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फिल्म पद्मावत के गीतकार एएम तुराज से अमर उजाला की खास बातचीत, जानिए क्या बोले...

Mon, 18 Jun 2018 05:20 PM IST
जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Mon, 18 Jun 2018 05:20 PM IST
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Amar Ujala's special dialogue from film lyricist AM Turajat of Padmavat, know what to say
घर ईद मनाने आए गीतकार एएम तुराज अपने पिता के साथ - फोटो : अमर उजाला

फिल्म पद्मावत और बाजीराव मस्तानी के गीतों से दुनियाभर में छाए शायर और गीतकार एएम तुराज ने अपने गीत की कीमत बढ़ा दी है। अब एक गीत के लिए उनकी फीस 10 लाख रुपये हो गई है। ईद की खुशियां मनाने अपने गांव आए तुराज ने कहा कि ऐतिहासिक कहानियों पर बनी फिल्मों के गीतों को लिखना बेहद कठिन है। फिलहाल वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संस्कृति पर एक फिल्म की कहानी लिख रहे हैं।  

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फिल्म पद्मावत और बाजीराव मस्तानी के गीतों को लिख कर बॉलीवुड में आए गीतकार एएम तुराज ने अबकी बार ईद अपने गांव संभलहेड़ा में परिजनों के संग मनाई। डायरेक्टर संजय लीला भंसाली के पसंदीदा गीतकार बने तुराज ने पद्मावत फिल्म के गीतों के लिए राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में लंबा प्रवास किया था, ताकि राजपूताना के शौर्य, त्याग और बलिदान को समझ सके। मीरापुर से जुड़े गांव संभलहेड़ा में उनके पिता वहीद खेती करते है। अमर उजाला से बातचीत में प्रसिद्ध गीतकार तुराज ने कहा कि इतिहास पर आधारित फिल्मों में गीत लिखना आसान नहीं है। सैकड़ों साल पहले के परिदृश्य को समझना और उसकी संस्कृति एवं भव्यता को शब्दों में पिरोना, तभी संभव हो पाता है, जब मानसिक रूप से उस दौर को मन में जीया जाए। संजय लीला भंसाली की फिल्मों से उन्हें भव्य मंच मिला और शोहरत भी। फिलहाल वे एक गीत के लिए 10 लाख रुपये की फीस लेते हैं। शायरी उनकी पहली पसंद है।

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Amar Ujala's special dialogue from film lyricist AM Turajat of Padmavat, know what to say
अपने पिता जी के साथ एएम तुराज - फोटो : अमर उजाला

देश-विदेश के मुशायरों में भागीदारी रहती है, मगर मुंबई की व्यस्तता आड़े आती रहती है। बकौल तुराज, मैं दिवानी मस्तानी हो गई, घूमर, कहीं जो बादल बरसे, तेरे लिए मेरे करीम आदि उनके लिखे गाने खूब पसंद किए गए है। वर्ष 2006 में उन्होंने कुड़ियों का है जमाना, फिल्म के लिए पहली बार गीत लिखे। फिल्म गुजारिश के गीतों को लेकर भंसाली से हुई मुलाकात ने नई राहें खोल दी। बचपन से कविता और शायरी लिखने का शौक रहा। उर्दू, अरबी और हिंदी की समझ ने गीतों को लिखने की कला में पारंगत कर दिया। गीतों की रचना करना एक अलग कला है। तुराज बताते हैं कि वेस्ट यूपी की बोलचाल, रहन-सहन और संस्कृति की पृष्ठभूमि पर एक कहानी लिखने में व्यस्त हैं। मेरठ और बिजनौर में प्रवास कर तथ्य लिए हैं।  

नुमाइश के मुशायरे में नहीं बुलाए गए तुराज
जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी के मुशायरे में आमंत्रित नहीं किए जाने पर गीतकार एवं शायर एएम तुराज प्रशासन से खफा हैं। उन्होंने कहा कि सात साल के बाद जिले में नुमाइश लगी। मुशायरा कमेटी ने उन्हें निमंत्रण देने तक की जहमत नहीं उठाई। सहारनपुर में दो साल पहले हुए मुशायरे में शिरकत की थी।

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