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बदलती रही निगम की सरकारें, नहीं बदली तो औद्योगिक क्षेत्र की सूरत
Updated Tue, 14 Nov 2017 03:06 AM IST
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मेरठ। नगर निगम में 23 साल में चार महापौर आए और चले गए, लेकिन शहर के विकास की प्रमुख रीढ़ यहां के औद्योगिक क्षेत्र आज भी बदहाल है। 35 वर्ष पूर्व स्थापित इस औद्योगिक क्षेत्र को नगर निगम आज तक अपने अधीन तक नहीं ले पाया। यहां स्ट्रीट लाइट, जल निकासी और सड़क जैसी प्रमुख जरूरतों का भी अभाव है।
दिल्ली रोड पर मोहकमपुर फेज प्रथम, मोहकमपुर फेज द्वितीय, साईंपुरम, इंडस्ट्रीयल एरिया, स्पोर्ट्स एंक्लेव, सरस्वती इंडस्ट्रीयल एरिया आदि में छोटी बड़ी करीब दो हजार औद्योगिक इकाईयां हैं। जहां बनने वाला सामान देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक जाता है। करीब 35 वर्ष पूर्व यहां औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हुआ और प्राइवेट बिल्डरों द्वारा धीरे-धीरे इसे विकसित किया जाता रहा।
एमडीए और नगर निगम के बीच फंसा औद्योगिक क्षेत्र
इस औद्योगिक क्षेत्र को प्राइवेट बिल्डर विकसित करके निकलते रहे, लेकिन एमडीए ने इसे नगर निगम को हैंडओवर नहीं कराया। वहीं नगर निगम ने भी इस तरफ कोई रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में सड़कें टूटती रहीं तो नालियां और नाले चौक हो गए। स्ट्रीट लाइटें खराब हो गई। अब स्थिति ऐसी है कि आईआईए भवन की तरफ जाने वाला मार्ग तो कुछ ठीक है, लेकिन बाकी सड़कें टूटी हुई हैं। कहीं जलभराव है तो कहीं पर नालियां ही पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। नालियों से पानी नाले में न जाकर खाली प्लाटों में भर रहा है, जहां हालात तालाब जैसे हो चुके हैं।
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चार करोड़ सालाना टैक्स
इस औद्योगिक क्षेत्र से करीब चार करोड़ रुपये सालाना टैक्स नगर निगम वसूलता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। पिछले दिनों एक नाला निर्माण और सड़क निर्माण भी केंद्रीय योजना के तहत उद्यमियों ने अपने प्रयासों से बनवाया था।
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वर्जन.....
निगम नहीं दे रहा ध्यान
नगर निगम औद्योगिक क्षेत्र के प्रति पूरी तरह लापरवाह है। निगम सिर्फ टैक्स वसूलता है और सुविधाओें के नाम पर महापौर आश्वासन देते रहे, जबकि वसूले जाने वाले टैक्स का आधे से ज्यादा हिस्सा इसी क्षेत्र के विकास में खर्च होना चाहिए। लेकिन नहीं हो रहा है। -अतुल भूषण गुप्ता, चेयरमैन आईआईए मेरठ
गुहार लगाने के बाद भी समाधान नहीं
हम लगातार नगर निगम, एमडीए, प्रशासन और उद्योग मंत्रालय से यहां के विकास की गुहार लगाते आ रहे हैं, पिछले दिनों बारिश में पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया। कई औद्योगिक इकाईयां कई दिन बंद रही। इस स्थिति यहां काम करना मुश्किल होता जा रहा है। -तनुज गुप्ता, सेक्रेट्री आईआईए मेरठ
उद्योग कर रहे पलायन
निगम और एमडीए की लड़ाई में उद्यमी पिस रहे हैं। यही कारण है कि कई बड़े उद्योग यहां से पलायन कर उत्तराखंड जा चुके हैं। स्थिति ये है कि जरा सी बारिश में माल वाहक वाहनों का निकलना दूभर हो जाता है। जल निकासी और सफाई न होने से लेबर बीमारी से जूझती रहती है। -पंकज गुप्ता, प्रांतीय उपाध्यक्ष आईआईए
टूटी पड़ी है नालियां
मेरा प्रकाशक का काम है। मेरी इकाई के सामने बारिश में तीन फीट तक पानी सड़क पर जमा हो जाता है। जो कई दिन में निकलता है। सालों से सड़क टूटी पड़ी है, नालियां गायब हैं। लेकिन नगर निगम का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। -अंतरिक्ष जैन, प्रकाशक
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दिल्ली रोड पर मोहकमपुर फेज प्रथम, मोहकमपुर फेज द्वितीय, साईंपुरम, इंडस्ट्रीयल एरिया, स्पोर्ट्स एंक्लेव, सरस्वती इंडस्ट्रीयल एरिया आदि में छोटी बड़ी करीब दो हजार औद्योगिक इकाईयां हैं। जहां बनने वाला सामान देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक जाता है। करीब 35 वर्ष पूर्व यहां औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हुआ और प्राइवेट बिल्डरों द्वारा धीरे-धीरे इसे विकसित किया जाता रहा।
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एमडीए और नगर निगम के बीच फंसा औद्योगिक क्षेत्र
इस औद्योगिक क्षेत्र को प्राइवेट बिल्डर विकसित करके निकलते रहे, लेकिन एमडीए ने इसे नगर निगम को हैंडओवर नहीं कराया। वहीं नगर निगम ने भी इस तरफ कोई रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में सड़कें टूटती रहीं तो नालियां और नाले चौक हो गए। स्ट्रीट लाइटें खराब हो गई। अब स्थिति ऐसी है कि आईआईए भवन की तरफ जाने वाला मार्ग तो कुछ ठीक है, लेकिन बाकी सड़कें टूटी हुई हैं। कहीं जलभराव है तो कहीं पर नालियां ही पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। नालियों से पानी नाले में न जाकर खाली प्लाटों में भर रहा है, जहां हालात तालाब जैसे हो चुके हैं।
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चार करोड़ सालाना टैक्स
इस औद्योगिक क्षेत्र से करीब चार करोड़ रुपये सालाना टैक्स नगर निगम वसूलता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। पिछले दिनों एक नाला निर्माण और सड़क निर्माण भी केंद्रीय योजना के तहत उद्यमियों ने अपने प्रयासों से बनवाया था।
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वर्जन.....
निगम नहीं दे रहा ध्यान
नगर निगम औद्योगिक क्षेत्र के प्रति पूरी तरह लापरवाह है। निगम सिर्फ टैक्स वसूलता है और सुविधाओें के नाम पर महापौर आश्वासन देते रहे, जबकि वसूले जाने वाले टैक्स का आधे से ज्यादा हिस्सा इसी क्षेत्र के विकास में खर्च होना चाहिए। लेकिन नहीं हो रहा है। -अतुल भूषण गुप्ता, चेयरमैन आईआईए मेरठ
गुहार लगाने के बाद भी समाधान नहीं
हम लगातार नगर निगम, एमडीए, प्रशासन और उद्योग मंत्रालय से यहां के विकास की गुहार लगाते आ रहे हैं, पिछले दिनों बारिश में पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया। कई औद्योगिक इकाईयां कई दिन बंद रही। इस स्थिति यहां काम करना मुश्किल होता जा रहा है। -तनुज गुप्ता, सेक्रेट्री आईआईए मेरठ
उद्योग कर रहे पलायन
निगम और एमडीए की लड़ाई में उद्यमी पिस रहे हैं। यही कारण है कि कई बड़े उद्योग यहां से पलायन कर उत्तराखंड जा चुके हैं। स्थिति ये है कि जरा सी बारिश में माल वाहक वाहनों का निकलना दूभर हो जाता है। जल निकासी और सफाई न होने से लेबर बीमारी से जूझती रहती है। -पंकज गुप्ता, प्रांतीय उपाध्यक्ष आईआईए
टूटी पड़ी है नालियां
मेरा प्रकाशक का काम है। मेरी इकाई के सामने बारिश में तीन फीट तक पानी सड़क पर जमा हो जाता है। जो कई दिन में निकलता है। सालों से सड़क टूटी पड़ी है, नालियां गायब हैं। लेकिन नगर निगम का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। -अंतरिक्ष जैन, प्रकाशक