गृहणियां केवल रसोई में खाना पका सकती हैं, बच्चों का पालन-पोषण कर हैं। यह बात अब मिथ साबित हो चुकी है। घरेलू महिलाएं सिर्फ होममेकर न रहकर अच्छी बिजनेस वुमन बनकर उभर रही हैं। वो परिवार संभालती हैं, बिजनेस में पति का साथ देती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति गड़बड़ हो तो अपना काम शुरू करके आर्थिक मदद भी करती हैं।
अपराजिता: हुनर को बनाया उद्यमिता का जरिया, परिवार को दिया आर्थिक सहारा
मूर्तियां बनाकर बनी परिवार का सहारा
टीपी नगर निवासी सोनाली बत्रा विवाह से पहले जेट एयरवेज में एयरहोस्टेस थीं। पानीपत हरियाणा की रहने वाली सोनाली शादी होकर मेरठ आईं। विवाह टीपी नगर निवासी देवेंद्र बत्रा से हुआ। सोनाली कहती हैं जॉब ऐसी थी कि लंबे समय तक उसे चालू नहीं रख सकती थी। शादी के बाद परिवार की देखभाल ही जिम्मेदारी बन गई। कुछ अपना काम करने के लिए मैंने हैंडवर्क , क्ले आर्ट सीखा। इसके बाद घर से ही पॉलीरेजर (एक प्रकार का मूर्तियां बनाने का मटीरियल) की मूर्तियां बनाने का काम शुरू किया।
पहले खुद मूर्तियां बनाईं और कुछ लोगों को दीं। धीरे-धीरे लोगों को मूर्तियां पसंद आने लगी। हमारे पास ऑर्डर आने लगे कारीगर लगा लिए। मुख्य रूप से भगवान की मूर्तियां बनाते हैं। इसके अलावा शोपीस और डेकोर भी बनाकर सप्लाई करते हैं। अब मेरठ ही नहीं पूरे देश में हमारा माल जाता है। पति भी काम में सहयोग करते हैं। परिवार के साथ बिजनेस भी संभालती हूं।
क्लास से लेकर यूट्यूब तक कुकिंग के चर्चे
जागृति विहार निवासी ज्योति शर्मा कुकिंग एक्सपर्ट हैं। वह 20 सालों से कुकिंग की शिक्षा दे रही हैं। घर, परिवार से लेकर देशभर में इनकी कुकिंग रेसिपीज के चर्चे हैं। परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों के बीच जब ज्योति के हाथों से बने मलाई कोफ्ते, कबाब और केक का स्वाद पहुंचा तो उन्होंने अपनी बेटियों को इनके पास क्लास लेने भेज दिया। धीरे-धीरे दूसरी महिलाएं व लड़कियां भी कुकिंग सीखने आने लगीं। धीरे-धीरे ज्योति के खाने की तारीफ हर किसी से आने लगी। ज्योति ने अपनी कुकिंग क्लासेस शुरू कर दी। इसके बाद ज्योति कॉलेजों में भी कुकिंग की शिक्षा देने लगीं। फिर बच्चों की मदद से ज्योति ने अपना यूट्यूब चैनल बना लिया। यूट्यूब चैनल पर ज्योति कई सारे कुकिंग वीडियो डाल चुकी हैं।
कांच के मोतियों में पिरोई सफलता
कैंट निवासी गीता अरोड़ा ज्वैलरी डिजायनिंग का काम करती हैं। गीता कहती हैं कि हर कोई सोने, चांदी या हीरे के गहने पहन पाने में सक्षम नहीं होता। लेकिन आर्थिक संपन्नता कभी महिलाओं के साज सिंगार में आड़े न आए इसलिए मैंने आर्टिफिशियल ज्वैलरी बनाने की सोची। इस काम को करके मैं समाज में कई महिलाओं को गहने पहनने का सुख दे पाऊंगी। अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकूंगी। घर बैठे-बिठाए एक साफ सुथरा काम है। इसमें मेरी क्रिएटिविटी भी काम आएगी। कुंदन, स्टोन, मोती की मदद से आर्टिफिशियल गहने बनाती हूं। धागे, पेपर, सुतली व कपड़े से भी फंकी ज्वैलरी बनाती हूं। बॉलीवुड हीरोइनों जैसी ज्वैलरी पहनने का भी चलन महिलाओं में तेजी से बढ़ा है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/