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Special Report: कॉलेज की राजनीति से संसद तक का सफर, सियासत में परचम लहरा रहे हैं वेस्ट यूपी के ये दिग्गज नेता

Wed, 10 Apr 2024 06:01 PM IST
कपिल kapil जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मेरठ
जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 10 Apr 2024 06:01 PM IST
सार

Special Report : वेस्ट यूपी के कई दिग्गज नेता कॉलेज की राजनीति से संसद तक पहुंचे हैं। ये सभी नेता सियासत में परचम लहरा रहे हैं। अमर उजाला की खास रिपोर्ट पढ़िए।

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Amar Ujala Special Report: Many leaders of West UP have reached Parliament from college politics
संजीव बालिया, सोमेंद्र तोमर और योगेश धामा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छात्र संगठनों और छात्र संघ की राजनीति को संसदीय राजनीति की नर्सरी कहा जाता है। छात्र राजनीति के दौरान शिक्षा व्यवस्था को समझने के साथ उसके लिए संघर्ष की क्षमता जिन नेताओं में विकसित हो जाती है, उनमें से कई भविष्य में देश-प्रदेश के कर्णधार बनते हैं। अब छात्रसंघ के चुनाव भले ही नहीं हो रहे हैं। कई पुराने छात्र नेता मुख्यधारा की सियासत में अपना वजूद बनाए हुए हैं। इस बारे में अतीत से रूबरू करा रही है जगेंद्र उज्जवल की रिपोर्ट...

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जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है। सच कहना अगर बगावत है, तो समझो हम भी बागी हैं। पढ़ने के लिए लड़ो और बदलाव के लिए पढ़ो... 70 के दशक में छात्र राजनीति की कोख से निकले ये नारे आज भी कुछ लोगों के दिलो दिमाग में हैं। ऐसे वक्त में जब देश में युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है, पश्चिमी यूपी में छात्र राजनीति से निकले चेहरे विधानसभा और संसद तक मुख्यधारा की सियासत में परचम लहरा रहे हैं। 

छात्र नेता रहे डॉ. राजकुमार सांगवान बागपत से, हरेंद्र मलिक और डॉ. संजीव बालियान मुजफ्फरनगर सीट से इस बार चुनाव के मैदान में हैं।

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेजों में 2017 के बाद छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। पूर्व में यहां से निकले छात्र नेता पूर्व में भी विधानसभा और संसद तक पहुंचे हैं। चौधरी चरण सिंह भी छात्र राजनीति से ही प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बने। मेरठ कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष रहे पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और दो बार एमएलसी रहे चौधरी जगत सिंह को घर से बुलाकर चौधरी चरण सिंह ने भारतीय क्रांति दल में शामिल किया था। 

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मुजफ्फरनगर: डॉ. बालियान और मलिक बड़े खिलाड़ी
मुजफ्फरनगर में आमने-सामने चुनाव लड़ रहे भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान और सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी हरेंद्र मलिक छात्र राजनीति से ही निकले हैं। हरेंद्र मलिक ने डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ का चुनाव लड़ा और छात्र राजनीति की। 2014 और 2019 में जीते केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. बालियान ने हरियाणा में पढ़ाई के दौरान हिसार यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति की।

सहारनपुर: कई ने पाया विधानसभा और संसद में मुकाम
जैन डिग्री कॉलेज छात्र संघ अध्यक्ष रहे वीरेंद्र ठाकुर दो बार विधायक बने। स्वर्गीय जगपाल सिंह हरिद्वार लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे। प्रदेश की सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री और बसपा से सांसद रहे स्वर्गीय जगदीश राणा भी छात्र राजनीति से ही सियासत की मुख्यधारा में आए थे। दो बार विधायक रहे सुरेंद्र कपिल महाराज सिंह कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। दो बार विधायक रहे स्वर्गीय महावीर सिंह राणा ने भी राजनीति का ककहरा छात्र राजनीति से ही सीखा था। ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन में सक्रिय रहे संजय गर्ग भी प्रदेश सरकार में दो बार राज्यमंत्री रहे। देवबंद विधानसभा से पूर्व विधायक रहे सुखवीर सिंह पुंडीर भी छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे थे।

मेरठ दक्षिण से दो बार विधायक और ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर सीसीएसयू छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। अतुल प्रधान भी छात्र राजनीति की सीढ़ी से ही विधानसभा में पहुंचे है। कुलदीप उज्ज्वल मेरठ कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। चरथावल विधायक पंकज मलिक ने छात्र राजनीति के बाद ही दो बार विधानसभा में दस्तक दी है।

कैराना: वीरेंद्र वर्मा भी संसद तक पहुंचे
1998 में कैराना से सांसद रहे वीरेंद्र वर्मा छात्र राजनीति के रास्ते ही संसद पहुंचे थे। वीरेंद्र वर्मा ने मेरठ कॉलेज से बीए और एलएलबी की पढ़ाई के साथ-साथ छात्र राजनीति भी की थी। वह पंजाब और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। 

बागपत: आचार्य दीपांकर और योगेश धामा भी रहे छात्र नेता
1980 में बौढ़ा गांव निवासी आचार्य दीपांकर छात्र राजनीति के माध्यम से ही विधायक बने थे। बागपत विधायक योगेश धामा भी छात्र राजनीति करने के बाद विधायक बने। पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक अलीगढ़ से 1989 से 1991 तक जनता दल के सांसद रहे। सत्यपाल मलिक भी मेरठ के कॉलेज में पढ़ाई करते थे और छात्र राजनीति करने के बाद ही यहां तक पहुंचे।

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बिजनौर: भारतेंद्र सिंह एमएलए व एमपी बने
छात्र नेता रहे एमएलसी अशोक कटारिया प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री रहे चुके हैं। पूर्व विधायक सुखवीर सिंह, स्वर्गीय नसीब पठान, स्वर्गीय लोकेंद्र चौहान भी छात्र नेता थे। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह दिल्ली की छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। बाद में बिजनौर विधानसभा से विधायक व बिजनौर लोकसभा से सांसद चुने गए।

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