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एक्सक्लूसिव: एक साल से साफ नहीं हुए ओवरहेड टैंक, खुली नगर निगम की पोल, ऐसा है इस शहर का हाल

Tue, 10 Nov 2020 05:42 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 10 Nov 2020 05:42 PM IST
सार

  • नगर निगम शहर के लोगों के स्वास्थ्य से कर रहा खिलवाड़
  • नगर निगम ने एक साल से ओवरहेड टैंक की सफाई नहीं कराई

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Amar Ujala Exclusive Report: The municipal corporation did not clean the overhead tank for one year
मेरठ नगर निगम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में नगर निगम की नीयत शहर को स्वच्छ पानी सप्लाई करने की नहीं लग रही है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और भूमिगत जलाशय प्रकरण के बाद अब एक साल से ओवरहेड टैंक भी साफ नहीं कराने का खुलासा हुआ है।

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निगम अधिकारियों का दावा है कि अप्रैल में ओवरहेड टैंकों की सफाई कराई गई थी। जल निगम के यांत्रिकी खंड के पत्र ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सामने आया कि टैंक के पिलरों पर सफाई की तिथि डालकर ही सफाई की इतिश्री कर ली जाती है। 
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नगर निगम शहर को 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के अलावा 157 नलकूपों से जलापूर्ति करता है। गंगाजल और नलकूपों का पानी जमा करने के लिए चार भूमिगत जलाशयों के अलावा 57 ओवरहेड टैंक है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और भूमिगत जलाशयों की सफाई सालाना तो टैंकों की साल में दो बार कराने का प्रावधान हैं। इस पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं।
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अमर उजाला की पड़ताल में जलाशयों की सफाई जहां पिछले चार साल से नहीं की गई तो वहीं ओवरहेड टैंकों को भी एक साल से साफ नहीं किया गया है। 

हवा में उड़े जलाशयों की सफाई के दावे
सर्किट हाउस, टाउन हाल, विकासपुरी और शर्मा स्मारक स्थित भूमिगत जलाशयों की सोमवार से सफाई जीएम जलकल के निर्देश के बाद भी शुरू नहीं हो सकी। यह हाल तब है, जब गंगनहर जल्द ही शुरू होने जा रही है। प्लांट चलने के बाद फिर अगले साल तक सफाई नहीं हो सकेगी। जीएम जलकल रतनलाल का कहना है कि मंगलवार से सफाई का काम शुरू कराया जाएगा। प्लांट चालू होने से पहले सभी जलाशयों की सफाई करा दी जाएगी। भूमिगत और ओवरहेड जलाशयों की सफाई का रोस्टर बन गया है।

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यांत्रिकी खंड के पत्र ने खोली पोल 
जल निगम के यांत्रिकी खंड ने पांच नवंबर को नगर निगम के जीएम जलकल को पत्र भेजकर उन ओवरहेड टैंकों की सूची मांगी थी, जिनकी सफाई एक साल में की गई है। निगम ने सूची उपलब्ध नहीं कराई। इससे प्रतीत हो रहा है कि शहरवासियों को सफाई किए बिना ही ओवरहेड टैंकों से पानी दिया जा रहा है। 

फैल सकती हैं संक्रामक बीमारियां
टैंकों की सफाई नहीं होने से जलाशयों में फोकल कोलीफॉम नामक बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं, जिसके चलते नलकूपों पर क्लोरीन की ओवर डोजिंग करनी पड़ती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। वहीं, ये बैक्टीरिया संक्रामक बीमारियों का कारण बनते हैं। 

निगम का पानी प्रयोग करना छोड़ा 
जल निगम के पत्र में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष आचार्य डॉ. वाचस्पति मिश्र का हवाला दिया गया है। जागृति विहार सेक्टर-4 निवासी डॉ. मिश्र का कहना है कि पिछले साल ओवरहैड टैंक से मरा हुआ बंदर मिला था। इसके बाद से उन्होंने टैंक का पानी पीना बंद कर दिया। अब वह अपने सबमर्सिबल का पानी पी रहे हैं।

प्लांट 14 से शुरू होने में संदेह
गंगनहर चालू होने में अब केवल पांच दिन शेष हैं। 14 नवंबर की आधी रात से गंगनहर चालू हो जाएगी। इसके दो दिन बाद गंगाजल भोला झाल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच जाएगा लेकिन तब तक प्लांट चालू नहीं हो सकेगा। कारण, तीन नवंबर की शाम से शुरू प्लांट की सफाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। उधर, डीएम का प्लांट चालू करने का 15 दिन का अल्टीमेटम 18 नवंबर को खत्म होगा।

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