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Meerut News: सीसीएसयू में होगी एआई आधारित मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष व प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसकी शुरुआत पहले आंतरिक परीक्षाओं से की जाएगी जिससे मुख्य परीक्षाओं में भी इसे विस्तार दिया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय के कुल सचिव अनिल कुमार यादव ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी, एजुकेशन, सोशियोलॉजी, फिजिक्स, स्टैटिस्टिक्स जैसे विषयों में एआई आधारित मूल्यांकन का सफल ट्रायल और डेमो प्रस्तुत किया गया है। एक विशेष टीम ने इस प्रणाली का विस्तृत प्रदर्शन किया जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर अपलोड करने, उत्तरों को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर जांचने और अंक निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को समझाया गया।
नई एआई प्रणाली की मुख्य विशेषता यह है कि पहले शिक्षक उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन करेंगे। इसके बाद एआई उसी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन करेगी। इससे मानवीय त्रुटियों या संभावित कमियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। उदाहरणस्वरूप, यदि किसी प्रश्न में 10 में से 9.5 अंक बनते हैं तो एआई अंक कटौती के स्पष्ट कारण बताएगी जिससे छात्रों को पूरी पारदर्शिता मिलेगी और वे अपनी कमजोरियों को बेहतर समझ सकेंगे। एआई सिस्टम अंग्रेजी, हिंदी, हिंग्लिश तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे उत्तरों को समझने में सक्षम है। यह न केवल वर्तनी की त्रुटियां पकड़ती है बल्कि छात्र के इरादे और वास्तविक उत्तर को भी समझ लेती है।
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मूल्यांकन पूरा होने पर अंक सीधे छात्र के पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। यदि छात्र अंकों से असंतुष्ट है तो वह फ्लैग लगाकर पुनरीक्षण की मांग कर सकेगा जिससे प्रक्रिया तेज और सुगम हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका देखने की जटिल प्रक्रिया काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। छात्रों को समय पर फीडबैक मिलेगा और अनावश्यक विवाद कम होंगे।
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विश्वविद्यालय के कुल सचिव अनिल कुमार यादव ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी, एजुकेशन, सोशियोलॉजी, फिजिक्स, स्टैटिस्टिक्स जैसे विषयों में एआई आधारित मूल्यांकन का सफल ट्रायल और डेमो प्रस्तुत किया गया है। एक विशेष टीम ने इस प्रणाली का विस्तृत प्रदर्शन किया जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर अपलोड करने, उत्तरों को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित कर जांचने और अंक निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को समझाया गया।
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नई एआई प्रणाली की मुख्य विशेषता यह है कि पहले शिक्षक उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन करेंगे। इसके बाद एआई उसी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन करेगी। इससे मानवीय त्रुटियों या संभावित कमियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। उदाहरणस्वरूप, यदि किसी प्रश्न में 10 में से 9.5 अंक बनते हैं तो एआई अंक कटौती के स्पष्ट कारण बताएगी जिससे छात्रों को पूरी पारदर्शिता मिलेगी और वे अपनी कमजोरियों को बेहतर समझ सकेंगे। एआई सिस्टम अंग्रेजी, हिंदी, हिंग्लिश तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे उत्तरों को समझने में सक्षम है। यह न केवल वर्तनी की त्रुटियां पकड़ती है बल्कि छात्र के इरादे और वास्तविक उत्तर को भी समझ लेती है।
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मूल्यांकन पूरा होने पर अंक सीधे छात्र के पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। यदि छात्र अंकों से असंतुष्ट है तो वह फ्लैग लगाकर पुनरीक्षण की मांग कर सकेगा जिससे प्रक्रिया तेज और सुगम हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका देखने की जटिल प्रक्रिया काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। छात्रों को समय पर फीडबैक मिलेगा और अनावश्यक विवाद कम होंगे।