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बुलंदशहर हिंसा के बाद मीट प्लांटों पर बड़ी कार्रवाई, दो फैक्ट्रियों को बंद करने के निर्देश

Tue, 11 Dec 2018 12:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 11 Dec 2018 12:18 PM IST
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Action on Meat Plants in Meerut after Bulandshahr Violence, instructions for closure of factories
मीट फैक्ट्रियों पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला

बुलंदशहर बवाल के बाद अवैध रूप से चल रही मीट फैक्ट्रियों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। जिलाधिकारी ने दो फैक्ट्रियों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। उधर, एमडीए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन दोनों फैक्ट्री संचालकों ने शपथपत्र देकर कहा है कि उन्होंने खुद ही अपनी फैक्ट्रियां बंद कर ली हैं। 

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मीट फैक्ट्रियों पर इस समय जांच चल रही है। दरअसल मेरठ में काफी मीट फैक्ट्रियां ऐसी हैं जो अवैध रूप से चल रही है। म्यांमार तक के कारोबारी ने यहां आकर अवैध रूप से फैक्ट्री बना ली पर किसी विभाग ने कोई सुध नहीं ली। एमडीए ने सबसे ज्यादा लापरवाही दिखाई। बिना मानचित्र स्वीकृत हुए ही बड़ी बड़ी फैक्ट्री खड़ी हो गईं। काफी फैक्ट्रियों के पास प्रदूषण नियंत्रण विभाग की एनओसी नहीं है तो कुछ के पास नगर निगम की मंजूरी नहीं है। अधिकतर के पास एपीडा का लाइसेंस नहीं है। कई प्लांटों में सील लगी होने के बावजूद कटान हो रहा था। डीएम अनिल ढींगरा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम, एमडीए, फायर विभाग आदि से कहा है कि वह अपने अपने स्तर पर जांच कर रिपोर्ट दें। लगातार दो दिन यहां छापामारी कराई गई। सभी फैक्ट्रियों में जाकर 15 टीमों ने सारे दस्तावेज चेक किए। विभागों ने अपनी रिपोर्ट डीएम को पेश कर दी है।

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अल सावेज और अल हबीब पर गिरी गाज
अल्लीपुर स्थित अल सावेज और अल हबीब मीट प्लांट पर सबसे पहले गाज गिरी है। डीएम अनिल ढींगरा ने कहा है कि यहां खामियां हैं। इन्हें बंद कराया जाए। उधर, इस बाबत एमडीए ने रिपोर्ट भेजी है। बताया है दोनों ही फैक्ट्रियों के संचालकों ने शपथ पत्र दिया है कि उन्होंने अपने प्लांट खुद ही बंद कर दिए हैं। सचिव एमडीए राजकुमार के मुताबिक इन फैक्ट्रियों के मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया है पर यह बोर्ड मीटिंग में ही मंजूर हो सकता है। चूंकि मामला भू उपयोग परिवर्तन का है तो बिना बोर्ड मीटिंग के इसका निदान संभव नहीं है। नक्शा स्वीकृत न होने तक इन्हें अवैध ही माना जाएगा। हालांकि इसकी जांच होगी कि वास्तव में ये बंद हैं या नहीं।

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