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सफेद इमारत का काला सच बेनकाब
Updated Mon, 19 Mar 2018 02:43 AM IST
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस और दूसरे विषयों की कॉपियों की अदला बदली का भंडाफोड़ होने के बाद कई बड़े राज उजागर हो रहे हैं।
सामने आया है कि परीक्षाओं के शुरू होते ही आंसर बुक सेक्शन के बाहर लग्जरी गाड़ियों की संख्या बढ़ जाती थी। दिन में कई बार बाहरी लोग पुस्तिका अनुभाग के प्रभारी पवन से मिलने आने लगते थे। इसी के साथ ही कई कॉलेजों के संचालकों से भी उसकी नज़दीकियां थी। पूरे स्कैंडल का खुलासा होने के बाद अब दूसरे कर्मचारियों को भी समझ में आ रहा है कि पवन से मिलने लग्जरी गाड़ियों में लोग क्यों आते थे।
यूनिवर्सिटी में व्हाइट बिल्डिंग के नाम से मशहूर आंसर बुक सेक्शन के बाहर पूरे साल सन्नाटा सा ही पसरा रहता है। लेकिन जैसे ही कॉलेजों में परीक्षाएं शुरू होती हैं तो यहां पर चहल पहल बढ़ जाती है । कॉलेज से कॉपी लाकर यहां रखे जाने का काम शुरू हो जाता है। लेकिन पवन के पकडे़ जाने के बाद उसके साथ काम करने वाले कई कर्मचारियों ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पवन से मिलने के लिए लग्जरी गाड़ियों में लोगों का आना शुरू हो जाता था। पवन कई बार उन लोगों को भीतर ही बुला लेता था तो कई बार खुद आकर गाड़ियों में उनके साथ बैठकर बातें करता था। इन लोगों में कई सेल्फ फाइनेंस कॉलेज के डायरेक्टर या फिर उनके नुमाइंदे भी शामिल थे।
यह लोग पवन के संपर्क में सिर्फ इसी वजह से थे ताकि अपने यहां के छात्र-छात्राओं को ठेका लेकर पास करा सकें। कर्मचारियों की मानें तो पवन संदीप और कपिल के अलावा और भी दर्जनों कर्मचारी इस गड़बड़झाले को अंजाम दे रहे थे। बताया तो यहां तक जा रहा है कि इन कर्मचारियों द्वारा कई दूसरे लोगों को भी पैसा दिया जाता था। यहां तक की आंसर बुक सेक्शन के सीसीटीवी कैमरे भी अधिकांश समय बंद रहते थे। हालांकि इसको लेकर सोमवार को स्थिति साफ हो पाएगी कि सीसीटीवी कैमरे कब से बंद पड़े हैं। यह चालू रहते हैं तो उनकी स्थिति क्या है। इसको लेकर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही एसटीएफ की टीम भी सोमवार को विश्व विद्यालय पहुंचकर जांच करेगी। एसटीएफ की टीम यहां लगे कैमरे की फुटेज मांग रही है।
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कई छात्र नेताओं के भी शामिल होने की आ रही बात
पवन के कई छात्र नेताओं से भी संबंध होने की बात सामने आ रही है। यह भी उससे कॉपियां बदलवाते थे। माना जा रहा है कि सेमेस्टर एग्जाम की भी काफी कॉपियां पवन से बदलवाई गई थी। इसको लेकर एसटीएफ कविराज, पवन, संदीप और कपिल के मोबाइल की सीडीआर भी निकलवा रही है। कौन-कौन लोग इनके सबसे ज्यादा नजदीकी से इसका पता किया जाएगा। इसके बाद कुछ और सुबूत हाथ लगेंगे।
भला हो एसटीएफ का, अब तो हाल सुधरेगा
यूनिवर्सिटी में हो रहे कॉपियों के इस खेल के उजागर होने के बाद हर कोई अवाक है। वे छात्र-छात्राएं परेशान हैं जो दिन रात मेहनत करके पढ़ाई कर रहे हैं। वह अभिभावक परेशान है जो अपने बच्चों को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। वह शिक्षक परेशान हैं जो यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में लेक्चर देते हैं। शिक्षकों का कहना है कि भला हो एसटीएफ का जो उसने खेल का पर्दाफाश कर दिया, नहीं तो यह चलता रहता। कम से कम अब ऐसा करने से कर्मचारियों में कुछ तो डर रहेगा। नहीं तो विश्वविद्यालय ने तो आज तक किसी भी मामले में ऐसी सख्ती नहीं की।
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सामने आया है कि परीक्षाओं के शुरू होते ही आंसर बुक सेक्शन के बाहर लग्जरी गाड़ियों की संख्या बढ़ जाती थी। दिन में कई बार बाहरी लोग पुस्तिका अनुभाग के प्रभारी पवन से मिलने आने लगते थे। इसी के साथ ही कई कॉलेजों के संचालकों से भी उसकी नज़दीकियां थी। पूरे स्कैंडल का खुलासा होने के बाद अब दूसरे कर्मचारियों को भी समझ में आ रहा है कि पवन से मिलने लग्जरी गाड़ियों में लोग क्यों आते थे।
यूनिवर्सिटी में व्हाइट बिल्डिंग के नाम से मशहूर आंसर बुक सेक्शन के बाहर पूरे साल सन्नाटा सा ही पसरा रहता है। लेकिन जैसे ही कॉलेजों में परीक्षाएं शुरू होती हैं तो यहां पर चहल पहल बढ़ जाती है । कॉलेज से कॉपी लाकर यहां रखे जाने का काम शुरू हो जाता है। लेकिन पवन के पकडे़ जाने के बाद उसके साथ काम करने वाले कई कर्मचारियों ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पवन से मिलने के लिए लग्जरी गाड़ियों में लोगों का आना शुरू हो जाता था। पवन कई बार उन लोगों को भीतर ही बुला लेता था तो कई बार खुद आकर गाड़ियों में उनके साथ बैठकर बातें करता था। इन लोगों में कई सेल्फ फाइनेंस कॉलेज के डायरेक्टर या फिर उनके नुमाइंदे भी शामिल थे।
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यह लोग पवन के संपर्क में सिर्फ इसी वजह से थे ताकि अपने यहां के छात्र-छात्राओं को ठेका लेकर पास करा सकें। कर्मचारियों की मानें तो पवन संदीप और कपिल के अलावा और भी दर्जनों कर्मचारी इस गड़बड़झाले को अंजाम दे रहे थे। बताया तो यहां तक जा रहा है कि इन कर्मचारियों द्वारा कई दूसरे लोगों को भी पैसा दिया जाता था। यहां तक की आंसर बुक सेक्शन के सीसीटीवी कैमरे भी अधिकांश समय बंद रहते थे। हालांकि इसको लेकर सोमवार को स्थिति साफ हो पाएगी कि सीसीटीवी कैमरे कब से बंद पड़े हैं। यह चालू रहते हैं तो उनकी स्थिति क्या है। इसको लेकर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही एसटीएफ की टीम भी सोमवार को विश्व विद्यालय पहुंचकर जांच करेगी। एसटीएफ की टीम यहां लगे कैमरे की फुटेज मांग रही है।
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कई छात्र नेताओं के भी शामिल होने की आ रही बात
पवन के कई छात्र नेताओं से भी संबंध होने की बात सामने आ रही है। यह भी उससे कॉपियां बदलवाते थे। माना जा रहा है कि सेमेस्टर एग्जाम की भी काफी कॉपियां पवन से बदलवाई गई थी। इसको लेकर एसटीएफ कविराज, पवन, संदीप और कपिल के मोबाइल की सीडीआर भी निकलवा रही है। कौन-कौन लोग इनके सबसे ज्यादा नजदीकी से इसका पता किया जाएगा। इसके बाद कुछ और सुबूत हाथ लगेंगे।
भला हो एसटीएफ का, अब तो हाल सुधरेगा
यूनिवर्सिटी में हो रहे कॉपियों के इस खेल के उजागर होने के बाद हर कोई अवाक है। वे छात्र-छात्राएं परेशान हैं जो दिन रात मेहनत करके पढ़ाई कर रहे हैं। वह अभिभावक परेशान है जो अपने बच्चों को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं। वह शिक्षक परेशान हैं जो यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में लेक्चर देते हैं। शिक्षकों का कहना है कि भला हो एसटीएफ का जो उसने खेल का पर्दाफाश कर दिया, नहीं तो यह चलता रहता। कम से कम अब ऐसा करने से कर्मचारियों में कुछ तो डर रहेगा। नहीं तो विश्वविद्यालय ने तो आज तक किसी भी मामले में ऐसी सख्ती नहीं की।