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एमडीए अधिकारियों की लापरवाही की वजह से नहीं हुआ समाधान
Updated Tue, 22 May 2018 02:16 AM IST
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कंकरखेड़ा। रोहटा रोड फ्लाई ओवर के निर्माण के बाद सड़क का चौड़ीकरण न होने में एमडीए अधिकारियों की घोर लापरवाही सामने आ रही है। सालों से लोग इसकी शिकायत एमडीए उपाध्यक्ष से करते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा फ्लाई ओवर बनने के बाद भी जाम की समस्या का निपटारा नहीं हुआ। अगर एमडीए प्रस्ताव पास होने के बाद समय रहते सेना को पैसा दे देता तो जाम की समस्या से लोगों को कब की निजात मिल जाती। लेकिन इस बार लोगों ने ठान लिया है कि सड़क का चौड़ीकरण तो कराना ही है। इसके लिए अब आंदोलन करना होगा। जिन अधिकारियों की लापरवाही रही है उनको भी बेनकाब किया जाएगा।
रोहटा रोड फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य पूरा हुए पांच साल का समय हो गए हैं। लेकिन अभी तक यहां जाम की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। जहां फ्लाई ओवर उतर रहा है वहां मार्ग का चौड़ीकरण न होने से जाम की स्थिति रहती है। रही सही कसर सामने ही रेलवे फाटक पूरी कर देता है। चौड़ीकरण के लिए डीएम की अध्यक्षता में प्रस्ताव पास हुआ था कि एमडीए तीन करोड़ से अधिक रुपये की धनराशि कैंट बोर्ड को देगा, पर अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ।
अधिकारियों ने की मामले में घोर लापरवाही
जन कल्याण वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष समाज सेवी दुष्यंत रोहटा का कहना है कि प्रस्ताव पास होने के बाद ऐसा नहीं कि अधिकारियों ने इस पर अमल नहीं किया। एमडीए ने विकास नियोजन मंत्रालय से सेना को पैसा देने के लिए पैसा भी मांगा। पैसा आया या नहीं इसको तो एमडीए अधिकारी ही जानते हैं, लेकिन 2014 से वह लगातार एमडीए के अधिकारियों को पत्र भेजकर जवाब मांग रहे हैं पर कभी कोई जवाब नहीं मिला। एक बार एमडीए उपाध्यक्ष ने सचिव राज कुमार को तलब कर मामले की रिपोर्ट भी मांगी। उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसमें एमडीए के अधिकारियों की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार है। इस बार आंदोलन शुरू करेंगे।
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नहीं दिया ध्यान
रोहटा रोड सरस्वती विहार निवासी संजय धीमान कहते हैं कि हर रोज जाम लगता है। वजह सिर्फ सड़क का चौड़ीकरण न होना। शिकायत करते रहे पर कभी प्रशासन ने ध्यान ही नहीं दिया।
बच्चे होते हैं परेशान
रोहटा रोड नंद विहार निवासी सुधीर तेवतिया कहते हैं कि स्कूलों की छुट्टी के बाद जब जाम लगता है तो स्कूल बसों में बैठे हुए बच्चे गर्मी में परेशान हो जाते हैं। कई बार दुर्घटना का भी खतरा बन जाता है।
जल्द मिल सकती है निजात
गगन विहार निवासी पंकज कुमार का कहना है कि एमडीए अगर अब भी ध्यान दे तो जल्द ही लोगों को जाम की समस्या से निजात मिल सकती है।
सेना को मिले पैसा
सरस्वती विहार के रहने वाले शेर सिंह का कहना है कि सेना को अगर पैसा मिल गया तो सेना समस्या का समाधान खुद ही करा देती। एमडीए ने सेना को पैसा ही नहीं दिया।
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रोहटा रोड फ्लाई ओवर का निर्माण कार्य पूरा हुए पांच साल का समय हो गए हैं। लेकिन अभी तक यहां जाम की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। जहां फ्लाई ओवर उतर रहा है वहां मार्ग का चौड़ीकरण न होने से जाम की स्थिति रहती है। रही सही कसर सामने ही रेलवे फाटक पूरी कर देता है। चौड़ीकरण के लिए डीएम की अध्यक्षता में प्रस्ताव पास हुआ था कि एमडीए तीन करोड़ से अधिक रुपये की धनराशि कैंट बोर्ड को देगा, पर अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ।
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अधिकारियों ने की मामले में घोर लापरवाही
जन कल्याण वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष समाज सेवी दुष्यंत रोहटा का कहना है कि प्रस्ताव पास होने के बाद ऐसा नहीं कि अधिकारियों ने इस पर अमल नहीं किया। एमडीए ने विकास नियोजन मंत्रालय से सेना को पैसा देने के लिए पैसा भी मांगा। पैसा आया या नहीं इसको तो एमडीए अधिकारी ही जानते हैं, लेकिन 2014 से वह लगातार एमडीए के अधिकारियों को पत्र भेजकर जवाब मांग रहे हैं पर कभी कोई जवाब नहीं मिला। एक बार एमडीए उपाध्यक्ष ने सचिव राज कुमार को तलब कर मामले की रिपोर्ट भी मांगी। उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसमें एमडीए के अधिकारियों की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार है। इस बार आंदोलन शुरू करेंगे।
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नहीं दिया ध्यान
रोहटा रोड सरस्वती विहार निवासी संजय धीमान कहते हैं कि हर रोज जाम लगता है। वजह सिर्फ सड़क का चौड़ीकरण न होना। शिकायत करते रहे पर कभी प्रशासन ने ध्यान ही नहीं दिया।
बच्चे होते हैं परेशान
रोहटा रोड नंद विहार निवासी सुधीर तेवतिया कहते हैं कि स्कूलों की छुट्टी के बाद जब जाम लगता है तो स्कूल बसों में बैठे हुए बच्चे गर्मी में परेशान हो जाते हैं। कई बार दुर्घटना का भी खतरा बन जाता है।
जल्द मिल सकती है निजात
गगन विहार निवासी पंकज कुमार का कहना है कि एमडीए अगर अब भी ध्यान दे तो जल्द ही लोगों को जाम की समस्या से निजात मिल सकती है।
सेना को मिले पैसा
सरस्वती विहार के रहने वाले शेर सिंह का कहना है कि सेना को अगर पैसा मिल गया तो सेना समस्या का समाधान खुद ही करा देती। एमडीए ने सेना को पैसा ही नहीं दिया।