एक झपकी लगी और उजड़ गई दुनिया, किसी घर का चिराग बुझा तो किसी का सुहाग उजड़ा
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वर्तमान दौर में सब कुछ बदला बदला है। भागदौड़ भरी दिनचर्या है। इस समय लोगों के पास न रिश्तों के लिए समय है और न ही परिवार के लिए। लंबा सफर और लगातार ड्राइविंग के बीच चालक को आई झपकी भीषण हादसे की वजह बन रही है। मेरठ और सहारनपुर मंडल में हादसों में सबसे ज्यादा मौतें मेरठ जिले में हुई हैं। बिजनौर, मुजफ्फरनगर और शामली में हुए हादसों में यही वजह सामने आई है। मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में इस वर्ष बीते छह माह में सर्वाधिक मौतें अप्रैल, मई और जून माह में हुईं। इन महीनों में विवाह-शादी समारोहों की धूम थी। साथ ही ग्रीष्मकालीन अवकाश भी चल रहे थे। शादी विवाह समारोह में शामिल होने वाले और टूर पर जाने लोग ही हादसों का अधिक शिकार बने। अधिकांश मरने वाले दुपहिया वाहन पर सवार थे और हेलमेट नहीं लगाने की चूक उन्हें भारी पड़ी। हादसों की एक बड़ी वजह खराब सड़कें भी है। दोपहिया वाहन सवारों की मौत का सबसे बड़ा कारण हेलमेट नहीं लगाना है। हेलमेट लगाने का अगर ध्यान रखा जाए तो अपनी जान बचाई जा सकती है।
हादसों में कहां कितनी मौतें
172- लोगों की मौत मुजफ्फरनगर की सड़कों पर छह माह में
455- लोगों ने बिजनौर की सड़कों पर बीते छह माह में गंवाई जान
56- लोगों की मौत बागपत की सड़कों पर बीते छह माह में
103- लोगों ने छह माह में सहारनपुर की सड़कों पर पाई दर्दनाक मौत
228- लोगों की मौत मेरठ की सड़कों पर बीते छह माह में
केशव के सिर से उठा माता-पिता का साया
मुजफ्फरनगर। एक झपकी लगी और भरा पूरा परिवार उजड़ गया। 28 अप्रैल को साकेत निवासी क्रिकेट कोच विकास शर्मा देहरादून में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद कार से मुजफ्फरनगर लौट रहे थे। झपकी लगने से उनकी कार डिवाइडर से टकरा गई। क्रिकेट कोच विकास शर्मा, उसकी पत्नी स्वाति शर्मा, बहन मंजू शर्मा, ममेरे भाई संजय शर्मा की मौत हो गई। इस हादसे में उनका आठ साल का इकलौता बेटा केशव बचा था, जिसकी परवरिश अब हरिद्वार में रहने वाली उसकी बुआ कर रही हैं।
खून से लाल हो रहीं सड़कें
मेरठ। वेस्ट यूपी के जिलों में हत्या की घटनाओं से ज्यादा हादसे हो रहे हैं। टूटी सड़कें हादसे का सबब बन रही हैं। मेरठ में 228 लोगों की मौत व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। बच्चा पार्क पर तीन किशोर की दर्दनाक मौत, शास्त्रीनगर में दादा पोती की मौत, एनएच-58 हाईवे पर सिपाही समेत तीन लोगों की मौत, बुढ़ाना गेट पर महिला की मौत सहित 228 लोगों की मौत का जिम्मेदार सिस्टम हैं। ट्रैफिक विभाग की जांच पड़ताल में अधिकांश मौत सड़क के बीच बने गड्ढों के चलते हुई है। अमूमन हादसे होने का कारण लापरवाही से वाहन चलाना, शराब सेवन करके वाहन चलाना बताकर पुलिस पल्ला झाड़ देती है। लेकिन सच्चाई तो यह कि हर हादसे के पीछे सरकारी खामियां है। एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार का कहना है कि हादसे में पुलिस, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और एमडीए विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। ट्रैफिक को देखते मानकों के अनुसार सड़के नहीं बनती। बनने से पहले सड़कों में गड्ढे हो जाते हैं। आरटीओ विभाग भी इसको नजरअंदाज कर देता है। लगातार वेस्ट यूपी में एक्सीडेंट का ग्राफ बढ़ता रहा है।
20 लाख की आबादी में दो टीएसआई
एसपी ट्रैफिक संजीव कुमार वाजपेयी का कहना है कि विभाग में स्टाफ की कमी है। 20 लाख लोगों की आबादी में सिर्फ दो टीएसआई है। जाम से मुक्ति और एक्सीडेंट की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस क्या करेगी। संसाधनों की कमी भी है।
चालक बरतें सावधानी
वाहन चालक सड़क पर बाएं तरफ होकर चले
पीछे से आ रहे वाहनों को निकलने के लिए जगह दें।
दुपहिया वाहन चलाते समय चालक पहने हेलमेट
व्यस्त सड़कों पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतें
वाहनों के लिए निर्धारित गति सीमा का पालन करें
वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करें।
वाहन चलाते समय ईयरफोन पर गाने नहीं सुने।
सर्विस रोड से मुख्य रोड पर आने से पहले देख लें मार्ग
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