अमर उजाला पड़ताल: सामने आई सरकारी विभागों की सच्चाई, करोड़ से अधिक बकाया, फिर भी नहीं कटे बिजली कनेक्शन
- पुलिस के अलावा अन्य सरकारी विभागों पर भी दो करोड़ से अधिक का बकाया
- कोरोना काल में सरकारी कार्यालय बंद होने के कारण भी वसूली में पिछड़ा निगम
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बिजली बिलों के बकाया भुगतान के मामले में पुलिस ही नहीं अन्य सरकारी विभाग भी मनमानी करने में पीछे नहीं हैं। सरकारी विभागों पर भी विद्युत निगम का दो करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान सरकारी कार्यालयों से लेकर अन्य प्रतिष्ठान बंद रहने के कारण भी विद्युत निगम राजस्व वसूली में पिछड़ गया।
तीन सप्ताह पहले ही प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने राजस्व बढ़ाने के लिए बड़े बकाएदारों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। निगम की टीमों ने शहर से देहात तक चलाए गए अभियान में 2300 से अधिक उपभोक्ताओं पर विद्युत चोरी और बकाया भुगतान न करने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की।
साथ ही 90 लाख रुपये से अधिक की वसूली की गई। इस अभियान के बाद निजीकरण की नीति के विरोध में विद्युत कर्मचारियों की हड़ताल शुरू हो गई। इसलिए राजस्व वसूली में निगम फिर से पिछड़ गया।
ऐसे में सरकारी विभागों पर विद्युत निगम मेहरबान है। यदि इन विभागों से ही वह वसूली कर ले तो दो करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व एक साथ मिल सकता है। मगर सरकार की सख्ती का असर आम उपभोक्ताओं तक ही नजर आता है।
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प्रमुख सरकारी विभागों में बिजली बकाया स्थिति
स्वास्थ्य विभाग 92 लाख रुपये
नगर विकास 03 लाख रुपये
परिवहन विभाग 03 लाख रुपये
राजस्व विभाग 13 लाख रुपये
कृषि विभाग 03 लाख रुपये
कृषि विपणन 12 लाख रुपये
अन्य विभाग 52 लाख रुपये
-विद्युत निगम के अनुसार सितंबर तक अनुमानित बकाया
पहले कोरोना काल, फिर हड़ताल का रहा असर
विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता पंकज श्रीवास्तव कहते हैं कि पहले कोरोना काल और इसके बाद कर्मचारियों की हड़ताल के कारण चेकिंग और बकाया बिल वसूली का अभियान पिछड़ गया। इसमें फिर से तेजी लाकर राजस्व वसूली बढ़ाई जाएगी। सरकारी विभागों में बजट और बिल पास होने की तकनीकी अड़चनें भी आती रहती हैं। इन्हें भी दूर कराने का प्रयास जारी है।
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