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कैसे तय हो गया फंड
Meerut
Updated Mon, 14 Jan 2013 05:30 AM IST
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मेरठ । शासन के सवाल ने नगर निगम अफसरों और सदन को मुश्किल में डाल दिया है। शासन ने विकास कार्यों के लिए मनमर्जी से फंड तय करने पर रिपोर्ट तलब की है। निगम अफसरों से पूछा कि आखिर किस नियम के तहत ऐसा किया गया है?
नगर निगम बोर्ड बैठक में शहर के विकास का खाका खींचते हुए कोष तय किया गया था। इसमें प्रत्येक पार्षद को 20 लाख रुपये के विकास कार्य कराने की अनुमति दी गई थी। हालांकि नगरायुक्त और महापौर के स्तर से विकास कार्य के लिए दो करोड़ रुपये का कोष तय किया था। कुल 20 करोड़ से होने वाले विकास कार्यों में 15 करोड़ रुपये के कार्य अवस्थापना निधि से और पांच करोड़ रुपये के कार्य बोर्ड फंड से कराए जाएंगे। नगर विकास विभाग से जारी पत्र में पूछा कि आखिर किस नियम के तहत कोष तय किया गया है। शासन ने रिपोर्ट तलब की है। नगरायुक्त राजकुमार सचान ने बताया कि फिलहाल कार्य पर रोक लगा दी गई है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि उन्हें पत्र की जानकारी नहीं है।
पिछले बोर्ड में भी हुआ कमाल
नगर निगम के पिछले बोर्ड में भी विकास कार्य को कोष तय किया गया था। ठेकेदार दास महेंद्र ने बताया कि कार्य के बाद अधिकतर का भुगतान नहीं किया है। वहीं पार्षद दीवान शरीफ खां ने नगर विकास मंत्री आजम खां को फैक्स भेजकर नगरायुक्त शिकायत की।
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नगर निगम बोर्ड बैठक में शहर के विकास का खाका खींचते हुए कोष तय किया गया था। इसमें प्रत्येक पार्षद को 20 लाख रुपये के विकास कार्य कराने की अनुमति दी गई थी। हालांकि नगरायुक्त और महापौर के स्तर से विकास कार्य के लिए दो करोड़ रुपये का कोष तय किया था। कुल 20 करोड़ से होने वाले विकास कार्यों में 15 करोड़ रुपये के कार्य अवस्थापना निधि से और पांच करोड़ रुपये के कार्य बोर्ड फंड से कराए जाएंगे। नगर विकास विभाग से जारी पत्र में पूछा कि आखिर किस नियम के तहत कोष तय किया गया है। शासन ने रिपोर्ट तलब की है। नगरायुक्त राजकुमार सचान ने बताया कि फिलहाल कार्य पर रोक लगा दी गई है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने बताया कि उन्हें पत्र की जानकारी नहीं है।
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पिछले बोर्ड में भी हुआ कमाल
नगर निगम के पिछले बोर्ड में भी विकास कार्य को कोष तय किया गया था। ठेकेदार दास महेंद्र ने बताया कि कार्य के बाद अधिकतर का भुगतान नहीं किया है। वहीं पार्षद दीवान शरीफ खां ने नगर विकास मंत्री आजम खां को फैक्स भेजकर नगरायुक्त शिकायत की।
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