फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   बिल्डरों ने कब्जाई करोड़ां की सरकारी जमीन

बिल्डरों ने कब्जाई करोड़ां की सरकारी जमीन

Sat, 09 Sep 2017 02:51 AM IST
Updated Sat, 09 Sep 2017 02:51 AM IST
विज्ञापन
बिल्डरों ने कब्जाई करोड़ां की सरकारी जमीन

विज्ञापन
- सरकारी जमीन पर चल रहे कई बड़े प्रोजेक्ट
- कमिश्नर ने शुरू कराई जांच, कई पर हो सकती है कार्रवाई
- निगम, तहसील और एमडीए अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ खेल

अमित मुदगल
मेरठ।
शहर कई बड़े बिल्डरों ने करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि अपने प्रोजेक्ट में कब्जा ली है। न केवल नजूल भूमि बल्कि निगम और एमडीए की भूमि पर भी कब्जा कर आवास बनाकर बेच डाले हैं। नियमों को पलीता लगाकर और अधिकारियों की शह पर इस खेल को अंजाम दिया गया। ऐसे प्रकरणों की जांच कमिश्नर स्तर पर शुरू की गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही कई बिल्डरों पर कार्रवाई होने वाली है।

केस एक
रकबा मलियाना का है जिस पर वेदव्यासपुरी से सटाकर एक बड़ा प्रोजेक्ट बनाया गया है। नगर निगम की लगभग 20 हजार वर्ग मीटर पर कब्जा किया गया है, जिसकी कीमत 25-30 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। पिछली सरकार में इस प्रोजेक्ट का भूमि पूजन हुआ था, जिसमें कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव भी शामिल हुए थे। उस समय इस प्रोजेक्ट पर सरकारी अधिकारियाें ने सख्ती नहीं की। हालांकि इसक ा लाभ निगम अधिकारियों ने भी खूब उठाया और मामले को दबाकर रखा।
विज्ञापन


केस दो
रोहटा रोड स्थित एक कालोनी में निगम की दस हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन कब्जाई गई है। जिस बिल्डर ने यह जमीन कब्जाई है। उसका टीपी नगर में भी एक आवास विकास का प्रोजेक्ट चल रहा है। जो नियमविरुद्ध निर्माण कराने को लेकर विवादों में है। यहां भी अधिकारियाें ने पूरे मामले पर लीपापोती कर दी और मामले को दबा दिया। इसी बिल्डर पर अब एक अन्य व्यक्ति ने गलत तरीके से मुआवजा भी उठाने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


केस तीन
गंगानगर स्थित दो बड़े प्रोजेक्ट में निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण दोनों की बीस हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन कब्जाई गई है। एमडीए अधिकारियों ने तो खेल यह किया है कि बिल्डर को आवंटन से ज्यादा जमीन माप दी गई। इसका सर्वे नहीं किया और बिल्डर को बड़ा लाभ दे दिया गया। गढ़ रोड स्थित एक पुराने प्रोजेक्ट में भी निगम की काफी जमीन कब्जाई गई है।

अब कमिश्नर की तिरछी नजर
ऐसे कई और प्रकरण भी हैं, जिन पर शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने प्रशासन के दो वरिष्ठ अधिकारियों से जांच शुरू कराई है। उन्होंने कहा है कि गंभीरता से जांच हो और बिल्डरों पर तो कार्रवाई हो ही, उन अधिकारियों पर भी एक्शन हो, जिनकी शह पर यह काम हुआ।

पैसा भी नहीं दिया
इनमें से कई प्रकरण ऐसे हैं जहां जमीन कर समायोजन नियमानुसार हो सकता था पर ऐसा नहीं किया गया। सरकारी खजाने में रकम जमा कराए बिना ही कालोनी डेवलप कर दी गई और करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया गया। न ही बदले में जमीन दी गई।

ये हैं नियम
निगम आदि की भूमि का सर्किल रेट के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। जो भी भूमि की कीमत बैठती है, उसको संबंधित विभाग के खजाने में जमा किया जाता है। उसके बाद ही प्राइवेट अथवा किसी विभाग को भूमि पर कब्जा करने का अधिकार मिलता है।
- अगर कोई कालोनाइजर अपनी भूमि के बीच में आयी सरकारी चकरोड, नाली व बंजर आदि भूमि पर कब्जा करना चाहता है तो उस समस्त भूमि के रकबे की माप कराएगा। साथ ही विभाग की सहमति के अनुसार उस भूमि के एक्सचेंज करके किसी दूसरे स्थान पर उतनी ही भूमि देनी होगी।


वर्जन
कई बड़े बिल्डरों के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की शिकायत मिली है। जिस पर जांच शुरू कर दी गई है। प्रथमदृष्टया लग रहा है कि खेल हुआ है। जांच के बाद यदि गड़बड़ी मिली तो निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई होगी।
डा. प्रभात कुमार आयुक्त मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed