खास रिपोर्ट: तकनीकी क्षेत्र में आज भी बेटियों की भागीदारी कम, ये रही बड़ी वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञान में आज भी बेटियों की भागीदारी कम है। इसके कारण कई हैं। एक तो लड़कियां कला वर्ग को अधिक पढ़ना पसंद करती हैं, दूसरा कुछ माता-पिता ही बेटियों को विज्ञान वर्ग से पढ़ाई नहीं कराते हैं। 12वीं कक्षा के बाद तकनीकी पढ़ाई महंगी है। हर माता-पिता इसका खर्च नहीं उठा सकता।
तकनीकी शिक्षा में लड़कियों की कम संख्या माता-पिता की सोच का प्रमाण है। शहर के सरकारी ही नहीं, पब्लिक स्कूलों में तकनीकी विषयों में लड़कियों की संख्या लड़कों से काफी कम है। गणित, विज्ञान में लड़कियों की कम संख्या सिर्फ कोएड स्कूलों में ही नहीं, बल्कि गर्ल्स स्कूलों में भी साफ दिखती है। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
स्कूल से कॉलेज स्तर पर हालात खराब
सीबीएसई, आईसीएसई व सरकारी गर्ल्स स्कूल एवं महिला पीजी कॉलेजों में यूजी, पीजी दोनों ही स्तरों पर आर्ट्स के विषयों में सबसे ज्यादा प्रवेश होते हैं। दूसरे नंबर पर कॉमर्स है। साइंस, मैथ्स में प्रवेश कम रहते हैं।
कला वर्ग में अधिक संख्या
नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है 2015-16 में ग्रेजुएट कोर्स में 9.3 प्रतिशत छात्राओं ने इंजीनियरिंग, 4.3 फीसदी ने चिकित्सा विज्ञान में दाखिला लिया। मास्टर, डॉक्टरेट व चिकित्सा विज्ञान डॉक्टरेट में महिलाएं कम थी, जबकि कला विषयों में संख्या ज्यादा थी। - डॉ. दीपशिखा शर्मा, प्रिंसिपल, आरजी पीजी कॉलेज
कला में मानते हैं सुरक्षित कॅरियर
अब भी अभिभावक लड़कियों के लिए कला को सुरक्षित कॅरियर मानते हैं। विश्व में वैज्ञानिक शोधकर्ताओं की कुल संख्या में महिलाओं की 30 फीसद से कम है। विज्ञान-गणित में लड़कियां लड़कों से अच्छा प्रदर्शन करती हैं। -डॉ. प्रो. दिनेश चंद, प्रिंसिपल, शहीद मंगल पांडे महिला पीजी कॉलेज
यह भी पढ़ें: अमर उजाला की स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए प्रियंका गांधी की किसान महापंचायत के मायने
काउंसिलिंग के बाद भी संख्या कम
गार्गी गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल अनुपमा सक्सेना बताती हैं कि कला विषय में जल्दी सीटें भरती हैं, जबकि विज्ञान, गणित में प्रवेश कम होते हैं। कई बार जो लड़कियां दसवीं तक इन विषयों में अच्छे अंक लाती हैं उनके मम्मी-पापा को समझाते हैं कि बच्ची को साइंस दिलाएं, लेकिन वे नहीं समझते।
स्कूल में मेरे साथ की कई लड़कियां साइंस पढ़ना चाहती थीं, लेकिन उनके मम्मी-पापा विज्ञान पढ़ने से रोकते थे। उनका मानना था कि विज्ञान पढ़ना लड़कियों के लिए अच्छा नहीं है। - खिरद जेहरा जैदी, छात्रा
साइंस में लड़कियां कम आती हैं। अब भी मेरे कॉलेज में साइंस से ज्यादा छात्राएं आर्ट्स में हैं। कई बार मैडम लड़कियों के मम्मी-पापा को समझाती हैं कि विज्ञान पढ़ाएं, लेकिन वो कहते हैं इसे पढ़कर नौकरी नहीं मिलेगी। - सिमरन कर्दम, छात्रा
बढ़ाने होंगे महिला रोजगार के अवसर
यूनेस्को के 2014 से 2016 के आंकड़ों के अनुसार 30 प्रतिशत छात्राएं उच्च शिक्षा एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में आती हैं। सूचना प्रौद्योगिकी में महिलाओं का प्रवेश तीन फीसदी है। प्राकृतिक विज्ञान, गणित और सांख्यिकी में पांच फीसदी और इंजीनियरिंग और अप्लाइड साइंस में सिर्फ आठ प्रतिशत है। सरकार को महिला रोजगार की ओर ध्यान देना होगा। - दीपक शर्मा, निदेशक, जिला विज्ञान क्लब
यह है इतिहास
इंटरनेशनल डे ऑफ वुमन एंड गर्ल इन साइंस 11 फरवरी को मनाते हैं। 22 दिसंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हर साल इस दिन को मनाना यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र महिला ने तय किया। ध्येय गणित व विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों को बढ़ावा देना है।
स्कूलों में साइंस की स्थिति
स्कूल छात्र छात्राएं
केएल स्कूल 282 134
ऑल सेंट्स स्कूल 30 20
सेंट जेवियर्स 17 9
आईआईएमटी एकेडमी 92 43
सेंट थॉमस इंग्लिश मीडियम 56 28
एमपीएस मेन विंग 233 20
बीडीएस इंटरनेशनल 143 68
सीजेडीएवी स्कूल 184 62
एमआईईटी 64 24
बालेराम ब्रजभूषण सरस्वती 260 88
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/