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ऐसे लगा..जैसे मौत छू कर गुजर गई हो
Updated Thu, 14 Sep 2017 08:07 PM IST
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ऐसा लगा...जैसे मौत छूकर गुजर गई
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मेरठ।
‘ऐसा लगा जैसे मौत छू कर गुजर गई हो। चीख-पुकार और बचाओ-बचाओ का शोर था। लोग जान बचाने के लिए पानी में हाथ-पैर मार रहे थे। कोई जैसे-तैसे किनारे पहुंचा तो किसी को लोगों ने पानी से बाहर निकाला, वहीं कुछ डूब गए। बहुत ही खौफनाक मंजर था। उसे सोचकर आत्मा कांप जाती है। भगवान फिर कभी ऐसी पीड़ा से न गुजारे।’ यह कहना है बागपत में बृहस्पतिवार को हुए नाव हादसे में सुरक्षित बचा ली गई महिलाओं का।
आठ महिलाएं नीरज, ममता, खातून, संजो गीता, बबली, सुमन, फूलवती और शिमला मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती हैं। इनका उपचार चल रहा है। ये सभी बागपत के काठा गांव की रहने वाली हैं। मजदूरी के लिए नाव से यमुना पार जाती हैं। नाविक ले जाने और लाने के 10-10 रुपये लेता है। यमुना पार इन्हें 130-150 रुपये मजदूरी मिलती है। नीरज (28) ने बताया कि रोजी-रोटी की खातिर रोजाना यमुना पार करके जाते थे। आज नाविक ने क्षमता से ज्यादा लोग बैठा लिए थे। डर लग रहा था कि कुछ हो न जाए और वैसा ही हुआ। ममता (30) ने बताया कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। तीन बच्चे हैं, उनकी परवरिश के लिए मजदूरी करती है। खातून (45) और संजो गीता (45) ने बताया कि वे डूबने लगीं तो शोर मचा दिया। उन्हें किनारे खड़े कुछ लोगों ने बचाया। बबली (42) ने बताया कि उसे लगा कि वह डूब जाएगी, बचेगी नहीं। उसके बाद पांच बेटियों और एक बेटे का क्या होगा। वह बेहोश हो गई थीं। उसे याद नहीं वह कैसे निकाली गई। सुमन (30) देर शाम तक पूरी तरह होश में नहीं थी। वह बात नहीं कर पा रही थी। फूलवती (35) और शिमला (30) का कहना है कि नाव में 35-40 लोग थे। नाविक नाव लेकर चलने लगा, थोड़ी दूर चला, मगर फिर नाव किनारे पर ले आया और वहां खड़े कुछ और लोगों को बैठा लिया। इनका दावा है नाव में 60-70 लोग होंगे। इससे पहले कभी इतनी संख्या में लोग नाव में एक साथ नहीं बैठे थे। थोड़ा आगे चलने पर नाव भंवर में फंस गई और सब डूबने लगे। कुछ ही लोग बचाए जा सके हैं। मेडिकल अस्पताल में भर्ती इन घायलों के परिजन भी पहुंच गए हैं।
पीड़ितों से मिले डीएम
मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में शाम को डीएम समीर वर्मा पहुंचे। उन्होंने नाव हादसे के पीड़ितों से मुलाकात की। उनका हाल-चाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज करने की हिदायत दी। इस दौरान मेडिकल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी और डॉ. दिनेश राणा आदि रहे।
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मुख्य बातें
बागपत हादसे के आठ पीड़ित मेडिकल अस्पताल में भर्ती
130-150 रुपये कमाने के लिए नाव से जाते हैं यमुना पार
नाविक दोबारा लोगों को नहीं बैठाता तो नहीं होता हादसा
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मेरठ।
‘ऐसा लगा जैसे मौत छू कर गुजर गई हो। चीख-पुकार और बचाओ-बचाओ का शोर था। लोग जान बचाने के लिए पानी में हाथ-पैर मार रहे थे। कोई जैसे-तैसे किनारे पहुंचा तो किसी को लोगों ने पानी से बाहर निकाला, वहीं कुछ डूब गए। बहुत ही खौफनाक मंजर था। उसे सोचकर आत्मा कांप जाती है। भगवान फिर कभी ऐसी पीड़ा से न गुजारे।’ यह कहना है बागपत में बृहस्पतिवार को हुए नाव हादसे में सुरक्षित बचा ली गई महिलाओं का।
आठ महिलाएं नीरज, ममता, खातून, संजो गीता, बबली, सुमन, फूलवती और शिमला मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती हैं। इनका उपचार चल रहा है। ये सभी बागपत के काठा गांव की रहने वाली हैं। मजदूरी के लिए नाव से यमुना पार जाती हैं। नाविक ले जाने और लाने के 10-10 रुपये लेता है। यमुना पार इन्हें 130-150 रुपये मजदूरी मिलती है। नीरज (28) ने बताया कि रोजी-रोटी की खातिर रोजाना यमुना पार करके जाते थे। आज नाविक ने क्षमता से ज्यादा लोग बैठा लिए थे। डर लग रहा था कि कुछ हो न जाए और वैसा ही हुआ। ममता (30) ने बताया कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। तीन बच्चे हैं, उनकी परवरिश के लिए मजदूरी करती है। खातून (45) और संजो गीता (45) ने बताया कि वे डूबने लगीं तो शोर मचा दिया। उन्हें किनारे खड़े कुछ लोगों ने बचाया। बबली (42) ने बताया कि उसे लगा कि वह डूब जाएगी, बचेगी नहीं। उसके बाद पांच बेटियों और एक बेटे का क्या होगा। वह बेहोश हो गई थीं। उसे याद नहीं वह कैसे निकाली गई। सुमन (30) देर शाम तक पूरी तरह होश में नहीं थी। वह बात नहीं कर पा रही थी। फूलवती (35) और शिमला (30) का कहना है कि नाव में 35-40 लोग थे। नाविक नाव लेकर चलने लगा, थोड़ी दूर चला, मगर फिर नाव किनारे पर ले आया और वहां खड़े कुछ और लोगों को बैठा लिया। इनका दावा है नाव में 60-70 लोग होंगे। इससे पहले कभी इतनी संख्या में लोग नाव में एक साथ नहीं बैठे थे। थोड़ा आगे चलने पर नाव भंवर में फंस गई और सब डूबने लगे। कुछ ही लोग बचाए जा सके हैं। मेडिकल अस्पताल में भर्ती इन घायलों के परिजन भी पहुंच गए हैं।
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पीड़ितों से मिले डीएम
मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में शाम को डीएम समीर वर्मा पहुंचे। उन्होंने नाव हादसे के पीड़ितों से मुलाकात की। उनका हाल-चाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज करने की हिदायत दी। इस दौरान मेडिकल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी और डॉ. दिनेश राणा आदि रहे।
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मुख्य बातें
बागपत हादसे के आठ पीड़ित मेडिकल अस्पताल में भर्ती
130-150 रुपये कमाने के लिए नाव से जाते हैं यमुना पार
नाविक दोबारा लोगों को नहीं बैठाता तो नहीं होता हादसा