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एनएएस कालेज ने लॉन्च किया एप, जल्द ही सब ऑनलाइन
Updated Thu, 25 Jan 2018 02:36 AM IST
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एप से ही फीस जमा कर सकेंगे छात्र
मेरठ। एनएएस कॉलेज ने छात्रों की सुविधा के लिए एप तैयार किया है। इससे छात्र को कोेई भी फीस जमा करनी हो या फिर दूसरे काम, सब आसानी से हो जाएंगे। एप की टेस्टिंग चल रही है। इसके अलावा कॉलेज में जनरल अकाउंट सेक्शन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो गया है। कॉलेज की लाइब्रेरी को भी ऑनलाइन करने की तैयारी है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीपी राकेश ने बताया कि सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग चल रही है। जिसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। एप लांच होने के बाद छात्रों को फीस के लिए काउंटर पर जाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन फीस जमा हो सकेगी। दूसरे काम भी ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके अलावा कॉलेज ने अपनी वेबसाइट को भी अपग्रेड किया है। प्राचार्य ऑफिस और जनरल सेक्शन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो गए हैं। डॉ. वीपी राकेश ने बताया कि कॉलेज की लाइब्रेेरी को भी कंप्यूटर से जोड़ दिया गया है। जल्द ही इसे ऑनलाइन करने की योजना है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में करीब ढाई सौ बच्चों के बैठने की व्यवस्था है। वहां इस वक्त 34 हजार से ज्यादा किताबें हैं। इसके अलावा सात हजार टेक्सटबुक और रिफरेंस बुक हैं। प्राचार्य का कहना है कि हाल ही में केंद्र सरकार की तरफ से भी विश्वविद्यालय में आयोजित मीटिंग में कॉलेजों को अपने एप बनाने के लिए कहा है, लेकिन उनके यहां पहले से ही इस पर काम चल रहा था।
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मेरठ। एनएएस कॉलेज ने छात्रों की सुविधा के लिए एप तैयार किया है। इससे छात्र को कोेई भी फीस जमा करनी हो या फिर दूसरे काम, सब आसानी से हो जाएंगे। एप की टेस्टिंग चल रही है। इसके अलावा कॉलेज में जनरल अकाउंट सेक्शन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो गया है। कॉलेज की लाइब्रेरी को भी ऑनलाइन करने की तैयारी है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीपी राकेश ने बताया कि सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग चल रही है। जिसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। एप लांच होने के बाद छात्रों को फीस के लिए काउंटर पर जाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन फीस जमा हो सकेगी। दूसरे काम भी ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके अलावा कॉलेज ने अपनी वेबसाइट को भी अपग्रेड किया है। प्राचार्य ऑफिस और जनरल सेक्शन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो गए हैं। डॉ. वीपी राकेश ने बताया कि कॉलेज की लाइब्रेेरी को भी कंप्यूटर से जोड़ दिया गया है। जल्द ही इसे ऑनलाइन करने की योजना है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में करीब ढाई सौ बच्चों के बैठने की व्यवस्था है। वहां इस वक्त 34 हजार से ज्यादा किताबें हैं। इसके अलावा सात हजार टेक्सटबुक और रिफरेंस बुक हैं। प्राचार्य का कहना है कि हाल ही में केंद्र सरकार की तरफ से भी विश्वविद्यालय में आयोजित मीटिंग में कॉलेजों को अपने एप बनाने के लिए कहा है, लेकिन उनके यहां पहले से ही इस पर काम चल रहा था।
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