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कर्म से तय होती है मनुष्य की महानता : शाशवतानंद
Sun, 14 Jun 2026 07:01 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 14 Jun 2026 07:01 PM IST
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सरधना। गंग नहर स्थित परमानंद आश्रम में शाश्वत प्रवाह धर्म प्रचार-प्रसार संघ के तत्वावधान में आय
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गंग नहर स्थित परमानंद आश्रम में त्रिदिवसीय शाश्वत संस्कार शिविर संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। गंग नहर स्थित परमानंद आश्रम में शाश्वत प्रवाह धर्म प्रचार-प्रसार संघ के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय शाश्वत संस्कार शिविर का रविवार को समापन हो गया। शिविर में बच्चों को सनातन संस्कार, माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
शिविर को संबोधित करते हुए शाश्वतानंद आचार्य ने कहा कि मनुष्य की महानता जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और गुणों से निर्धारित होती है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण को सनातन धर्म का मूल संदेश बताते हुए पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कर्ण गोस्वामी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया। शाश्वत महाराज ने बच्चों को यज्ञोपवीत प्रदान कर श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प दिलाया। शिक्षार्थियों ने जनेऊ धारण कर द्विज बनने के साथ स्वयं को संस्कारित बनाकर समाज को श्रेष्ठ दिशा देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रतीक, कृष्णा, कार्तिक, सार्थक, वैदिक, केशव, वासु, ध्रुव, आयुष और मनी सहित अनेक साधकों ने शाश्वत सनातन व्रत धारण किया। कार्यक्रम में नितिन, पवन, रजनीश, राजेश्वरी, अमृता, रानी, विनोद समेत शाश्वत प्रवाह के अनेक साधक-साधिकाएं मौजूद रहीं।
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सरधना। गंग नहर स्थित परमानंद आश्रम में शाश्वत प्रवाह धर्म प्रचार-प्रसार संघ के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय शाश्वत संस्कार शिविर का रविवार को समापन हो गया। शिविर में बच्चों को सनातन संस्कार, माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
शिविर को संबोधित करते हुए शाश्वतानंद आचार्य ने कहा कि मनुष्य की महानता जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और गुणों से निर्धारित होती है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण को सनातन धर्म का मूल संदेश बताते हुए पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कर्ण गोस्वामी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ संपन्न कराया। शाश्वत महाराज ने बच्चों को यज्ञोपवीत प्रदान कर श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प दिलाया। शिक्षार्थियों ने जनेऊ धारण कर द्विज बनने के साथ स्वयं को संस्कारित बनाकर समाज को श्रेष्ठ दिशा देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रतीक, कृष्णा, कार्तिक, सार्थक, वैदिक, केशव, वासु, ध्रुव, आयुष और मनी सहित अनेक साधकों ने शाश्वत सनातन व्रत धारण किया। कार्यक्रम में नितिन, पवन, रजनीश, राजेश्वरी, अमृता, रानी, विनोद समेत शाश्वत प्रवाह के अनेक साधक-साधिकाएं मौजूद रहीं।
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