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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: 25 हजार निर्माणों पर चल सकता है बुलडोजर, कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे सरकारी विभाग

Tue, 21 Jul 2020 11:45 AM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 21 Jul 2020 11:45 AM IST
सार

  • शहर में 25 हजार निर्माणों पर चल सकता है बुलडोजर
  • मेरठ में सेंट्रल मार्केट है अवैध 
  • नई शमन नीति से झटका : नई नीति से भू-उपयोग परिवर्तन हुआ बाहर

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Amar Ujala Exclusive Report: The will action on 25 thousand constructions by government departments in Meerut
शास्त्रीनगर में सेंट्रल मार्केट की दुकानें नई शमन नीति की चपेट में आ सकती हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बहुप्रतिक्षित शमन नीति के जारी होने के बाद मेरठ में भू-उपयोग परिवर्तन कर निर्माण करने वालों को बड़ा झटका लगा है। करीब दो साल से जनप्रतिनिधियों और नेताओं के आश्वासन और दबाव में चुप बैठे सरकारी विभागों को भी अब कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मेरठ का मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है। ऐसे में शहर के 25 हजार से ज्यादा अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गई है। 

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आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर योजना में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण हैं। आवास विकास की स्वीकृत योजना पर अगर नजर डालें तो पूरा सेंट्रल मार्केट ही अवैध है। क्योंकि ये आवासीय प्लॉट थे, जिन पर अब पूरी तरह से व्यावसायिक निर्माण कराकर पूरा बाजार बन चुका है। यही नहीं तेजगढ़ी चौराहा से एल ब्लॉक तिराहे तक मार्ग के दोनों और सर्विस लेन पर भी आवासीय प्लॉट थे। लेकिन यहां पर बड़े शोरूम के साथ बैंक, नर्सिंग होम आदि का निर्माण हो गया है। परिषद की आवासीय योजना जागृति विहार और माधवपुरम में भी आवासीय भूखंडों में व्यावसायिक निर्माण हो गए हैं। ऐसे भू-उपयोग परिवर्तन कर हुए निर्माणों की संख्या करीब आठ हजार से ज्यादा है। 
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एमडीए के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में निर्माण
एमडीए की आवासीय योजना गंगानगर, पल्लवपुरम, शताब्दीनगर, श्रद्धापुरी, पांडव नगर सहित अन्य जगहों पर आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण हो गए हैं। इनकी संख्या 20000 से अधिक है।
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फाइलों में दफन हैं ध्वस्तीकरण के नोटिस 
आवास विकास परिषद भू-उपयोग परिवर्तन वाले तमाम मामलों में ध्वस्तीकरण तक के नोटिस जारी कर चुका है। लेकिन यह नोटिस विभाग ने सिर्फ अपनी गर्दन बचाने के लिए जारी किए और फाइलों में कैद कर लिए। एक दो बार विभाग ने कार्रवाई भी करने की कोशिश की। लेकिन व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारी नेताओं के दबाव में अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। 

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नजरों के सामने होता रहा निर्माण 
इस पूरे मामले में विभागों की भी गर्दन फंसी है। क्योंकि सेटिंग के खेल से आवास एवं विकास परिषद और एमडीए ने पहले तो निर्माण होने दिए। अब जब हाईकोर्ट व शासन का डंडा चला तो विभागों ने कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे व्यापारियों में आक्रोश है। 

अब शमन नीति से भू-उपयोग परिवर्तन ही हुआ बाहर
शासन ने जो शमन नीति जारी की है, उसमें सिर्फ स्वीकृत नक्शे के विपरीत आंशिक निर्माण का ही शमन करने का आदेश जारी किया है। इस नीति में भू-उपयोग परिवर्तन के मामले को पूरी तरह बाहर रखा है। हाइकोर्ट से भी शासन से इस मामले में जवाब मांगा गया है। ऐसे में अब एक बार फिर से भू-उपयोग परिवर्तन कर हुए तमाम निर्माणों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का संकट गहरा गया है। 

हाईकोर्ट में है याचिका दायर 
समाजसेवी लोकेश खुराना ने आवास विकास परिषद की योजनाओं में भू-उपयोग परिवर्तन कर हुए निर्माण पर हाईकोर्ट में साल 2016 में जनहित याचिका दायर की थी, जो अभी लंबित है और विभागों को जवाब देते नहीं बन रहा है। दो साल पहले जब सेंट्रल मार्केट में हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई शुरू हुई थी तो संयुक्त व्यापार संघ के बैनर तले शहर के व्यापारियों ने दबाव बनाकर इस कार्रवाई को रुकवा दिया था। तब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद राजेंद्र अग्रवाल सहित तमाम जनप्रतिनिधियों ने शासन से शीघ्र ही शमन नीति जारी कराने का वादा किया था। 

इसे शमन नीति में शामिल नहीं किया
शमन नीति सिर्फ स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण पर है। भू-उपयोग परिवर्तन को शमन नीति में शामिल नहीं किया जाता है। - इश्तियाक अहमद, मुख्य नगर नियोजक एमडीए

आदेश आ जाए, फिर कहेंगे
हमारे पास अभी शासन से शमन नीति के बारे में जानकारी नहीं आयी है। वहां से आदेश आने के बाद ही आगे के बारे में कुछ कहा जा सकता है। - सतेंद्र पचौरी एसई आवास एवं विकास परिषद

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