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पुरुषों में जागरुकता का आभाव, जनसंख्या पर कैसे लगेगी लगाम

Fri, 15 Mar 2019 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Mar 2019 01:59 AM IST
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पुरुषों में जागरुकता का आभाव, जनसंख्या पर कैसे लगेगी लगाम
नसबंदी के बारे में सरकार के जागरुकता के तमाम प्रयास के बावजूद समाज में कायम है भ्रम
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महिलाओं के आगे आने से बंधी है स्वास्थ्य विभाग की उम्मीद
शरद गुप्ता
मवाना। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार तमाम प्रयास कर रही है। नसबंदी को लेकर महिलाओं व पुरुषों को जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद पुरुष जागरूक नहीं हो रहे हैं। सीएचसी मवाना के पिछले पांच साल के आंकड़े तो यही गवाही दे रहे हैं।
जागरूक कर रही सरकार
देश की लगातार बढ़ रही आबादी को लेकर सरकार चिंतित है। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इसको लेकर सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क नसबंदी की योजना चलाई जा रही है। जिसमें पुरुष व महिलाओं दोनों के लिए यह योजना है। पुरुष भी इसको लेकर जागरूक हो सकें इसके लिए रैलियां, स्कूल-कॉलेजों में पोस्टर प्रतियोगिता व सेमिनार आदि आयोजित कराए जा रहे हैं। पुरुष समाज शिक्षित होने के बाद भी जागरूक नहीं हो पा रहा है। जिस कारण महिलाओं को ही नसबंदी करानी पड़ती है। जबकि महिला नसबंदी के मुकाबले पुरुष नसबंदी काफी सुरक्षित है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले पुरुषों को चिकित्सक लगातार जागरूक कर रहे हैं। लेकिन पुरुषों पर इसका प्रभाव पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। सवाल यह उठता है कि यदि पुरुष जागरूक नहीं होंगे तो जनसंख्या पर कैसे लगाम लगेगी। हालांकि पिछले पांच वर्ष में सन 2018-19 में पुरुषों में कुछ जागरुकता दिखाई दी। आंकड़ों की माने तो फरवरी 2019 तक 20 पुरुषों ने नसबंदी कराई, जबकि चार वर्षा में यह आंकड़ा मात्र 9 था।
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पुरुषों को लेकर बन चुकी है फिल्म
पुरुष भी नसबंदी कराएं इसको लेकर उन्हें जागरुक करने के लिए डायरेक्टर श्रेयस तलपड़ेे की पोस्टर बॉय फिल्म 2017 में रिलीज हुई थी। इसमें मशहूर अभिनेता सनी देओल, बॉबी देओल व खुद श्रेयस तलपड़े ने भूमिका निभाई थी। फिल्म के अंत में तीनों पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए जागरूक करते नजर आते हैं। बावजूद इसके भी पुरुषों में नसबंदी को लेकर जागरुकता उत्पन्न नहीं हो रही है।
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यह है कारण
-पुरुष प्रधान समाज होने की वजह से नसबंदी कराने से हिचकते हैं।
-पुरुषों में नसबंदी कराने पर कमजोरी का भ्रम बना हुआ है।
-देहात क्षेत्र के पुरुष ये समझते हैं कि नसबंदी के बाद लोग उनका मजाक उड़ायेंगे।
-लगातार जागरुकता का अभाव
आंकड़ों में सीएचसी मवाना
वर्ष महिलाएं पुरुष
2014-15 439 शून्य
2015-16 330 शून्य
2016-17 384 04
2017-18 435 05
2018-19 237 20
------ ------
1845 29
-नोट 2019 के आंकड़े फरवरी तक हैं।
नसबंदी को लेकर पुरुषों में जागरुकता की कमी है। कुछ गलतफमियां भी पुरुषों में बनी हैं। हालांकि पुरुष नसबंदी महिला के मुकाबले काफी सुरक्षित है। सीएचसी मवाना में नसबंदी के लिए आने वाले दंपती को पुरुष नसबंदी को लेकर भी जागरुक किया जा रहा है। जिसके नतीजे अब अच्छे आ रहे हैं।-डॉ. अरुण कुमार, चिकित्सक अधीक्षक मवाना सीएचसी
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