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तपने के बाद ही निखरता है सोना
Updated Sun, 03 Sep 2017 02:56 AM IST
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मेरठ। पर्यूषण महापर्व पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में श्री जी का अभिषेक हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य नवीन जैन एवं विनोद जैन को प्राप्त हुआ।
पं. ऋषभ शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि हमने पर्यूषण पर्व मनाकर खुद की पीठ तो खूब थपथपा ली, खुद को महान आध्यात्मिक मान बैठे। लेकिन जब उत्तम तप धर्म के द्वारा एक प्रश्न कर लिया जाए कि आत्मा को शुद्धात्मा बनाने के लिए स्वयं को तपस्या की भट्टी में कितना झोंका तो शायद तुम्हारे पास उत्तर नहीं होगा। शरीर मात्र सुखाने से नहीं बल्कि अपने कर्मों को सुखाने का प्रयास करें। जैसे सोना तपने के बाद निखरता है, हमारी आत्मा जब तक पकेगी नहीं, तब तक वह परमात्मा नहीं बन सकेगी। इस दौरान सविता जैन, पलकी जैन, सौम्या जैन, पूनम जैन, मेघना जैैन, संस्कृति जैन, परि जैन, तान्या जैन, कपिल जैन, संयज जैन आदि मौजूद रहे।
जो बांटता है, वह पाता है
श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर आनंदपुरी में इंद्रों ने श्रीजी को पांडुक शिला पर विराजमान किया। शांतिधारा का सौभाग्य अरुण जैन को मिला। विधानाचार्य पं. अभिषेक शास्त्री ने कहा कि जो करता है बांटकर भोजन का उपयोग, कभी न व्यापे भूख का उसे भयंकर रोग। जो जितना बांटता है, उससे कहीं ज्यादा प्राप्त करता है। स्व और परहित में जो वस्तु का दान किया जाता है, वह त्याग है। संध्याकालीन सभा में सामूहिक आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस दौरान सुनील जैन प्रवक्ता, वीर सैन, अचल जैन, मनीष जैन, अर्पित जैन, गौरव जैन, संभव जैन, मनोज जैन, रचित जैन आदि मौजूद रहे।
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पं. ऋषभ शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि हमने पर्यूषण पर्व मनाकर खुद की पीठ तो खूब थपथपा ली, खुद को महान आध्यात्मिक मान बैठे। लेकिन जब उत्तम तप धर्म के द्वारा एक प्रश्न कर लिया जाए कि आत्मा को शुद्धात्मा बनाने के लिए स्वयं को तपस्या की भट्टी में कितना झोंका तो शायद तुम्हारे पास उत्तर नहीं होगा। शरीर मात्र सुखाने से नहीं बल्कि अपने कर्मों को सुखाने का प्रयास करें। जैसे सोना तपने के बाद निखरता है, हमारी आत्मा जब तक पकेगी नहीं, तब तक वह परमात्मा नहीं बन सकेगी। इस दौरान सविता जैन, पलकी जैन, सौम्या जैन, पूनम जैन, मेघना जैैन, संस्कृति जैन, परि जैन, तान्या जैन, कपिल जैन, संयज जैन आदि मौजूद रहे।
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जो बांटता है, वह पाता है
श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर आनंदपुरी में इंद्रों ने श्रीजी को पांडुक शिला पर विराजमान किया। शांतिधारा का सौभाग्य अरुण जैन को मिला। विधानाचार्य पं. अभिषेक शास्त्री ने कहा कि जो करता है बांटकर भोजन का उपयोग, कभी न व्यापे भूख का उसे भयंकर रोग। जो जितना बांटता है, उससे कहीं ज्यादा प्राप्त करता है। स्व और परहित में जो वस्तु का दान किया जाता है, वह त्याग है। संध्याकालीन सभा में सामूहिक आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इस दौरान सुनील जैन प्रवक्ता, वीर सैन, अचल जैन, मनीष जैन, अर्पित जैन, गौरव जैन, संभव जैन, मनोज जैन, रचित जैन आदि मौजूद रहे।
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