अमर उजाला की खास रिपोर्ट: जेल में सजा काट रहे बंदी कर रहे जड़ी-बूटी तैयार, आप भी ऐसे करें बीमारियों को दूर
अमर उजाला की खास रिपोर्ट : जेल में सजा काट रहे बंदी जड़ी-बूटियां तैयार कर रहे हैं। आप भी इन जड़ी-बूटियों से अपनी बीमारियों को दूर कर सकते हैं।
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मेरठ में चौधरी चरण सिंह कारागार में सजा काट रहे बंदियों को उच्च स्वास्थ्य और प्रकृति से जोड़ने के लिए हर्बल पार्क विकसित किया गया है, जिसमें 30 प्रकार की जड़ी बूटियों के पौधे लगाए गए हैं। जेल में निरुद्ध 17 बंदी ही इस वाटिका की देखभाल करते हैं। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बंदियों को शांति व आयुर्वेद से जोड़ना है।
डिप्टी जेलर राकेश वर्मा ने बताया कि जेल में आयुर्वेदाचार्य को बुलाकर बंदियों को आयुर्वेद के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि कैदी आयुर्वेद के जरिए कैसे स्वस्थ रहें, यह जान सकें। कौन सी बूटी या पौधा कौन सी बीमारी को दूर करता है, इस बारे में आयुर्वेदाचार्य बंदियों को बताते हैं और जड़ी-बूटियों का प्रयोग भी सिखाते हैं।
इन जड़ी बूटियों के लगे पौधे
तुलसी, सतावर, अजवाइन, करौंदा, हल्दी, दालचीनी, इलायची, करी पत्ता, एलोवेरा, आंवला, पुदीना, लेमन ग्रास, बहेड़ा, अपराजिता, बेल, तेजपत्ता, गिलोय, सेब, सहजन, खिरनी, कालमेघ, चित्रक, स्टीविया मीठी तुलसी, सिंदूरी, सर्पगंधा, भृंगराज, मंडूकपर्णी, पथरचटा, अश्वगंधा के पौधे लगाए गए हैं।
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तनाव दूर करती है तुलसी, गिलोय से नियंत्रित होता है मधुमेह
गिलोय मधुमेह को नियंत्रित करने, बुखार से राहत, पाचन में सुधार और अस्थमा में लाभकारी है। तुलसी शरीर को ठंडक पहुंचाने, तनाव कम करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद है। वहीं अपराजिता दांत दर्द में कारगर है। बहेड़ा कब्ज, खांसी, गले में खराश, चर्म रोग, सर्दी-जुकाम और हाथ-पैर की जलन में असरकारक है।
इससे पहले बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं में हुई थी शुरुआत
इससे पहले बरेली, शाहजहांपुर और बदायूं में हर्बल पार्क की शुरुआत की गई थी। डेढ़ वर्ष पहले मेरठ कारागार में हर्बल पार्क की शुरुआत की गई है, जिसमें 30 जड़ी बूटी के पौधे लगाए गए है।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि बंदियों को सकारात्मक माहौल और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह प्रयास किया है।