स्थापना दिवस पर पढ़िए अमर उजाला की खास खबर, शामली ने लिखी तरक्की की नई इबारत
पिछले 33 साल में शामली ने तरक्की की नई इबारत लिखी गई। 2011 में शामली को जिले का दर्जा मिला तो इसकी रफ्तार ओर तेज हुई। नगर पालिका की सीमा बढ़ी। कई सरकारी दफ्तर खुले और आज शामली तरक्की की ओर दौड़ रहा है।
मेरठ-करनाल फोर लेन बनने से तो यहां से करनाल का रास्ता ही एक घंटे से भी कम का रह गया है। पहले टूटी सड़क पर जाने से दो घंटे लगते थे। अमर उजाला भी इस मुद्दे पर लोगों की आवाज बना और समस्या को प्रमुखता से उठाया था यही वजह रही कि सरकार ने इसकी सुध ली। केंद्र सरकार ने पानीपत-कोटद्वार मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देकर इसकी अहमियत बढ़ाई। हरियाणा से बंद चल रही परिवहन सेवा भी शुरू होने से लोगों को राहत मिली।
शामली शहर को ही लें तो करीब 30 साल पहले इसका क्षेत्रफल ही केवल अंजता चौक, विजय चौक और रेलवे फाटक था, लेकिन धीरे- धीरे शहर का विस्तार किया गया और दायरा बढ़ा। मुजफ्फरनगर जिले का ही हिस्सा होने के कारण शामली 90 से 2000 के दशक में काफी उपेक्षित रहा। सड़कों और हाईवे ही हालत भी बेहद खराब थी लेकिन 2011 में जिला बनने के बाद शहर भी बदला। पहले शहर की सड़कों पर अंधेरा रहता था लेकिन अब शहर की सड़कों पर हाईटेक हाईमास्क एलईडी की रोशनी है। शहर के प्रसिद्व हनुमान धाम का भी नक्शा बदल गया था। मंदिर के अध्यक्ष सलिल दिवेदी कहते हैं कि 33 साल पहले यहां मुख्य मंदिर के अलावा कुछ ही छोटे मंदिर थे लेकिन आज यहां बड़ा पार्क, फव्वारा, के अलावा कई मंदिर बने हैं। महाभारत कालीन मान्यता के कारण इसे महाभारतकालीन पत्थरों की तरह लुक दिया जा रह है। शहर का धीमानपुरा क्षेत्र जो सबसे पुराना मोहल्ला है, यह अब लगभग दो किलोमीटर के दायरे में फैल गया है।
बिजली संकट से मिली निजात
30 साल पहले शहर को भी 12 घंटें बिजली मिलती थी और गांव को दो दिन में छह से आठ घंटे। वजह एक एक फीडर से कई गांव जुडे़ थे। बिजली के लिए धरने प्रदर्शन करने पड़ते थे। 30 साल में जिले में 132, 33 केवीए के 30 से ज्यादा बिजलीघर लगे। गांव में तो दो बिजलीघरों पर धरने प्रदर्शन करने के बाद बिजली आती थी, अब गांव में 20 घंटे और शहरों में तो 24 घंटे बिजली मिल रही है। दो महीने चौसाना के खोडसमा में 400 केवीए के बिजलीघर से समस्या काफी हद तक दूर कर दी है।
-शहर काफी पिछडी हालत में था। 33 साल पहले यातायात के संसाधन ही सीमित थे। हरिद्वार ,देहरादून जाने को सीधी बस नहीं थी। मेरठ के लिए भी दिन में तीन चार बस मिलती थी। घोड़ा तांगा भी खूब चलते थे, तांगे में सवारी पूरी होने पर ही चलते थे कई बार तो आधा आधा घंटा इंतजार करना पड़ता था। मगर अब कई कई बसें इन रुट पर हैं। एससी बसे भी चलने लगी हैं। उदयपाल धीमान, बुजुर्ग
-पहले व्यापारियों के फूड लाइसेंस या अन्य छोटे से काम को भी मुजफ्फरनगर जाना पड़ता था। पूरा दिन लगता था लेकिन अब जिला बनने के बाद बहुत सहूलियत हो गई है। यहां के व्यापारियों ने बागपत के जिला बनते ही शामली के भी जिला बनाने की मांग उठा थी । अमर उजाला भी उनकी आवाज बना और जनता की बातें उठाई। इसी का नतीजा आज सामने है। घनश्यास गर्ग, व्यापारी नेता
ये हुए अहम काम
-मेरठ-करनाल हाईवे का निर्माण
-पानीपत -नगीना कोटद्वार मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को हस्तांतरित
-जिला विकास भवन का निर्माण, दफ्तर शिफ्ट हुए।
-सीएमओ कार्यालय निर्माण
-खोडसमा में 400 केवीए के बिजलीघर को मंजूरी, बजट जारी।
-जिला अस्पताल के लिए 15 करोड मिले।
-मेरठ-पानीपत हाईवे पर कृष्णा नदी पर सेतू निमार्ण।
-जलालपुर में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना।
-गढ़ीपुख्ता से थानाभवन सहित कई मार्ग
-कई राजकीय कन्या इंटर कालेजों को मंजूरी
शामली नगर पालिका का दायरा
30 साल पहले अब
जनसंख्या 40 हजार 1.50 लाख
घर 11 हजार 27,500
मतदाता 30 92 हजार
जिला एक नजर में
लोस सीट 1
विस सीट 2
तहसील - 3
विकास खंड 5
नगर पालिका 3
नगर पंचायत 7
कोतवाली 2
थाने 6
चौकी 23
डाकघर 103
बैंक शाखा 103
प्रा.वि. 1038
उ.प्रा.वि 401
हाईस्कूल 35
इंटर कॉलेज 53
चीनी मिलें 2
मदरसे 45
औधोगिक ईकाई 130
30 साल में ये बढ़ी शहर का दायरा
30 साल में नगर पालिका के क्षेत्र का दायरा भी बढ़ गया। पहले शहर का दायरा केवल विजय चौक, अजंता, बरखंडी, रेलवे फाटक, रेलपार तक ही था, लेकिन इन तीस वालों में इसमें कमला कालोनी, सलेक विहार, गगन विहार, टीचर कालोनी, नई कालोनियां बसी हैं। कैराना पर नहर पुल तक, सिंभालका तक, बनत मुंडेट, गोहरनी, तक हो गया है। काफी बडे क्षेत्रफल में शहर फैला है हालांकि बनत कस्बे को नगर पालिका की सीमा में लाने का प्रस्ताव अभी लंबित है।
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