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गांधी जयंती का वो दिन... जब सहम गया था पूरा शहर, सबसे पहले अमर उजाला ने की थी खबर ब्रेक

Thu, 12 Dec 2019 03:03 AM IST
कपिल kapil जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 12 Dec 2019 03:03 AM IST
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Amar Ujala Foundation Day, Rampur Tiraha Kand in Muzaffarnagar on Gandhi Jayanti in 1994
रामपुर तिराहा कांड का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

दो अक्तूबर 1994... गांधी जयंती का दिन... जनपद के इतिहास की वो काली तारीख, जब रामपुर तिराहा पर अलग राज्य की मांग को लेकर नई दिल्ली रैली में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड के लोगों पर मुजफ्फरनगर में पुलिस ने गोलियां बरसाईं। पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई की खबर अमर उजाला ने ही ब्रेक की। लोगों तक सबसे पहले इस खबर को पहुंचाया और उत्तराखंड आंदोलन में लोगों की आवाज बना... 

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मुजफ्फरनगर में नब्बे के दशक के शुरूआती दौर में वृहद उत्तर प्रदेश को बांटकर पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग शुरू हुई थी। अलग राज्य गठन की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में एक अक्तूबर 1994 की रात एक काला अध्याय जोड़ गई। दरअसल, दो अक्तूबर 1994 को गांधी जयंती पर पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर नई दिल्ली में रैली का आयोजन किया गया था। पृथक उत्तराखंड राज्य के लिए हुए आंदोलन में सक्रिय रहे कोटद्वार निवासी राजेंद्र अण्थवाल (वर्तमान में गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष) बताते हैं कि रैली में शामिल होने के लिए करीब सौ बसों में उत्तराखंड वासियों का जत्था देहरादून से नई दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान दिल्ली के पुलिस उपायुक्त की ओर से एक संदेश यूपी पुलिस को भेजा गया कि रैली में शामिल होने वाले आंदोलनकारियों के जत्थे में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हैं, जिनके पास हथियार हो सकते हैं। उक्त सूचना के आधार पर मेरठ रेंज के तत्कालीन आईजी एसएम नसीम ने हरिद्वार के तत्कालीन एसपी को आंदोलनकारियों को रोकने के आदेश दिए थे।

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इसके बाद हरिद्वार पुलिस ने गुरुकुल नारसन में आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन नाकाम रही। इसकी जानकारी मिलने पर मुजफ्फरनगर के तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह ने तत्कालीन एसपी राजेंद्र पाल सिंह को आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति दे दी। इसके बाद एसपी राजेंद्र पाल सिंह ने अपने अधीन फायरिंग दस्ता गठित किया और रामपुर तिराहा पहुंच गए और रुड़की की ओर से आने वाले आंदोलनकारियों के वाहनों को रोकने के नाम पर जमकर अत्याचार शुरू कर दिया। एक अक्तूबर 1994 की रात 12 बजे जनपद पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग कर दी, जिसमें सात लोग मारे गए और 17 लोग जख्मी हुए।

अमर उजाला ने दो अक्तूबर 1994 के अंक में सबसे पहले इस खबर को ब्रेक किया, जिससे लोगों को पुलिस की इस बर्बरता का पता चला। राजेंद्र अण्थवाल बताते हैं कि अमर उजाला की खबरों के बाद ही पृथक उत्तराखंड गठन की मांग ने अधिक जोर पकड़ा और बर्बरता की खबरों के जरिये इसे लोगों की सहानुभूति भी मिली। आखिरकार नौ नवंबर 2000 को अलग उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया और रामपुर तिराहा पर एक अक्तूबर 1994 की रात मारे गए आंदोलनकारियों की याद में शहीद स्मारक भी बनाया गया, जहां प्रत्येक वर्ष दो अक्तूबर को शहीद आंदोलनकारियों की याद में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं।

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