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40 साल बाद हो रहा लॉ की डिग्री का सत्यापन
Updated Wed, 02 Aug 2017 08:42 PM IST
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सीसीएसयू में चल रहा है लॉ की डिग्री का सत्यापन, 40 साल पुराने केस भी आए
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट बार काउंसिल करा रही सत्यापन
1977 तक के छात्रों की एलएलबी की डिग्री का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
विपिन धनकड़
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एलएलबी की डिग्री के सत्यापन की बाढ़ सी आ गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा से काफी केस पहुंच रहे हैं। दिलचस्प बात यह है ऐसे भी केस हैं कि वकील साहब प्रैक्टिस करते-करते परीक्षा पास कर जज बन गए और मार्कशीट वेरिफिकेशन के लिए अब आई है। उनका रिटायरमेंट भी नजदीक है। पुराने रिकॉर्ड न मिलने से विवि प्रशासन परेशान है।
इन दिनों सीसीएसयू में एलएलबी की मार्कशीट और डिग्री के सत्यापन के केस काफी आ रहे हैं। यह सत्यापन स्टेट बार काउंसिल द्वारा कराए जा रहे हैं। प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की डिग्री का सत्यापन आवश्यक कर दिया गया है। विवि में 1977 तक के केस पहुंचे हैं। 1980 के दशक और 1990 के दशक के काफी केस हैं। इतने दिन बाद आमतौर पर डिग्री का वेरिफिकेशन नहीं होता। नौकरी प्राइवेट हो या सरकारी उसी दौरान वेरिफिकेशन हो जाता है। पुराने केस में विवि के स्टॉफ को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
वकील बने जज, रिटायरमेंट के करीब
20 से 30 साल प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की डिग्री का वेरिफिकेशन हो रहा है। वकील प्रैक्टिस करते-करते परीक्षा पास कर जज बन गए। कई जज के वेरिफिकेशन आए हैं। रिटायरमेंट के करीब डिग्री का सत्यापन हो रहा है। मामला वकील और जज से जुड़ा है लिहाजा विवि का स्टॉफ भी खोजबीन में गंभीरता से लगा है।
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मशहूर रही है मेरठ की लॉ
सीसीएसयू की लॉ की डिग्री कई राज्यों में मशहूर रही है। मेरठ कॉलेज में लॉ की पढ़ाई सबसे पुरानी है। यहां से पढ़े विद्यार्थी हाईकोर्ट में जज तक बने। वकीलों की भी लंबी फेहरिस्त है। सीटों की संख्या अधिक होने और पुराना कॉलेज होने के कारण दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा तक के छात्र पढ़ने आते थे।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट बार काउंसिल करा रही सत्यापन
1977 तक के छात्रों की एलएलबी की डिग्री का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
विपिन धनकड़
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एलएलबी की डिग्री के सत्यापन की बाढ़ सी आ गई है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा से काफी केस पहुंच रहे हैं। दिलचस्प बात यह है ऐसे भी केस हैं कि वकील साहब प्रैक्टिस करते-करते परीक्षा पास कर जज बन गए और मार्कशीट वेरिफिकेशन के लिए अब आई है। उनका रिटायरमेंट भी नजदीक है। पुराने रिकॉर्ड न मिलने से विवि प्रशासन परेशान है।
इन दिनों सीसीएसयू में एलएलबी की मार्कशीट और डिग्री के सत्यापन के केस काफी आ रहे हैं। यह सत्यापन स्टेट बार काउंसिल द्वारा कराए जा रहे हैं। प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की डिग्री का सत्यापन आवश्यक कर दिया गया है। विवि में 1977 तक के केस पहुंचे हैं। 1980 के दशक और 1990 के दशक के काफी केस हैं। इतने दिन बाद आमतौर पर डिग्री का वेरिफिकेशन नहीं होता। नौकरी प्राइवेट हो या सरकारी उसी दौरान वेरिफिकेशन हो जाता है। पुराने केस में विवि के स्टॉफ को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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वकील बने जज, रिटायरमेंट के करीब
20 से 30 साल प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की डिग्री का वेरिफिकेशन हो रहा है। वकील प्रैक्टिस करते-करते परीक्षा पास कर जज बन गए। कई जज के वेरिफिकेशन आए हैं। रिटायरमेंट के करीब डिग्री का सत्यापन हो रहा है। मामला वकील और जज से जुड़ा है लिहाजा विवि का स्टॉफ भी खोजबीन में गंभीरता से लगा है।
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मशहूर रही है मेरठ की लॉ
सीसीएसयू की लॉ की डिग्री कई राज्यों में मशहूर रही है। मेरठ कॉलेज में लॉ की पढ़ाई सबसे पुरानी है। यहां से पढ़े विद्यार्थी हाईकोर्ट में जज तक बने। वकीलों की भी लंबी फेहरिस्त है। सीटों की संख्या अधिक होने और पुराना कॉलेज होने के कारण दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा तक के छात्र पढ़ने आते थे।