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Meerut News: निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अधिवक्ताओं ने एसडीएम को दिया ज्ञापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली के विरोध में अभिभावकों की समस्या को लेकर अधिवक्ताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस संबंध में संज्ञान लेते हुए जांच के बाद कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में बताया कि क्षेत्र में जनसंख्या के अनुपात में सरकारी स्कूलों की कमी होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं निजी स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं। इस स्थिति का लाभ उठाकर कई निजी विद्यालय मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूलों में निर्धारित शुल्क का अभाव है, जिससे रजिस्ट्रेशन फीस, एडमिशन फीस, वार्षिक शुल्क और डेवलपमेंट फीस के नाम पर अतिरिक्त धनराशि ली जा रही है।
स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों पर दबाव बनाकर किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। ज्ञापन में कहा कि हर वर्ष पाठ्यक्रम में बदलाव कर दिया जाता है, जिससे पुरानी किताबों का पुनः उपयोग संभव नहीं हो पाता और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अधिनियम, 2018 को सख्ती से लागू करते हुए निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाई जाए और दोषी संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में एडवोकेट कुलदीप त्यागी, कुशल आनंद, सुनील कुमार, पंकज शर्मा, शिव सागर, दीपक तोमर, रिजवान अली, संयम पांचाल, विपिन कुमार आदि शामिल रहे।
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सरधना। क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली के विरोध में अभिभावकों की समस्या को लेकर अधिवक्ताओं ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस संबंध में संज्ञान लेते हुए जांच के बाद कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में बताया कि क्षेत्र में जनसंख्या के अनुपात में सरकारी स्कूलों की कमी होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं निजी स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं। इस स्थिति का लाभ उठाकर कई निजी विद्यालय मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूलों में निर्धारित शुल्क का अभाव है, जिससे रजिस्ट्रेशन फीस, एडमिशन फीस, वार्षिक शुल्क और डेवलपमेंट फीस के नाम पर अतिरिक्त धनराशि ली जा रही है।
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स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों पर दबाव बनाकर किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। ज्ञापन में कहा कि हर वर्ष पाठ्यक्रम में बदलाव कर दिया जाता है, जिससे पुरानी किताबों का पुनः उपयोग संभव नहीं हो पाता और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अधिनियम, 2018 को सख्ती से लागू करते हुए निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाई जाए और दोषी संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में एडवोकेट कुलदीप त्यागी, कुशल आनंद, सुनील कुमार, पंकज शर्मा, शिव सागर, दीपक तोमर, रिजवान अली, संयम पांचाल, विपिन कुमार आदि शामिल रहे।
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