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संशोधित-- पलटेंगे पन्ने, उत्खनन से खुलेगा बरनावा टीले का राज
Updated Fri, 17 Nov 2017 01:18 AM IST
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बागपत। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम के उत्खनन से बरनावा टीले को लेकर सदियों से चले आ रहे राज से पर्दा हट सकेगा। निदेशक पुरावशेष डॉ. डीएन डिमरी ने कहा उत्खनन का उद्देश्य यह जानना है कि इस क्षेत्र में किन-किन सभ्यताओं के अवशेष हो सकते हैं। यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि बरनावा का महा भारत काल से कितना और कैसा संबंध रहा है।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा गांव में दिसंबर 2017 से मई 2018 तक उत्खनन कार्य को मंजूरी दे दी है। बरनावा टीले के अलावा हिंडन और कृष्णा नदी के आसपास खुदाई की तैयारी है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा गांव के लाक्षा गृह टीले की विधिवत विस्तृत उत्खनन करेगी। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल के निर्देशन में यह खुदाई का कार्य किया जाएगा। बरनावा गांव का टीला असल में सदियों से लोगों के लिए उत्सुकता है। सवाल सैकड़ों हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित किया है। निदेशक पुरावशेष डॉ. डीएन डिमरी का कहना है कि उत्खनन से स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर बरनावा क्षेत्र में इतिहास में कौन-कौन सी सभ्यताएं रही हैं। यहां के लोगों का रहन-सहन क्या था और किस तरह लोग अपना जीवन यापन करते थे। खुदाई से ही यह भी स्पष्ट होगा कि महाभारत का इस पूरे क्षेत्र से कितना जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा उत्खनन के बाद लाक्षा गृह, गुफा और टीले को लेकर चल रही किवदंतियों का खुला हो सकेगा।
सिनौली, चंदायन और अब बरनावा
बागपत। वर्ष 2005 के सितंबर माह में सिनौली में खुदाई का कार्य कराया गया था। यहां हड़प्पा कालीन कब्र दाह स्थल मिला था। इससे इस क्षेत्र में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पुष्टि हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। गांव में उत्खनन के दौरान चित्रित धूसर मृद भांड संस्कृति, कुषाण काल, गुप्त और राजपूत सभ्यताओं के प्रमाण भी मिल चुके हैं।
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बरनावा में मानव बस्ती मिलने की उम्मीद
बागपत। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का कहना है कि बरनावा क्षेत्र जिस तरह से बसा हुआ है, इससे यहां मानव बस्ती भी मिल सकती है। उत्खनन का कार्य शुरू हो जाने के बाद ही यहां के इतिहास से लोग रूबरू होंगे।
केंद्र सरकार के पत्र से मिली सूचना
बागपत। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने बताया कि उत्खनन की बाबत केंद्र सरकार की ओर से पत्र मिल चुका है। बरनावा में खुदाई की बात कही गई है। टीम को प्रशासनिक स्तर से हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बरनावा गांव में दिसंबर 2017 से मई 2018 तक उत्खनन कार्य को मंजूरी दे दी है। बरनावा टीले के अलावा हिंडन और कृष्णा नदी के आसपास खुदाई की तैयारी है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा गांव के लाक्षा गृह टीले की विधिवत विस्तृत उत्खनन करेगी। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल के निर्देशन में यह खुदाई का कार्य किया जाएगा। बरनावा गांव का टीला असल में सदियों से लोगों के लिए उत्सुकता है। सवाल सैकड़ों हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित किया है। निदेशक पुरावशेष डॉ. डीएन डिमरी का कहना है कि उत्खनन से स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर बरनावा क्षेत्र में इतिहास में कौन-कौन सी सभ्यताएं रही हैं। यहां के लोगों का रहन-सहन क्या था और किस तरह लोग अपना जीवन यापन करते थे। खुदाई से ही यह भी स्पष्ट होगा कि महाभारत का इस पूरे क्षेत्र से कितना जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा उत्खनन के बाद लाक्षा गृह, गुफा और टीले को लेकर चल रही किवदंतियों का खुला हो सकेगा।
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सिनौली, चंदायन और अब बरनावा
बागपत। वर्ष 2005 के सितंबर माह में सिनौली में खुदाई का कार्य कराया गया था। यहां हड़प्पा कालीन कब्र दाह स्थल मिला था। इससे इस क्षेत्र में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पुष्टि हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। गांव में उत्खनन के दौरान चित्रित धूसर मृद भांड संस्कृति, कुषाण काल, गुप्त और राजपूत सभ्यताओं के प्रमाण भी मिल चुके हैं।
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बरनावा में मानव बस्ती मिलने की उम्मीद
बागपत। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का कहना है कि बरनावा क्षेत्र जिस तरह से बसा हुआ है, इससे यहां मानव बस्ती भी मिल सकती है। उत्खनन का कार्य शुरू हो जाने के बाद ही यहां के इतिहास से लोग रूबरू होंगे।
केंद्र सरकार के पत्र से मिली सूचना
बागपत। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने बताया कि उत्खनन की बाबत केंद्र सरकार की ओर से पत्र मिल चुका है। बरनावा में खुदाई की बात कही गई है। टीम को प्रशासनिक स्तर से हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।