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दलाल राज जिंदा करने को बिगाड़ रहे विवि का माहौल
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दलाल राज जिंदा करने को बिगाड़ रहे विवि का माहौल
- दलाली रुके तो कैंपस में सुधरे पूरी तरह से माहौल
- रजिस्ट्रार का आरोप, गलत काम कराने को दबाव बना रहे थे कई छात्र नेता
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू कैंपस में दलाल राज कायम करने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अमर उजाला ने यहां दलाल राज का भंडाफोड़ किया तो तबसे सख्ती हो गई है। कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कहीं भी कोई खामी पाई जाती है तो उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी। रजिस्ट्रार का आरोप है कि यह हमला भी इसी सख्ती की परिणति है क्योंकि कई छात्र नेता लगातार उन पर गलत काम करने का दबाव बना रहे थे।
पिछले महीने अमर उजाला के स्टिंग के बाद डिग्री मार्कशीट और दूसरे प्रमाण पत्रों में दलाली का प्रकरण सामने आने के बाद कुलपति ने तीन कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की थी। इसके अलावा सभी विभागों को निर्देश दिए गए कि अगर कहीं भी कोई काम नियमानुसार नहीं हुआ तो कार्रवाई की जाएगी। बृहस्पतिवार को रजिस्ट्रार पर हुए हमले में भी यही कनेक्शन दिख रहा है। रजिस्ट्रार के मुताबिक कुछ छात्र नेता उन पर गलत कार्य करने के लिए दबाव डाल रहे थे। ऑफर कर रहे थे। लेकिन जब उन्होंने नियमानुसार ही काम करने की बात कही तो इस तरह की प्लानिंग की गई।
उधर कर्मचारियों का कहना है कि कुछ युवक छात्र नेताओं की धमकी देकर गलत काम कराते हैं। जो गलत काम नहीं करते हैं उनके साथ में मारपीट करते हैं। कर्मचारी इस प्रकरण को भी दलाली के प्रकरण से जोड़ रहे हैं। पिछले महीने ही अमर उजाला ने मार्कशीट डिग्री और दूसरे प्रमाण पत्र बनाने में पैसे लेकर दलाली का राज फाश किया था। इसके बाद से यूनिवर्सिटी में हालात में सुधार आ रहा है।
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काहे की काली सूची, सब घूम रहे कैंपस में
विश्वविद्यालय ने जिन छात्रों को गलत कार्यों के चलते काली सूची में डाल रखा है वही सबसे ज्यादा कैंपस में छात्र नेताओं की भूमिका में नजर आते हैं। इससे ही कैंपस का माहौल बिगड़ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब इन छात्रों को काली सूची में डाल दिया गया तो फिर यह विश्वविद्यालय में एंट्री कैसे कर जाते हैं। पुलिस-प्रशासन भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
रजिस्ट्रार को गंभीर चोटें आईं
इस हमले में रजिस्ट्रार के सिर, चेहरे, गर्दन और हाथों पर गंभीर चोटें आईं। उन्होंने एक निजी चिकित्सक के यहां उपचार कराया। सूचना पर सीओ सिविल लाइन व मेडिकल पुलिस मौके पर पहुंची। रजिस्ट्रार ने बताया कि हमलावरों में एक रेस्टीकेटिड छात्र अमित मलिक था, जो 3 माह पहले भी रजिस्ट्रार कार्यालय में घुसकर बड़ौत के एक कॉलेज के एक संचालक के साथ मारपीट कर चुका है। उसके खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पूरे प्रकरण में पुलिस ने कोई भी जांच पूरी नहीं की। अगर जांच पूरी होती कोई दोबारा हमला नहीं होता.।
देर रात बुलाई आपातकालीन बैठक.
इस प्रकरण को लेकर देर रात करीब 11: 30 बजे विश्वविद्यालय में आपातकालीन बैठक बुला ली गई। कुलपति के बाहर होने के कारण प्रति कुलपति प्रोफेसर वाई विमला और यूनिवर्सिटी के सुरक्षा अधिकारी प्रोफेसर बीरपाल सिंह ने सुरक्षा अधिकारियों और शिक्षकों के साथ बैठक की। पूरे घटनाक्रम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री डीजीपी और एसएसपी को अवगत कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय की तरफ से पुलिस अधिकारियों से यह पूछा जा रहा है कि पिछले मामलों में जब आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज हो गया तो पुलिस ने उसे खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
नामजद मुकदमा दर्ज हो रहा
रजिस्ट्रार की तरफ से तहरीर आ गई है। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज निकाली जा रही हैं। -डॉ. अखिलेश नारायण सिंह, एसपी सिटी
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- दलाली रुके तो कैंपस में सुधरे पूरी तरह से माहौल
- रजिस्ट्रार का आरोप, गलत काम कराने को दबाव बना रहे थे कई छात्र नेता
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू कैंपस में दलाल राज कायम करने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। अमर उजाला ने यहां दलाल राज का भंडाफोड़ किया तो तबसे सख्ती हो गई है। कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कहीं भी कोई खामी पाई जाती है तो उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी। रजिस्ट्रार का आरोप है कि यह हमला भी इसी सख्ती की परिणति है क्योंकि कई छात्र नेता लगातार उन पर गलत काम करने का दबाव बना रहे थे।
पिछले महीने अमर उजाला के स्टिंग के बाद डिग्री मार्कशीट और दूसरे प्रमाण पत्रों में दलाली का प्रकरण सामने आने के बाद कुलपति ने तीन कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की थी। इसके अलावा सभी विभागों को निर्देश दिए गए कि अगर कहीं भी कोई काम नियमानुसार नहीं हुआ तो कार्रवाई की जाएगी। बृहस्पतिवार को रजिस्ट्रार पर हुए हमले में भी यही कनेक्शन दिख रहा है। रजिस्ट्रार के मुताबिक कुछ छात्र नेता उन पर गलत कार्य करने के लिए दबाव डाल रहे थे। ऑफर कर रहे थे। लेकिन जब उन्होंने नियमानुसार ही काम करने की बात कही तो इस तरह की प्लानिंग की गई।
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उधर कर्मचारियों का कहना है कि कुछ युवक छात्र नेताओं की धमकी देकर गलत काम कराते हैं। जो गलत काम नहीं करते हैं उनके साथ में मारपीट करते हैं। कर्मचारी इस प्रकरण को भी दलाली के प्रकरण से जोड़ रहे हैं। पिछले महीने ही अमर उजाला ने मार्कशीट डिग्री और दूसरे प्रमाण पत्र बनाने में पैसे लेकर दलाली का राज फाश किया था। इसके बाद से यूनिवर्सिटी में हालात में सुधार आ रहा है।
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काहे की काली सूची, सब घूम रहे कैंपस में
विश्वविद्यालय ने जिन छात्रों को गलत कार्यों के चलते काली सूची में डाल रखा है वही सबसे ज्यादा कैंपस में छात्र नेताओं की भूमिका में नजर आते हैं। इससे ही कैंपस का माहौल बिगड़ रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब इन छात्रों को काली सूची में डाल दिया गया तो फिर यह विश्वविद्यालय में एंट्री कैसे कर जाते हैं। पुलिस-प्रशासन भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
रजिस्ट्रार को गंभीर चोटें आईं
इस हमले में रजिस्ट्रार के सिर, चेहरे, गर्दन और हाथों पर गंभीर चोटें आईं। उन्होंने एक निजी चिकित्सक के यहां उपचार कराया। सूचना पर सीओ सिविल लाइन व मेडिकल पुलिस मौके पर पहुंची। रजिस्ट्रार ने बताया कि हमलावरों में एक रेस्टीकेटिड छात्र अमित मलिक था, जो 3 माह पहले भी रजिस्ट्रार कार्यालय में घुसकर बड़ौत के एक कॉलेज के एक संचालक के साथ मारपीट कर चुका है। उसके खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। पूरे प्रकरण में पुलिस ने कोई भी जांच पूरी नहीं की। अगर जांच पूरी होती कोई दोबारा हमला नहीं होता.।
देर रात बुलाई आपातकालीन बैठक.
इस प्रकरण को लेकर देर रात करीब 11: 30 बजे विश्वविद्यालय में आपातकालीन बैठक बुला ली गई। कुलपति के बाहर होने के कारण प्रति कुलपति प्रोफेसर वाई विमला और यूनिवर्सिटी के सुरक्षा अधिकारी प्रोफेसर बीरपाल सिंह ने सुरक्षा अधिकारियों और शिक्षकों के साथ बैठक की। पूरे घटनाक्रम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री डीजीपी और एसएसपी को अवगत कराया जा रहा है। विश्वविद्यालय की तरफ से पुलिस अधिकारियों से यह पूछा जा रहा है कि पिछले मामलों में जब आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज हो गया तो पुलिस ने उसे खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
नामजद मुकदमा दर्ज हो रहा
रजिस्ट्रार की तरफ से तहरीर आ गई है। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज निकाली जा रही हैं। -डॉ. अखिलेश नारायण सिंह, एसपी सिटी