रैपिड रेल: इन नौ स्टेशनों को डिजाइन करेगी तमिलनाडु की कंपनी, गुजरात में शुरू हुआ अत्याधुनिक डिब्बों का निर्माण
तमिलनाडु की कंपनी रैपिड रेल के नौ स्टेशनों को डिजाइन करेगी। वहीं रैपिड रेल के अत्याधुनिक डिब्बों के निर्माण का कार्य गुजरात में शुरू हो गया है।
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मेरठ से दिल्ली के 82 किलोमीटर के रैपिड रेल कॉरिडोर का ढांचा तेजी से तैयार किया जा रहा है। स्टेशनों के डिजाइन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए नौ एलिवेटेड स्टेशनों का जिम्मा तमिलनाडु की यूआरसी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। इन स्टेशनों की आर्किटेक्ट डिजाइन के साथ अन्य सभी फिनिशिंग के कार्य भी कंपनी को करने होंगे। कंपनी को टेंडर अवार्ड कर दिया गया। स्टेशनों का ढांचा तैयार होने के बाद स्टेशन डिजाइन कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसमें मुरादनगर से लेकर मोदीपुरम तक के एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं।
रैपिड रेल के मेरठ हिस्से में तेजी से निर्माण कार्य किया जा रहा है। मेरठ में मेट्रो के लिए परतापुर, मेरठ साउथ स्टेशन का कार्य तेज गति से चल रहा है। परतापुर स्टेशन पर एक तरफ स्टेशन के लिए पिलर कार्य पूरा कर लिया गया है। दूसरी तरफ पिलर कार्य चल रहा है। इस कार्य के खत्म करने के बाद डिजाइनिंग का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, रैपिड रेल के स्टेशन कई खास तकनीक से सुसज्जित किए जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए इनका डिजाइन भी किया जाना है।
ये हैं स्टेशन
मुरादनगर, मोदीनगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मेरठ साउथ, ब्रह्मपुरी, एमईएस कॉलोनी, डौरली, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम
कुल राशि - 150 करोड़ 44 लाख, 92 हजार 196 रुपये
कंपनी - यूआरसी कंसट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, तमिलनाडु
रैपिड रेल के अत्याधुनिक डिब्बों का निर्माण गुजरात में शुरू
दिल्ली से गाजियाबाद होते हुए मेरठ तक चलने वाली रैपिड रेल के अत्याधुनिक डिब्बे पूरी तरह स्वदेशी होंगे, जिनका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत फ्रांस की कंपनी एलस्टोम ने गुजरात के सावली में शुरू कर दिया है। क्षेत्रीय त्वरित परिवहन प्रणाली (आरआरटीएस) के तहत 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ सेमी हाई स्पीड गलियारे पर काम तेजी से चल रहा है।
अब तक 800 खंभों के निर्माण का काम संपन्न हो गया है। इस बीच, कंपनी ने अत्याधुनिक कोच तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। कंपनी को इसका ठेका मई 2020 में दिया गया था। कंपनी को 210 कोच तैयार करने हैं और इसके साथ ही 15 साल तक उसकी देखभाल भी करनी है। इसके तहत 30 ट्रेन छह कोच वाली होगी और 10 ट्रेनों में तीन कोच होंगे। यह जानकारी कंपनी की ओर से जारी एक बयान में दी गई। एलस्टोम के प्रबंध निदेशक ए स्पोहर ने कहा कि यह ट्रेन क्षेत्रीय परिवहन में बड़ा बदलाव लेकर आएगा और इससे लाखों लोगों को लाभ मिलेगा।
एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय कुमार सिंह ने कहा कि आरआरटीएस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में खतरनाक वायु प्रदूषण, गंभीर भीड़भाड़ और असहनीय शहरी फैलाव को स्थायी रूप से कम करेगा। इस विश्व स्तरीय ट्रेनों के उत्पादन की शुरुआत से हमें एनसीआर के लोगों को तेज, विश्वसनीय, सुरक्षित और आरामदायक परिवहन सेवा प्रदान करने के अपने वादे को प्राप्त करने के करीब ला रही है।
ये हैं विशेषताएं
1. इन हाई-स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेनों को 180 किमी प्रति घंटे की गति के लिए डिजाइन किया है
2. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आरआरटीएस ट्रेनों में शताब्दी एक्सप्रेस की तरह सीटिंग व्यवस्था दी गई है
3. सामान रखने के लिए ओवरहेड लगेज रैक उपलब्ध होंगे
4 . प्रति ट्रेन एक कोच बिजनेस क्लास होगी। इसमें आरामदायक सीटें होंगी