खतरनाक स्तर पर पहुंचा एक्यूआई, खराब हवा से बढ़ने लगी बीमारियां, सांस लेने में दिक्कत
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बागपत जिले में एक्यूआई 482 पर पहुंच गया है। हवा की गुणवत्ता खराब होने से आंख और सांस की बीमारियां बढ़ने लगी हैं। लोग आंखों में जलन की शिकायत लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञों के यहां पहुंच रहे हैं। सांस के रोगियों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन प्रदूषण से राहत नहीं मिली।
शनिवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 482 रहा। हवा की गुणवत्ता खराब होने से लोगों की परेशानियां बढ़ रही है। निजी चिकित्सकों के अलावा सरकारी अस्पतालों में नेत्र रोगियों की संख्या बढ़ गई है। अस्थमा से पीड़ित लोग बेहद परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सुबह और शाम की हवा घर से बाहर निकलने लायक नहीं है। स्मॉग के कारण लोगों को बीमारियां घेर सकती हैं।
डॉक्टरों का यह भी कहना है कि चश्मा और मास्क ही खराब हवा से बचा सकता है। ऐसे में जब भी घर से निकले तो मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन प्रदूषण से राहत नहीं मिली।
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हर रोज 18 सिगरेट पीने जितना प्रदूषण गटक रहे लोग
दिल्ली के मौसम विज्ञान केंद्र के स्कॉलर अग्रिम तोमर कहते हैं कि हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। दिवाली के बाद से प्रदूषण का स्तर बेहद खराब हो गया है। लोगों को सांस लेना तो दूभर हो ही गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पिछले पांच साल की रिपोर्ट की मानें तो यह क्षेत्र सबसे प्रदूषित 10 क्षेत्र में शामिल है। स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से या निर्माण कार्य बंद करने से गवर्नमेंट, जनता को प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव से कुछ हद तक तो बचा पाई हैं परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई। वातावरण प्रदूषण के कई रूप हैं, जिसमें से वायु प्रदूषण सबसे जटिल और गंभीर है।
वायु प्रदूषण सर्दियों में ज्यादा दिखाई देता हैं क्योंकि ठंड होने के कारण वायु स्थिर हो जाती है और सतह के पास बैठ जाती है। पटाखों, भट्टों और पराली को जलाने इत्यादि के कारण उत्पन्न हुआ हैं। जिले में प्रदूषण भट्टों और पटाखों से निकलने वाले धुएं एवं हरियाणा और पंजाब में जलने वाली पराली से होता है। इससे सांस लेने में समस्या होती है, खांसी रहती है, शरीर का रक्तचाप बढ़ जाता है और पक्षाघात का खतरा भी बढ़ जाता है। अग्रिम का कहना है कि शहर में इतना वायु प्रदूषण है जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 18 सिगरेट पी रहा है।
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