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खास रिपोर्ट: अब बिना चिमनी लगाए नहीं चला पाएंगे कोल्हू, ये हैं नई गाइडलाइन
Sat, 05 Sep 2020 06:13 PM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Sat, 05 Sep 2020 06:13 PM IST
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चिमनी
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नए मानक तय किए हैं। इसके अनुसार अब कोल्हू संचालकों को चिमनी लगानी होगी। साथ ही आबादी से 500 मीटर दूर कोल्हू लगाना होगा। कोल्हू में प्रतिबंधित ईंधन नहीं जलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्ययोजना भी तैयार कर ली है।
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प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही कोल्हू और क्रेशर का संचालन शुरू हो जाता है। ज्यादातर कोल्हू पर ईंधन के रूप में प्लास्टिक और रबड़ का प्रयोग किया जाता है। इससे बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए सीपीसीबी ने नई गाइडलाइन जारी की हैं। शुक्रवार को पर्यावरण प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण प्राधिकरण के अध्यक्ष भूरेलाल ने इस संबंध में जानकारी ली। कहा, इस माह के अंत तक कोल्हू शुरू हो जाएंगे।
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पॉलिथीन से सर्वाधिक प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार, कोल्हू संचालन के दौरान सबसे ज्यादा प्रदूषण पॉलिथीन जलाने से होता है। यह आसानी से और सस्ते में मिल जाती है। इसके अलावा प्लास्टिक और रबड़ जलाना भी बड़ा कारण है। हर साल कोल्हू की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इस साल मेरठ और बागपत में सभी कोल्हू की सूची तैयार की जा रही है।
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ये हैं नई गाइडलाइन
- दस मीटर ऊंचाई पर लगानी होगी चिमनी
- आबादी से कम से कम 500 मीटर की दूरी होगी
- भठ्ठियों से वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए समुचित व्यवस्था करनी होगी
- कोल्हू संचालन में प्रतिबंधित ईधन का प्रयोग नहीं होगा
- पॉलिथीन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी
- मानकों के उल्लंघन पर बंदी और पर्यावरण क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाएगी
कोल्हू संचालकों को नई गाइडलाइन के अनुसार संचालन करना होगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेनी होगी। नियमों की अनदेखी करने पर बंदी और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. योगेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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