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मेरठ महायोजना: अपनी कारगुजारियों में ही उलझा एमडीए

Tue, 30 Apr 2019 02:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 02:51 AM IST
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मेरठ महायोजना: अपनी कारगुजारियों में ही उलझा एमडीए
मेरठ महायोजना: अपनी कारगुजारियों में ही उलझा एमडीए
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मेरठ। महानगर के विकास के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान यानी महायोजना 2021 को जैसे एमडीए भूल ही गया। तभी तो जिन मार्गों को चौड़ा करना था, उनमें कम चौड़ाई पर ही नक्शे पास कर दिए गए। अब वहां इमारतें खड़ी हैं। ऐसे में एमडीए इस मार्ग को चौड़ा करे भी तो कैसे।
मेरठ महायोजना 2021 को समाप्त होने में मात्र दो साल रह गए हैं। लेकिन इसके काम अभी भी अधर में ही अटके हैं। शहर का सुनियोजित विकास हो ही नहीं पाया। दो चरणों में इस योजना के शहर के विकास का मसौदा तैयार किया गया। पहला चरण वर्ष 2004 से 2011 तक तथा दूसरा चरण वर्ष 2012 से 2021 तक है। दूसरा चरण भी पूरा होने को है। लेकिन महायोजना के विकास कार्य अभी शुरू तक नहीं हो पाए हैं। अब नई महायोजना 2031 का प्रस्ताव है। इसे शासन को मंजूरी के लिए भेजा गया है। वहां से मंजूरी आते ही इसका सर्वे शुरू कर दिया जाएगा।
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यह किया गया है प्रस्ताव
मेरठ महायोजना 2011 कुल 14233 हेक्टेयर में की गई थी, जबकि महायोजना 2021 में कुल 15590 हेक्टेयर नगरीय क्षेत्र का प्रस्ताव किया गया था। इसमें अनुमानित 23 लाख जनसंख्या के लिए 153 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर घनत्व प्राप्त करने का प्रस्ताव था।
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यहां तो अपने ही जाल में उलझा एमडीए
लावड़ रोड को महायोजना में शामिल किया गया था। प्रस्ताव था कि इस मार्ग को 60 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इरादा यह भी था कि रुड़की रोड को मोदीपुरम आदि से जोड़ रही यह रोड इनर रिंग रोड की तरह काम करेगी। लेकिन यह सपना पूरा ही नहीं हो पाया। आगे भी शायद ही पूरा हो क्योंकि यहां काम ही ऐसा किया गया। एमडीए ने यह देखा ही नहीं कि यह महायोजना का साठ मीटर चौड़ा प्रस्तावित मार्ग है और यहां 45 मीटर चौड़े मार्ग पर ही पर कालोनियों के नक्शे पास कर डाले। दर्जनों कालोनियां, कॉलेज आदि यहां इसी चौड़ाई पर डेवलप हो गए। अब 60 मीटर चौड़ा रोड कैसे बने। इन कालोनियों को तोड़ना तो मुमकिन नहीं।

अन्य भी है ऐसे ही कार्य
केवल एक ही नहीं बल्कि ऐेसे अन्य तमाम कार्य हैं जो महायोजना में पूरा होने थे। बेहतर यातायात प्रबंधन का प्रस्ताव था। इसमें बस अड्डे, सड़कें, हवाई अड्डे जैसे सभी प्रस्ताव थे जो अभी सपना ही हैं।
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