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‘लड़की को बना दिया लड़का’
Meerut
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना कन्या विद्याधन और बेरोजगारी भत्ते को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही का दंश कन्याएं झेल रही हैं। चैक में कुछ छात्राओं को लड़का दर्शा दिया गया है तो कुछ का नाम और उपनाम बदल दिया गया है। जिसके कारण छात्राएं चैक लेकर डीआईओएस कार्यालय और बैंक के चक्कर लगा रही हैं। शुक्रवार को दर्जनों छात्राएं और उनके अभिभावक डीआईओएस कार्यालय पहुंचे और चैक जमा कर दिए।
कन्या विद्याधन के लिए 2369 छात्राओं का चयन किया गया था। 10 नवंबर को मुख्यमंत्री ने कन्या विद्याधन एवं बेरोजगारी भत्ता वितरण समारोह में कन्याओं और बेरोजगारों को चैक बांटे थे। अधिकारियों की लापरवाही के कारण छात्राओं को मिले चैक कैश नहीं हो रहे हैं। इनमें एक छात्रा वह भी है जिसको मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से चैक दिया था। इस तरह के मामलों की बानगी देखिए।
केस एक : शिवानी पुत्री कुलदीप को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कन्या विद्या धन का चैक दिया था। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चैक में शिवानी का नाम शिवान कर दिया। उस समय शिवानी ने चैक पर नाम की गलती से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया था। कुलदीप का कहना है कि तभी से चैक ठीक कराने के लिए डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
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केस दो : खुशबू शर्मा पुत्री अजय शर्मा को कन्या विद्या धन का चैक मिला था। इनके चैक पर पिता व पुत्री का नाम बदलकर शर्मा के स्थान पर वर्मा कर दिया है। वह नाम ठीक कराने के लिए बैंक और डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं।
केस तीन : गुलफशा पुत्री शौकीन कन्या विद्याधन का चैक पाने के बाद जितनी खुश थी, अब उतनी ही परेशान हैं। अधिकारियों ने चैक पर उसका नाम बदलकर गुलकशा कर दिया है। अब वह चैक बैंक में कैश नहीं हो रहा है।
केस चार : अनम अहमद पुत्री अखलाक को कन्या विद्या धन के चैक में लड़की के स्थान पर लड़का बना दिया गया, उसे अनस अहमद दर्शा दिया है। उसका कहना है कि पहले उन्होंने कन्या विद्या धन पाने वालों की सूची में शामिल होने के लिए चक्कर लगाए थे अब वह चैक में गलत नाम को सही कराने के लिए चक्कर लगा रही हैं।
ये केस उदाहरण मात्र हैं। ऐसे चैक दर्जनों हैं, जिनको ठीक कराने के लिए छात्राएं और उनके अभिभावक डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
वर्जन
कंप्यूटर में सूची फीडिंग करते समय कुछ गलती हुई हैं। जिनको ठीक कराया जा रहा है। शुक्रवार को भी आठ चैक ठीक कराए गए हैं। इस काम में एक क्लर्क को लगाया गया है। - शिवकुमार ओझा, जिला विद्यालय निरीक्षक।
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कन्या विद्याधन के लिए 2369 छात्राओं का चयन किया गया था। 10 नवंबर को मुख्यमंत्री ने कन्या विद्याधन एवं बेरोजगारी भत्ता वितरण समारोह में कन्याओं और बेरोजगारों को चैक बांटे थे। अधिकारियों की लापरवाही के कारण छात्राओं को मिले चैक कैश नहीं हो रहे हैं। इनमें एक छात्रा वह भी है जिसको मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से चैक दिया था। इस तरह के मामलों की बानगी देखिए।
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केस एक : शिवानी पुत्री कुलदीप को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कन्या विद्या धन का चैक दिया था। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चैक में शिवानी का नाम शिवान कर दिया। उस समय शिवानी ने चैक पर नाम की गलती से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया था। कुलदीप का कहना है कि तभी से चैक ठीक कराने के लिए डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
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केस दो : खुशबू शर्मा पुत्री अजय शर्मा को कन्या विद्या धन का चैक मिला था। इनके चैक पर पिता व पुत्री का नाम बदलकर शर्मा के स्थान पर वर्मा कर दिया है। वह नाम ठीक कराने के लिए बैंक और डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं।
केस तीन : गुलफशा पुत्री शौकीन कन्या विद्याधन का चैक पाने के बाद जितनी खुश थी, अब उतनी ही परेशान हैं। अधिकारियों ने चैक पर उसका नाम बदलकर गुलकशा कर दिया है। अब वह चैक बैंक में कैश नहीं हो रहा है।
केस चार : अनम अहमद पुत्री अखलाक को कन्या विद्या धन के चैक में लड़की के स्थान पर लड़का बना दिया गया, उसे अनस अहमद दर्शा दिया है। उसका कहना है कि पहले उन्होंने कन्या विद्या धन पाने वालों की सूची में शामिल होने के लिए चक्कर लगाए थे अब वह चैक में गलत नाम को सही कराने के लिए चक्कर लगा रही हैं।
ये केस उदाहरण मात्र हैं। ऐसे चैक दर्जनों हैं, जिनको ठीक कराने के लिए छात्राएं और उनके अभिभावक डीआईओएस कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
वर्जन
कंप्यूटर में सूची फीडिंग करते समय कुछ गलती हुई हैं। जिनको ठीक कराया जा रहा है। शुक्रवार को भी आठ चैक ठीक कराए गए हैं। इस काम में एक क्लर्क को लगाया गया है। - शिवकुमार ओझा, जिला विद्यालय निरीक्षक।