जान जोखिम में डाल ड्यूटी कर रही महिलाएं, बोलीं- अपराजिता हैं हम, कोरोना को करेंगी पराजित
कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रही महिला पुलिसकर्मी संदेश दे रही हैं कि अपराजिता हैं हम, कोरोना को हर हाल में करेंगी पराजित।
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कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में महिला पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रही हैं। उन्हें खुद से ज्यादा आमजन की चिंता है। दिन हो या रात, बस लोगों को सचेत करने में जुटी हैं। ये महिला पुलिसकर्मी संदेश दे रही हैं कि अपराजिता हैं हम, कोरोना को हर हाल में करेंगी पराजित।
परिवार के साथ ड्यूटी भी जरूरी है : अर्चना सिंह
सीओ नगीना अर्चना सिंह अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात ड्यूटी कर रही है। ड्यूटी को सर्वोपरि मानने की वजह से अपने बच्चों पर भी पूरा ध्यान नहीं दे पा रही हैं। सीओ अर्चना सिंह का कहना है कि पुलिस की नौकरी और कर्तव्य के प्रति उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन वह पत्नी और मां के रूप में भी परिवार को समय देने का पूरा प्रयास करती हैं। मूलरूप से बलिया जिले की रहने वाली अर्चना सिंह का 2010 में चयन हुआ था। उनके पति महेश कुमार भी पीपीएस हैं और सीओ अफजलगढ़ हैं। उनकी पांच साल की बेटी और एक वर्षीय बेटा भी है।
बार- बार हाथ धोएं, मॉस्क लगाकर रखें : सुमन सिंह
कोतवाली धामपुर में तैनात कांस्टेबल सुमन सिंह का कहना है कि कोरोना वायरस के खिलाफ समाज में जागरूकता लाने का प्रयास करती हैं। जहां भी ड्यूटी लगती है, वहां आसपास के लोगों को घर में रहने और सैनिटाइजेशन करने के अलावा मास्क का प्रयोग करने की सलाह देती हैं।
एक होकर करें महामारी से मुकाबला: अनु सैनी
कांस्टेबल अनु सैनी का कहना है कि महिलाएं ही घर के लोगों को प्रेरित कर बाहर जाने से रोक सकती हैं। सभी को एकजुट होकर कोरोना वायरस को हराना है, हम भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
बगैर काम के घर से बाहर नहीं निकलें : प्रियंका चौधरी
कांस्टेबल प्रियंका चौधरी का कहना है कि महिलाओं को इस महामारी पर रोक लगाने के लिए अपने घरों में सुरक्षित रहना चाहिए। बच्चों व अन्य लोगों को भी घरों में रखें। बगैर मतलब के घरों से न निकलने दें। ऐसा करने से इस महामारी से निपटा जा सकता है।
न स्वयं निकलें, न दूसरों को निकलने दें: कृष्णा दाहिमा
उपनिरीक्षक कृष्णा दाहिमा का कहना है कि हम सब महिला पुलिसकर्मी इस महामारी से महिलाओं को जागरूक करने के लिए कार्य कर रही हैं। जिससे महिलाएं बगैर मतलब के न तो स्वयं निकलें और ना दूसरों को निकलने दें। इस महामारी से निपटने का सर्वोत्तम तरीका घरों में रहना ही है।
पहली बार लॉकडाउन में लगी ड्यूटी: शालिनी
लॉकडाउन के दौरान दस से 12 घंटे तक ड्यूटी कर रही महिला कांस्टेबल शालिनी अपनी सेवाकाल का पहला कर्फ्यू देख रही हैं। शालिनी ने बताया कि नई कॉलोनी में मुख्य चौराहे पर सुबह छह से रात नौ बजे तक ड्यूटी कर रही हैं। नागरिकों को घरों से बाहर आने को मना किया गया है, फिर भी लोग बाहर आ जाते हैं। उन्हें समझाया जा रहा है।
समाज हित में हैं सजग : बबीता
मीरापुर संपर्क मार्ग पर सीमा सील कर लगाए गए बैरियर प्वाइंट पर तैनात कांस्टेबल बबीता ने बताया कि बैरियर आबादी से काफी दूरी पर है। यहां से लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। सुबह से रात नौ बजे तक तैनाती है। समाज हित में हम सजग हैं, लेकिन आमजन की भी गंभीर रहने की जिम्मेदारी है।
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