 2004-कोठड़ी बहलोलपुर निवासी प्रमोद की बम फटने से मौत व मिर्जापुर निवासी रियाज, नौशाद व हरध्यान घायल।
19 अक्टूबर 2005-शेरपुर पेलो के ही रणधावा के अलावा तीन लोगों के चीथड़े उड़े।
18 नवंबर 2007-शेरपुर पेलो निवासी गालिब भी बम विस्फोट में मारा गया।
13 मई 2008-शेरपुर पेलो की जानिमा पत्नी ईरशाद व उसके एक वर्षीय बच्चे मुबारिक, 6 वर्षीय दिलरूबा पुत्री इस्लाम की मौत ।
14 मार्च 2010-गांव मिर्जापुर निवासी रियासत पुत्र नूर मोहम्मद, जावेद पुत्र साजिद व सादिक पुत्र इनाम की बम फटने से मौत हो गई थी।
2 मई 2011- गांव चाणचक में सेना का मिस बम फटने से बबलू व रणबीर घायल।
25 दिसंबर 2012 में रजापुर नौगांवा निवासी राशिद की बम फटने मौत।
वर्ष 2013 में शेरपुर पेलो निवासी आतिफ पुत्र मकसूद की बम फटने जंगल में मौत, दिलशाद गंभीर घायल
20 जनवरी 2015 को शाकंभरी रेंज की कोठड़ी तुलसी निवासी सन्नी पुत्र सुल्तान, मन्नी व हरदीप घायल
6 जनवरी 2017 को कोठड़ी खोल में कोठड़ी चेतराम निवासी चमन सिंह के बेटे सोनू व निखिल की बम हादसे में मौत।
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