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Meerut News: महागौरी की उपासना से होती सभी मनोकामनाएं पूर्ण
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प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
- अष्टमी पर महागौरी की पूजा, आज नवमी पर कन्या पूजन व भंडारा
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में बृहस्पतिवार को चैत्र नवरात्र का अष्टमी पर्व श्रद्धा से मनाया गया। इस अवसर पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने माता के दरबार में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। अष्टमी पूजन के उपरांत मां की भव्य आरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य मुकेश शांडिल्य सहित अन्य पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महागौरी का शृंगार कर आरती संपन्न कराई। मंदिर समिति ने बताया कि शुक्रवार को नवमी पर कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन होगा।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने महागौरी के नामकरण की कथा बताई। देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया। इससे उनका शरीर अत्यंत उज्ज्वल हो गया, इसी कारण वह महागौरी कहलाईं। मां महागौरी को करुणा, शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
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हस्तिनापुर। ऐतिहासिक जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में बृहस्पतिवार को चैत्र नवरात्र का अष्टमी पर्व श्रद्धा से मनाया गया। इस अवसर पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने माता के दरबार में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। अष्टमी पूजन के उपरांत मां की भव्य आरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य मुकेश शांडिल्य सहित अन्य पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महागौरी का शृंगार कर आरती संपन्न कराई। मंदिर समिति ने बताया कि शुक्रवार को नवमी पर कन्या पूजन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन होगा।
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मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने महागौरी के नामकरण की कथा बताई। देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया। इससे उनका शरीर अत्यंत उज्ज्वल हो गया, इसी कारण वह महागौरी कहलाईं। मां महागौरी को करुणा, शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
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