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मदरसे में पढ़ाई नहीं जासूसी कर रहा था अब्दुल्ला, IS से मिलकर ये थी प्लानिंग...

Fri, 11 Aug 2017 07:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 11 Aug 2017 07:47 PM IST
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Abdullah was not pursuing studies in Madarsa, IS consisting of terrorists ...
आतंकी अब्दुल्ला गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर में चरथावल के गांव कुटेसरा से पकड़े गए आतंकी अब्दुल्ला ने मदरसा महमूदिया में 200 रुपये में दाखिला लिया था। मदरसे में खुद को गरीब और मजलूम बताकर मुफ्त में हॉस्टल में रहने और खाने की सुविधा भी हासिल कर ली थी। आठ माह तक अब्दुल्ला के रहने-खाने का खर्च भी मदरसा प्रशासन ने वहन किया। रिकार्ड के मुताबिक पढ़ाई के दौरान आतंकी से कोई परिचित या रिश्तेदार तक मिलने नहीं आया। बताया गया कि वह मदरसे में रहकर पढ़ाई नहीं बल्कि आईएस के जासूसी कर रहा था। 

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एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी अब्दुल्ला ने रिमांड के दौरान कई राज खोले हैं। बकिया गया है। दीनी तालीम की आड़ में आतंकी अब्दुल्ला शहर के सरवट में रहा। इस दौरान उसने किन-किन गतिविधियों को अंजाम दिया, इसकी छानबीन चल रही है। सूत्रों के मुताबिक मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला ने खुद को इस तरह से पेश किया था कि वह केवल दीन की जिंदगी गुजारने वाला बनेगा। हदीस के मुताबिक अपने अखलाक (कर्म) रखेगा, लेकिन उसके शातिर दिमाग में क्या चल रहा था। असल में कौन है? इन सब बातों से मदरसा प्रशासन अंजान रहा। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला ने मौलवियत की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लेने में 200 रुपये बतौर फीस के दिए थे।

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आतंकी

दाखिले के समय उसने खुद को गरीब और मजलूम बताकर दीनी तालीम हासिल करने की गुजारिश की थी। बाहरी छात्रों के नियमों के अनुसार मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला को हॉस्टल में कमरा और खाना मुहैया कराया गया। मदरसे के रिकार्ड के मुताबिक मौलवियत की पढ़ाई के दौरान आतंकी से उसका कोई परिचित, रिश्तेदार या दोस्त कभी मिलने नहीं आया। इसके अलावा आतंकी ने मदरसे से बाहर घूमने और आने-जाने की कोई अनुमति भी नहीं ली। ऐसे में अनुमान है कि अब्दुल्ला गोपनीय तरीके से अपने मिशन को अंजाम देने में लगा रहता था।    

इसलिए नहीं जान पाए आतंकी की हकीकत  ः मदरसे के मोहतमिम कारी नईम ने बताया कि मदरसे में पढ़ने वाले बाहरी छात्रों से तीन साल पहले ही आईडी, घर का मूल निवास आदि लेने का काम शुरू किया गया है। अब्दुल्ला ने केवल अपना पता लिखाया था, उस वक्त आईडी नहीं ली जाती थी, जिस कारण अब्दुल्ला की हकीकत नहीं जान सके। सहारनपुर के वकील पर एटीएस की नजर ः अब्दुल्ला का फर्जी पासपोर्ट बनाने का मामला सहारनपुर से जुड़ा है। नौ हजार रुपये लेकर पासपोर्ट बनवाने वाले सहारनपुर के कथित वकील को चिह्नित कर लिया गया है। एटीएस उसके खिलाफ सुबूत जुटा रही है।

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