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राहत : एड्स पीड़ितों के आंगन में गूंजी स्वस्थ बच्च्चों की किलकारी

Sun, 01 Dec 2019 01:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Dec 2019 01:27 AM IST
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aids victims gave birth to healthy children
राहत: एड्स पीड़ितों के आंगन में गूंजी स्वस्थ बच्चों की किलकारी
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मेरठ। अमूमन एचआईवी पीड़ित महिलाएं शादी या संतानोत्पत्ति से बचती हैं। उन्हें डर रहता है उनकी संतान भी एचआईवी से ग्रसित हो सकती है, लेकिन एड्स पीड़ित नियमित इलाज से न सिर्फ गृहस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि उनके आंगन में स्वस्थ बच्चों की किलकारियां भी गूंज रही हैं।

मेडिकल कॉलेज का एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर एड्स पीड़ितों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां जिन 50 गर्भवती महिलाओं का इलाज चल रहा है, उनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा केबच्चे एचआईवी नेगेटिव निकले हैं। यानि उन्हें विरासत से एड्स नहीं मिला है। गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार खाने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाइयां दी जाती हैं। प्रीवेंशन पैरेंट्स टू चाइल्ड ट्रांसमीटेड (पीपीसीटी) यूनिट सेफ डिलीवरी किट से प्रसव के तत्काल बाद नवजात को ड्रॉप पिलाते हैं। 45 दिन पूरे होने पर शिशु का ब्लड सैंपल की जांच कराई जाती है। नेगेटिव रिपोर्ट आने की स्थिति में 18 महीने पूरे होने पर रैपिड टेस्ट में रिपोर्ट सामान्य आने के बाद बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ माना जाता है।
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