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एक्सक्लूसिव: विदेश की नौकरी छोड़ शुरू की मोतियों की खेती, इस कारोबार में होगी लाखों की कमाई

Thu, 24 Sep 2020 05:31 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 24 Sep 2020 05:31 PM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: A person of Bijnor has quit his foreign job and starting cultivating pearls
मोती की खेती करते कमलदीप सिंह। - फोटो : अमर उजाला

बिजनौर के गांव सरकथल माधो के किसान कमलदीप सिंह ने विदेश में नौकरी छोड़कर गांव में मोतियों की खेती शुरू की है। तालाब में सीप में बनने वाले मोती देवी-देवताओं की मूर्ति जैसे होंगे। इन पर धर्मों के प्रतीक चिह्न भी बनाए जा सकते हैं। कमलदीप सिंह ने गांव में मोतियों की खेती के लिए दो तालाब बनाए हैं। एक तालाब से एक साल में दस हजार मोती निकलते हैं। एक मोती की कीमत 150 से 200 रुपये तक होती है।

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किसान कमलदीप सिंह ओमान में कैचअप बनाने वाली एक कंपनी में प्रोडक्शन टीम में काम करते थे। वहां उन्होंने खेती की नवीनतम तकनीकें देखीं। गांव में तो किसान धान, गेहूं और गन्ने की ही खेती करते थे। कमलदीप सिंह ने कुछ नया करने का सोचा और नौकरी छोड़कर गांव आ गए। अपने खेतों में उन्होंने 60 गुणा 60 फीट के दो तालाब खुदवाए। हर तालाब में दस हजार सीप डालीं। सीप डाले हुए छह महीने पूरे हो चुके हैं। इन मोतियों की बनावट देवी-देवताओं की मूर्तियों जैसी होती है। इन मोतियों की बाजार में बहुत मांग होती है। एक एक मोती 150 से 200 रुपये तक का बिक जाता है। खासतौर से धार्मिक केंद्रों जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, चार धाम की यात्रा आदि वाली जगहों पर ये खूब बिकते हैं।
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ऐसे बनते हैं मोती
आत्मा परियोजना के प्रभारी योगेंद्रपाल सिंह योगी के अनुसार सीप के अंदर एक कीड़ा होता है। सीप में छोटा सा छेद करके उसमें मूर्ति या किसी धर्म के प्रतीक की मूर्ति का सांचा डाल दिया जाता है। मूर्ति के अंदर मौजूद कीड़ा इस सांचे के ऊपर कैल्शियम की परत चढ़ाता रहता है। साल भर में इसे निकाल लिया जाता है। 
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एक ही फसल पर न रहें आश्रित
किसान कमलदीप सिंह का कहना है कि किसानों को खेती की नई तकनीक भी अपनानी चाहिए। केवल एक ही फसल के पीछे किसानों को आश्रित नहीं रहना चाहिए। जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के मुताबिक किसानों को अलग-अलग तरह की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसान अलग-अलग फसल बोएंगे तभी बाकी के भी अच्छे दाम मिलेंगे।

ऐसे होती है खेती
सीप को एक रस्सी से बांधकर तालाब में डाला जाता है। रस्सी में जगह-जगह प्लास्टिक की खाली बोतल डाली जाती हैं। इससे सीप पूरी तरह तालाब में डूबती नहीं हैं। इससे मोटा मुनाफा होता है। एक ही तालाब से 15 से 20 लाख रुपये के मोती निकाले जा सकते हैं। सीप पानी में काई को खाते हैं। यह इतनी छोटी होती है कि दिखती नहीं है।

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