अमर उजाला अभियान शिक्षा: विद्यार्थियों के शारीरिक विकास पर भी स्कूलों का जोर
अध्यापकों का कहना है कि काफी समय से घर रहने के कारण बच्चों ने शारीरिक गतिविधियां नहीं की हैं, जैसा माहौल उन्हें स्कूल में मिल पाता है वह घर पर नहीं मिल सका। इसको देखते हुए हमने वार्षिक कैलेंडर में विशेष पीरियड रखे हैं। जिसमें बच्चों के शारीरिक विकास पर ध्यान दिया जा सके।
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दो सालों तक चली ऑनलाइन पढ़ाई ने विद्यार्थियों पर शारीरिक रूप से भी प्रभाव डाला। स्कूलों ने ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए भी छात्र-छात्राओं को अच्छा माहौल देने की कोशिश की, लेकिन स्कूल जैसा माहौल घर पर नहीं अभिभावक नहीं दे सके। जिसके परिणाम स्वरूप बच्चे आलस का शिकार होते नजर आए। शारीरिक गतिविधि के अभाव से दो साल बाद ऑफलाइन कक्षाओं में पहुंचे बच्चे आलसी हो गए। स्कूल अब विद्यार्थियों की शारीरिक गतिविधियों पर भी जोर देने की तैयारियों में हैं।
आगामी सत्र से इसके लिए विशेष पीरियड का चयन किया गया है। स्कूलों द्वारा अपने स्तर से जारी किए गए वार्षिक कैलेंडर में शारीरिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें एक से दो पीरियड स्पोर्ट्स के नाम किए गए हैं।
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दो सालों से सीबीएसई द्वारा आयोजित होने वाली क्लस्टर प्रतियोगिताएं भी आयोजित नहीं हो सकी हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं को खेल प्रतियोगिताएं भी नहीं मिल सकी हैं। वार्षिक कैलेंडर में स्कूलों ने अपने स्तर से छोटी बड़ी प्रतियोगिताओं को शेड्यूल किया है।
घर पर नहीं मिला स्कूल जैसा माहौल
काफी समय से घर रहने के कारण बच्चों ने शारीरिक गतिविधियां नहीं की हैं, जैसा माहौल उन्हें स्कूल में मिल पाता है वह घर पर नहीं मिल सका। इसको देखते हुए हमने वार्षिक कैलेंडर में विशेष पीरियड रखे हैं। जिसमें बच्चों के शारीरिक विकास पर ध्यान दिया जा सके। इसके लिए बच्चों को स्कूल में खेलों से भी जोड़ा जा रहा है। - एनपी सिंह, प्रधानाचार्य, गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल, वेस्ट एंड रोड
आलसी हो गए हैं बच्चे
महावीर एकेडमी की प्रधानाचार्य मृदुला गर्ग ने कहा ऑफलाइन कक्षाओं में काफी समय बाद लौटे बच्चे आलसी हो गए हैं। काफी समय तक घर में रहने के कारण यह दुष्प्रभाव दिखे हैं। बच्चों के लिए किताबी ज्ञान के साथ शारीरिक गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। इस साल क्लस्टर नहीं हो सके हैं, ऐसे में बच्चों के शारीरिक विकास की ओर ध्यान देने के लिए स्कूलों को अपने स्तर से ही छोटी बड़ी प्रतियोगिताएं करानी चाहिए। - मृदुला गर्ग, प्रधानाचार्य, महावीर एकेडमी