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प्रदेश में पहली बार हुई टेली एग्रीकल्चर की शुरुआत, इन समस्याओं का हो रहा समाधान, पढ़िए खास रिपोर्ट

Sat, 12 Sep 2020 06:09 PM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 12 Sep 2020 06:09 PM IST
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Amar Ujala Special Report: Tele agriculture has started for the first time in Uttar Pradesh
टेली एग्रीकल्चर के माध्यम से जानकारी लेते किसान और साइड में डॉ. आर एस सेंगर, कोआर्डिनेटर टेली एग्रीकल्चर एवं प्रोफेसर जैव प्रौद्योगिकी - फोटो : अमर उजाला

कोरोना महामारी के चलते किसानों के सामने तकनीकी प्रसार की समस्या को दूर करने और तकनीकी ज्ञान के प्रसार को बढ़ाने के लिए प्रदेश में पहली बार टेली एग्रीकल्चर की शुरुआत सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में की गई है। इसमें अभी तक करीब छह हजार किसान जोड़े जा चुके हैं। किसानों की समस्या के निदान के लिए टेली एग्रीकल्चर में 16 वैज्ञानिक कृषि विश्वविद्यालय के और 34 वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्रों के शामिल किए गए हैं। 

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कृषि विवि के कार्य क्षेत्र में आने वाले विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रत्येक जिले के गांव से एक-एक व्यक्ति को जोड़ा गया है, ताकि वह अपने गांव के लोगों को तकनीकी ज्ञान देकर उनको भी खेती में सहयोग कर उनकी उत्पादकता को बढ़ा सके।
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किसान की फसल में जब कीटों का प्रकोप बढ़ता था, तो उनकों अपने सैंपल लेकर विश्वविद्यालय या संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र पर जाना पड़ता था। वैज्ञानिक सैंपल के लक्षणों को देखकर उसकी दवाई या उसके निवारण के बारे में जानकारी देते थे। इस बार कोरोना के चलते ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था। इसके मद्देनजर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और प्रत्येक केवीके के वैज्ञानिकों को टेली एग्रीकल्चर के व्हाट्सएप ग्रुप पर जोड़ा गया है। ग्रुप पर आने वाली किसानों की समस्या का वैज्ञानिकों द्वारा निदान किया जाता है।  
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इन समस्याओं का हो रहा समाधान
कोरोना काल में किसानों के लिए शुरू की गई टेली एग्रीकल्चर वरदान साबित हो रही है। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े किसान फसलों में आ रहे रोग की फोटो भेजकर समस्या का समाधान पूछ रहे हैं। बीज, पौध, कृषि यंत्रों के साथ कई किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती की भी जानकारी ले रहे हैं। 

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ये हैं 15 जिले 
मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, शामली, सहारनपुर, हापुड, बागपत, गाजियाबाद, गौतबुद्वनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं। 

उत्साहजनक हैं परिणाम
कोरोना महामारी के दौरान किसानों के आवागमन में हो रही परेशानी के बावजूद कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि ज्ञान को उनके द्वार पर पहुंचाने के लिए टेली एग्रीकल्चर के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं। - डॉ. आरके मित्तल, कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय 

आगे बढ़ाया जा रहा
टेली एग्रीकल्चर में अभी तक लगभग छह हजार किसान शामिल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा 256 किसान मेरठ के हैं। इसे और आगे बढ़ाया जा रहा है। किसानों के मोबाइल नंबर विज्ञान केंद्रों के माध्यम से लिए गए है। - डॉ. आर एस सेंगर, कोआर्डिनेटर टेली एग्रीकल्चर एवं प्रोफेसर जैव प्रौद्योगिकी

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