खतरे में मासूम बच्चों की जिंदगी: सड़क पर उतरे अफसर तो मिली बड़ी लापरवाही, 20 बसों का चालान, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
स्कूल बसों में मासूम बच्चों की जिंदगी से खूब खिलवाड़ हो रहा है। मेरठ में अधिकारी सड़कों पर उतरे तो बड़ी लापरवाही सामने आई गई। अधिकारियों ने 20 बसों को चालान किया है।
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स्कूली बसों में जाने वाले नौनिहाल खतरे में हैं। परिवहन अधिकारियों की जांच में शहर के निजी स्कूलों की कुछ बसें जहां बिना परमिट और फिटनेस के दौड़ती मिलीं, तो वहीं ऐसी भी बस मिली जो बरात ढो रही थीं। कई बसों में सुरक्षा के जरूरी मानकों का भी उल्लंघन हो रहा था। प्रवर्तन विभाग ने ऐसी 20 बसों का चालान कर दिया है। यह हालात तब हैं, जबकि शुक्रवार को ही पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर में दो स्कूल बसों की भिड़ंत में स्कूल जा रहे दो बच्चों की मौत हो गई थी। फिर भी स्कूल संचालक जागने को तैयार नहीं हैं।
आरटीओ की प्रवर्तन टीम की चेकिंग में परतापुर स्थित एसआरएस ग्लोबल स्कूल की बस बरातियों को ले जाती मिली। पूछताछ में बस चालक ने बताया कि यह उनके गांव की बरात है। अधिकारियों ने बस का चालान कर दिया। इसके अलावा सीडीआरएस पब्लिक स्कूल खरखौदा की बस 10 साल से ज्यादा पुरानी होने के बावजूद फर्राटा भर रही थी, जबकि इसका संचालन प्रतिबंधित है। इसका भी चालान कर दिया गया। पीटीओ सुधीर सिंह ने बताया कि दस से ज्यादा बस ऐसी मिलीं जिनकी फिटनेस और परमिट खत्म हो चुका है। कई बसों में सुरक्षा मानक भी अधूरे थे।
स्कूल बसों में इन नियमों का पालन जरूरी
- सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
- बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
- अग्निशमन यंत्र लगा हो।
- स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
- दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
- चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो।
- ट्रांसपोर्ट परिमट होना चाहिए।
अभिभावक यह रखें सावधानी
- बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं।
- चालक की हरकतों पर नजर रखें।
- ध्यान रखें कि कहीं चालक नशे में तो नहीं है।
- बस में हेल्पर के साथ स्कूल के जिम्मेदार शिक्षक हैं या नहीं।
- बच्चों के आने और जाने के समय पर ध्यान रखें।
- बस के अंदर बच्चों को बैठने को जगह मिलती हैं या नहीं।
- बस में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
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शहर में स्कूल बसें
40 हजार बच्चे रोजाना बसों में जाते हैं स्कूल।
1000 से ज्यादा स्कूल बसें हैं मेरठ में।
30 स्कूलों की बसें हैं पंजीकृत।
स्कूलों को जारी की गई एडवाइजरी
छात्रों के अभिभावकों की चिंता और शिकायत के बाद स्कूलों के संगठन मेरठ सहोदय सचिव गोपाल दीक्षित ने बताया कि इस संबंध में सभी स्कूलों को एडवाइजरी जारी कर दी है। सोमवार को स्कूल प्रधानाचार्यों के साथ एक संक्षिप्त बैठक भी होगी।
बोले अभिभावक...
डर लगता है
मुजफ्फरनगर की घटना के बाद डर लगने लगा है। स्कूल संचालकों और आरटीओ को मानकों का पालन करने वाली बसों का ही संचालन कराना चाहिए। - अमित पंवार, गंगानगर
मासूमों से खिलवाड़
स्कूल संचालक पैसा बचाने के लिए मानकों का पालन नहीं करते हैं। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। अभियान चलाकर बसों की चेकिंग होनी चाहिए। - राहुल सेठी, कंकरखेड़ा
नियमों का उल्लंघन
बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। हमारे बच्चे की स्कूल बस में भी पालन नहीं हो रहा था। इसकी शिकायत स्कूल प्रबंधन से की है। - अनुज गोयल, गढ़ रोड
यह बोले अधिकारी
स्कूल खुलने के बाद से बसों का चेकिंग अभियान बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। नियम तोड़ने वाली बसों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। - हिमेश तिवारी, आरटीओ