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कवाल कांड के बाद सपा सरकार ने मौलाना को दिलाई थी वाई श्रेणी की सुरक्षा, ये थी बड़ी वजह

Sun, 10 Feb 2019 12:11 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 10 Feb 2019 12:11 PM IST
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After the Kawal Kand former SP government given  Y-category security Maulana Nazir ahmad
कवाल कांड
मुजफ्फरनगर कवाल  गांव के हत्याकांड के बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम कराने की पहल के लिए तत्कालीन सपा सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जानसठ के मौलाना नजीर अहमद को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी थी। सपा सरकार में गांव कवाल में जाने से रोकते हुए उन पर पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था। दंगों के दौरान करीब दो साल तक मौलाना वाई श्रेणी की सुरक्षा में रहे।
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जानसठ के गांव कवाल में वर्ष 2013 में 17 अगस्त में बाइक और साइकिल की भिड़ंत को लेकर हुए संघर्ष में मलिकपुरा के ममेरे भाई सचिव व गौरव की हत्या कर दी गई थी। इस संघर्ष में कवाल निवासी सलीम का पुत्र शाहनवाज भी मारा गया था। इसके बाद क्षेत्र के हालात बिगड़ऩे प्रारंभ हो गए थे। वर्ष 2013 में तीन दिसंबर को जानसठ के मोहल्ला गंज में स्थित मदरसा तालीममुल कुरान के मौलाना नजीर अहमद कासमी क्षेत्र के काफी संख्या में मुस्लिम समाज को लेकर कवाल में जाने लगे। 
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पुलिस प्रशासन को इसकी खबर लग गई थी। प्रशासन ने कवाल जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस को तैनात कर दिया था। जानसठ में ही खतौली तिराहे पर पुलिस ने नाकेबंदी कर दी थी। कवाल जाने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ उस वक्त मौलाना की काफी जद्दोजहद हुई। 

इसके बाद पुलिस ने मौलाना सहित कई लोगों के विरुद्ध धारा 144 का उल्लंघन करने का मुकदमा दर्ज किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने क्षेत्र में शांति कराने के लिए विशेष विमान मेरठ में भेजकर मौलाना को लखनऊ में बुलवाया। इस विमान में दिल्ली के रहने वाले कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेता आए थे। लखनऊ से लौटते ही तत्कालीन मौलाना को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी। 

After the Kawal Kand former SP government given  Y-category security Maulana Nazir ahmad
कवाल कांड

दंगा पीड़ित परिवारों को जगी जल्द न्याय की उम्मीद 
कांधला (शामली)। मुजफ्फरनगर के कवाल कांड में मलिकपुरा के सचिन और गौरव के हत्यारों को कोर्ट से सजा मिलने के बाद अब दंगा पीड़ित परिवारों को भी उम्मीद है कि उन्हें भी जल्द न्याय मिलेगा। अमर उजाला ने कांधला के जन्नत कालोनी में रह रहे दंगा पीड़ितों से बात की।  

गांव कुटबा निवासी इमरान का परिवार सलेमपुर रोड जन्नत कालोनी में अपने परिवार के लोगों के साथ में रह रहा है। परिवार के मुखिया इमरान ने बताया कि दंगे वाली रात जब गांव में चारों तरफ हिंसा हो रही थी तो परिवार के लोग जान बचाने के लिए भागे और इधर उधर भटक गए। दंगे में अपने पिता शमशाद और अपने भाई इरशाद को खो दिया था। सरकार की और से एक सदस्य को नौकरी दी गई।
 

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अब उनका केस भी न्यायालय में विचाराधीन है। कहा कि जिस तरह न्यायालय ने मलिकपुरा केस में फैसला दिया है उन्हें भी उम्मीद जगी है कि उन्हें भी जल्द न्याय मिलेगा। कोर्ट के फैसले का इंतजार है।  उधर, गांव कुटबा के गुलजार का परिवार भी कस्बे के जन्नत कालोनी मे रहा है। गुलजार ने बताया कि दंगे की रात उसके पिता सुक्कन की हत्या कर दी थी। सरकार की ओर से भाई इसरार को एक नौकरी दी गई । परिवार के लोग उस नौकरी के भरोसे अपना जीवन यापन कर रहे है।

फैसले पर विपक्षी दलों ने साधी चुप्पी
कवाल कांड के सचिन-गौरव दोहरे हत्याकांड में आए कोर्ट के निर्णय के बाद विपक्षी दलों ने चुप्पी साध लिया है। वहीं, आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के कोर्ट के फैसले का भाजपा नेताओं ने तहेदिल से स्वागत किया है।

इस प्रकरण पर विपक्षी दलों के नेताओं ने पूरी तरह से मौन साध लिया है। सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप, कांग्रेस नेता हरेंद्र मलिक, पूर्व सांसद सईदुज्जमा, बसपा नेता कादिर राना, रालोद नेता अमीर आलम खान आदि से कवाल कांड के फैसले पर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है। 

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