कोरोना की तीसरी लहर का खौफ: कुपोषित बच्चों पर ढहा सकती है कहर, जरूर बरतें ये सावधानी
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को ज्यादा खतरा है।
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कोरोना की दूसरी लहर तबाही मचा चुकी है और वैज्ञानिक अभी तीसरी लहर की बात कर रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना के निशाने पर पहली लहर में बुजुर्ग, दूसरी में युवा तो तीसरी लहर में बच्चे रहेंगे। अगर तीसरी लहर आई तो बचपन को बचाना बड़ी चुनौती होगा। खासकर कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को। दरअसल, इनकी रोग प्रतिरोधक बहुत क्षमता कम होती है, जिस कारण इनके चपेट में आने की आशंका ज्यादा है। मेरठ जिले में शून्य से पांच साल तक के 5239 कुपोषित और 1169 अतिकुपोषित बच्चे हैं।
सबसे ज्यादा खतरा इन्हें ही है। ये निमोनिया की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। इसके साथ ही इन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। यह आयु वर्ग अधिक संवेदनशील होता है। ये बच्चे कोरोना का सॉफ्ट टारगेट हो सकते हैं। इसलिए अलर्ट रहने की जरूरत है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के मां-बाप खासतौर पर सतर्क रहें। जिले में बच्चों के चिकित्सा के हिसाब से अभी इंतजाम नाकाफी हैं। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो हालात ज्यादा विकट हो सकते हैं।
बीमारी जल्दी चपेट में लेती है
बच्चों में कुपोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। इससे अन्य बीमारी भी ऐसे बच्चों को जल्द जकड़ लेती है। बच्चों के बीमार होने पर सोशल डिस्टेंस भी संभव नहीं है। बच्चे अपनी देखभाल खुद नहीं कर सकते है, इसलिए बच्चों के संपर्क में दूसरे भी आते हैं। मास्क, सोशल व सैनिटाइजेशन पर फोकस करें। - डॉ. विजय जायसवाल, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज
बच्चों के खानपान पर ध्यान दें
कुपोषित बच्चों के खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चों को अंकुरित चने, दूध, दही, रोटी, फल उसकी आयु वर्ग की कैलोरी के हिसाब से देने होंगे। यदि बच्चों के अधिक समय तक तेज बुखार, आंख लाल होना, हाथ-पैरों में सूजन, पेट संबंधी समस्या, शरीर पर चकते या लाल दाने होना आदि लक्षण मिलते हैं तो तत्काल चिकित्सकों की सलाह लेनी चाहिए। - डॉ. नवरतन, नोडल अधिकारी, पीआईसीयू, मेडिकल कॉलेज
यह है मेरठ की स्थिति
जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत सिंह ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने 1,84,437 बच्चों का वजन लिया। इसमें 5239 कुपोषित, 1169 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए हैं। अगर बच्चे की स्थिति ज्यादा खराब हो तो जिला मुख्यालय पर बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। यहां बच्चे के पोषाहार के साथ तीमारदार के भोजन की भी व्यवस्था होती है। साथ ही 50 रुपये प्रतिदिन भत्ता भी दिया जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए
सामान्य वजन वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा कम है। अगर वह संक्रमित होते भी है तो जल्द ही रिकवर हो जाएंगे, लेकिन मध्यम कम वजन वाले और अति कम वजन के बच्चों में संक्रमण का ज्यादा खतरा होता है। इनमें से अति कम वजन वाले बच्चों को ज्यादा रिस्क माना जा रहा है। इनका ख्याल रखा जाए और इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। - डॉ. मोहम्मद अंजुम, बाल रोग विशेषज्ञ