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विनयवान व्यक्ति सभी गुणों से संपन्न : मुनि भाव भूषण महाराज
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 27वें दिन 120 परिवारों ने मंडल पर अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत जिनेंद्र भगवान के अभिषेक से हुई। संगीता जैन, संजीव जैन, आयुष्मान जैन, अभिनव, अर्जुन, नेमचंद जैन, नरेश जैन और उर्मिला जैन ने शांतिधारा की।
विधान के दौरान मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि मान, घमंड और अभिमान मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विष व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है, उसी प्रकार अहंकार भी मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देता है। व्यक्ति चाहे कितना भी धनवान, ज्ञानवान या बलवान क्यों न हो, उसे कभी अभिमान नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि इतिहास में रावण, कौरव और कंस जैसे शक्तिशाली एवं बुद्धिमान व्यक्तियों का पतन भी उनके अहंकार के कारण हुआ। जीवन में विनयशीलता अपनाना आवश्यक है। विनयवान व्यक्ति ही विद्या और सद्गुणों को ग्रहण कर सकता है। उसे यश, कीर्ति, पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
शांतिनाथ विधान की सामूहिक पूजा संपन्न हुई और 120 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों का गुणगान कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संगीतमय आरती और भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
इस मौके पर क्षेत्रीय अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, राजीव जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन, गुरमीत, अनुपम, शुभम और सुदर्शन जैन सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के समक्ष आयोजित 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 27वें दिन 120 परिवारों ने मंडल पर अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत जिनेंद्र भगवान के अभिषेक से हुई। संगीता जैन, संजीव जैन, आयुष्मान जैन, अभिनव, अर्जुन, नेमचंद जैन, नरेश जैन और उर्मिला जैन ने शांतिधारा की।
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विधान के दौरान मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि मान, घमंड और अभिमान मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विष व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है, उसी प्रकार अहंकार भी मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देता है। व्यक्ति चाहे कितना भी धनवान, ज्ञानवान या बलवान क्यों न हो, उसे कभी अभिमान नहीं करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि इतिहास में रावण, कौरव और कंस जैसे शक्तिशाली एवं बुद्धिमान व्यक्तियों का पतन भी उनके अहंकार के कारण हुआ। जीवन में विनयशीलता अपनाना आवश्यक है। विनयवान व्यक्ति ही विद्या और सद्गुणों को ग्रहण कर सकता है। उसे यश, कीर्ति, पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
शांतिनाथ विधान की सामूहिक पूजा संपन्न हुई और 120 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों का गुणगान कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संगीतमय आरती और भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
इस मौके पर क्षेत्रीय अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, राजीव जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन, गुरमीत, अनुपम, शुभम और सुदर्शन जैन सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद